हंसाना हर किसी के बस की बात नहीं: तनुश्री दत्ता
अपनी पिछली रोमांटिक कॉमेडी फिल्म "गुड बॉय बैड बॉय" में तनुश्री भले ही दर्शकों को हंसाने में नाकामयाब हुई हों मगर फिल्म "ढोल" में उन्होंने दर्शकों को हंसाने की पूरी तैयारी कर ली है. तुषार, शरमन, कुणाल और राजपाल के साथ मिलकर तनुश्री हंसाती हैं या हंसी का पात्र बनती है इसी विषय पर हमनें जानें तनुश्री के विचार जिन्हें हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं.
आपने तो कहा था कि फिल्म ढोल में आप एक आम लडकी का किरदार निभा रही हैं। प्रोमो देखकर तो ऐसा नहीं लगता ?
प्रोमो फिल्म की प्रमोशन के लिए बनाया गया है. यह फिल्म की व्यावसायिकता को ध्यान में रखकर बनाया गया है. जैसा कि मैं आपको पहले भी बता चुकी हूं इस फिल्म में मेरा किरदार एक सिंपल लडकी का है जो एक छोटे से कस्बे में अपने दादा दादी के साथ रहती है. हालांकि वह काफी रईस है मगर स्कूटी चलाती है. वह बडी बडी गाडियों से कम निकलती है. हां इस फिल्म में मेरा इंट्रोड्क्शन एक फैंसी कार से निकलते हुए कराया गया है.
इस बार फिल्म में आपके साथ चार हीरो हैं कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है. मेरी फिल्मों में हमेशा से ज़्यादा हीरो और मैं अकेली हीरोइन रहती आई हूं. खुशी की बात है इस फिल्म में भी वही चल रहा है. यूं भी जीवन में आगे बढते रहना चाहिए. पिछली फिल्म रकीब में तीन थे इस बार चार हैं. शायद आगे चलकर पांच हो जाए.
इस फिल्म में आपके साथ सेक्स बम पायल रोहतगी भी हैं उनकी इमेज से डर नहीं लगा ?
बिल्कुल नहीं. मुझे उनसे डरने की क्या ज़रुरत है. फिल्म में बहुत सारे किरदार होते हैं और उन सब किरदारों के लिए उचित जगह होती है. ऐसे में मुझे फिक्र करने की क्या ज़रुरत है. मैं इस फिल्म में मुख्य किरदार निभा रही हूं और पायल चरित्र कलाकार की भूमिका, मुझे नही लगता कि मुझे उनसे डरने की ज़रुरत है. मेरे अधिकतर सीन चार हीरो के साथ ही है. पायल के साथ स्क्रिन शेयर करने का मौका बहुत कम मिला.
इस फिल्म में आप पहली बार ओम पुरी जैसे वरिष्ठ कलाकार के साथ काम कर रही हैं। शूटिंग के दौरान उनसे कुछ टिप्स ली ?
हां यह बात सच है कि जब हम वरिष्ठ कलाकारों के साथ काम करते हैं तो उनसे काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है. यह मेरे लिए गर्व की बात है कि इस फिल्म में ओम पुरी के साथ टिकू तल्सानिया तथा एक और वरिष्ठ नायिका है जो मेरी दादी बनी है. मुझे याद नहीं कि फिल्म की शूटिंग के दौरान हमने ज़्यादा बातचीत की हो. जहां तक टिप्स लेने की बात है मैं उनके अभिनय को काफी करीब से देखने की कोशिश करती थी किस तरह वह ओम पुरी से मेरे दादाजी के किरदार में आ जाते हैं.
एक निर्देशक के रूप में प्रियदर्शन के बारे में क्या कहना चाहेंगी ?
उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा सुखद रहता है. फिल्म "भागमभाग" में छोटा रोल हो या इस फिल्म में मुख्य भूमिका हर किरदार को उचित जगह देना उनकी खासियत है. उनकी कॉमेडी फिल्मों के साथ साथ मुझे उनकी गंभीर फिल्में भी बहुत पसंद है जो उन्होंने पहले बनाई है. फिल्म "विरासत" मेरी हर समय की पसंदीदा फिल्म है मुझे उसका एक एक डायलॉग याद है. यदि भविष्य में प्रियन सर कोई गंभीर फिल्म बनाएंगे तो उस फिल्म का हिस्सा होना मैं अपना सौभाग्य समझूंगी. मैं चाहूंगी कि उनकी यादगार फिल्मों में से "ढोल " भी एक फिल्म हो.
फिल्म "ढोल" में आप हंसा रही हैं या हंसी का पात्र बनी हैं ?
न मैं हंसा रही हूं और न ही हंसी का पात्र हूं. मैं वह हूं जिसकी वजह से सारी घटनाएं घटती है और फिल्म आगे बढती है. चारो लडके मुझसे शादी करना चाहते हैं क्योंकि मैं बहुत रईस हूं. इसके लिए वह बहुत प्रयास करते हैं जो हास्य को जन्म देता है.
इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कोई यादगार पल जिसका ज़िक्र करना चाहें ?
हां मुझे याद है जब तुषार, शरमन, कुणाल और राजपाल का शॉट एक साथ होता था सारे यूनिट के लोग वह सीन देखने के लिए अपना काम धंधा छोडकर वहां जमा हो जाते थे. अगर कभी किसी बंगले में शूटिंग होती थी तो अडोस पडोस के सभी लोग वहा जमा हो जाते थे और बहुत हंसते. उस समय मैं एक कोने में बैठकर दूर से इन लोगों को देखती रहती और हंसती. जब वहां जमा लोग मुझे देखते तो सोचते कि अरे ये अकेले वहां बैठकर क्यों हंस रही हैं. मुझे अपने आप पर उस वक़्त सबसे ज़्यादा हंसी आती थी. कई बार अब भी शूटिंग के बाद उसे याद करके भी मुझे बहुत हंसी आती है.
तनुश्री आपके अनुसार हंसना आसान है या हंसाना ?
यदि हंसाने वाला ठीक से न हंसाए तो कभी कभी हंसना भी मुश्किल हो जाता है. मेरे अनुसार हंसाना ज़्यादा मुश्किल है क्योंकि हम नहीं जानते कि सामने वाले को क्या पसंद है और वह इस बात पर हंसेगा. अगर फिल्म के कहानीकार तथा निर्देशक अच्छे हों तो आपको चिंता करने की ज़रुरत नहीं है. हां रीयल लाइफ में हंसाने की कोशिश करना फिज़ूल है क्योंकि हंसाना हर किसी के बस की बात नहीं है.
अपनी किस फिल्म में आपको रीयल तनुश्री नज़र आई है ?
देखिए किसी भी फिल्म का नाम लेना मेरे लिए मुमकिन नहीं होगा. हर फिल्म में व्यक्तित्व का थोडा सा भाग आ सकता है. यदि मुझ पर कोई फिल्म बनाई जाए तो यह और बात है. अभी तक किसी भी फिल्म में मैंने रीयल तनुश्री नहीं देखी.
कॉमेडी परिस्थितियों को और अधिक कॉमिक बनाने के लिए आप अपनी तरफ से कितना प्रयास करती है ?
जी नहीं. इस समय मैं सिर्फ अपने निर्देशकों पर निर्भर हूं. मैं निर्देशक तथा कहानीकारों के बताए अनुसार ही अभिनय करती हूं. यह सच है कि हमारे यहां कुछ ऐसे कलाकार हैं जो कॉमेडी के बाद्शाह कहे जाते हैं मगर मेरे लिए यह नया है. हो सकता है कुछ कॉमेडी फिल्में करने के बाद मैं भी उनकी तरह अपनी तरफ से कुछ प्रयास करूं मगर अभी मेरे लिए यह संभव नहीं है.
सुना है आपने अशीम सामंता की फिल्म "डॉन मुत्थु स्वामी " साइन की है ?
कौन है अशीम सामंता. मैंने उनकी कोई फिल्म साइन नहीं की है.
इस फिल्म के अलावा कोई और फिल्म साइन की है ?
कुछ फिल्में हैं मगर अभी उनके बारे में बताना जल्दबाज़ी होगी.


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