प्रियन सर गुरु नहीं, महागुरु हैं

फिल्म 'वन टू थ्री" में तीन लक्ष्मी नारायण की कहानी है. आप अपने लक्ष्मी नारायण के बारे में बताइए ?
अपने लक्ष्मी नारायण के बारे में क्या बताऊं. बहुत सोचता है समझता है साथ ही ढेर सारे सवाल भी पूछता है. दरअसल वह एक पर्फेक्शनिस्ट है. अगर कोई उससे कहे कि बैठना है तो वह पूछेगा सर सोफे पर बैठेंगे या कुर्सी पर, अगर सोफे पर कहेंगे तो फिर पूछेगा सोफे पर लेफ्ट बैठेंगे या राइट, यदि लेफ्ट कहें तो फिर पूछेगा एक्स्ट्रिम लेफ्ट या स्ट्रेट लेफ्ट. बहुत मासूम है मगर साथ ही बहुत इरिटेटिंग भी है. एक दिन वह एक खतरनाक गैंग में फंस जाता है और उन्हें भी अपने व्यवहार से वह इतना परेशान कर देता है कि वह इसे किसी तरह भी खत्म करना चाहते हैं. अश्विनी ने इस फिल्म में कॉमेडी इतनी सिच्यूएशनल लिखी है कि सभी का किरदार काफी दिलचस्प बन गया है.
तीनों किरदार का नाम फिल्म में एक होने से शूटिंग के दौरान आप तीनों में किसी तरह का कोई कंफ्यूज़न नहीं हुआ ?
सबसे पहले तो यह कहना चाहूंगा कि तीनों का नाम एक जैसा होना इस फिल्म की खूबसूरती है. अलग व्यवसाय, अलग शहर के तीन लोगों का एक होटल में एक जैसे नाम के साथ अलग अलग कमरों में ठहरना सबके लिए परेशानी का कारण बन जाती है. मगर सेट पर हमारे साथ किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई. मैं स्वयं को खुशनसीब समझता हूं कि 'हेरा फेरी" के बाद मुझे ऐसी फिल्में मिली जिनमें कहानी के अनुसार सभी का किरदार महत्वपूर्ण था.
निर्देशक अश्विनी धीर की यह पहली फिल्म है उनके बारे में क्या कहना चाहेंगे ?
'ऑफिस ऑफिस" के कारण अश्विनी धीर का मैं ज़बर्दस्त फैन रहा हूं. उनकी खासियत यह है कि वह सिर्फ कॉमेडी नहीं करते हैं बल्कि कॉमेडी के माध्यम से समाज में फैली परेशानियों पर आघात करते हैं. नाटकिय हुए बिना अपनी बात को कह देना अश्विनी की सबसे बडी खासियत है. उसी तरह उन्होंने इस फिल्म को भी बनाया है. उनके निर्देशन में यह एहसास ही नहीं हुआ कि वह पहली बार किसी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं.
इस किरदार में आपको क्या खास बात लगी जो आप इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गए ?
सबसे पहली बात तो अश्विनी बहुत अच्छे लेखक है यह बात मैं जानता था. अगर उन्होने मेरे लिए कोई किरदार सोचा है तो वह बेहतरीन ही होगा. जब वह मेरे पास कहानी लेकर आए तो मैंने उनसे कहा कि मुझे सोचने के लिए चौबीस घंटे का वक़्त दीजिए. अगर उसी वक़्त हां कर देता तो हो सकता है वह सोचते कि हां इसके पास कोई काम नहीं है इसलिए जल्दी से हां बोल दिया.
आपने अश्विनी धीर और प्रियदर्शन के निर्देशन में क्या अंतर महसूस किया ?
प्रियदर्शन को मैं गुरु नहीं, महागुरु मानता हूं क्योंकि कॉमेडी में उनकी पसंद, उनका नज़रिया सब काबिले तारीफ है. प्रियदर्शन सम्मान की डिमांड नहीं करते बल्कि कमांड करते हैं. उसी तरह अश्विनी में भी कॉमेडी को पहचानने का अपना एक नज़रिया है साथ ही उनक लेखक होना उनके हक में जाता है. मुझे अश्विनी और प्रियदर्शन जी में अंतर कम और समानताएं अधिक नज़र आईं.
नीतू चंद्रा आपकी प्रेमिका के रूप में हैं. साथ ही नीतू काफी यंग है उनके साथ आपका अनुभव कैसा रहा ?
मैं भी बहुत यंग हूं. जहां तक नीतू की बात है मेरे अनुसार इस फिल्म में उनका किरदार सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण था. मगर उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया. नए लोगों के साथ काम करना हमेशा से अच्छा लगता है सो नीतू के साथ काम करके भी बहुत अच्छा लगा.
इस फिल्म में एक बार फिर परेश जी आपके साथ हैं क्या कहेंगे ?
उनका मेरे साथ होना मेरे लिए सबसे बडी खुशी की बात है. वह उन लोगों में से हैं जिनका मैं सम्मान करता हूं. मुझे यकीन है बाबू भैया के बाद चड्ढी बनियान बेचने वाले यह लक्ष्मी नारायण लोगों में काफी पॉप्यूलर हो जाएंगे. उन्होंने गेट अप के साथ उनकी भाषा और मैनरिज़्म भी बहुत खूबसूरती से अपनाया है.
क्या वजह है इन दिनों आप काफी कम फिल्मों में नज़र आ रहे हैं ? क्या औरों की तरह आप भी सिलेक्टिव हो गए हैं ?
देखिए मेरे अनुसार इस बॉलीवुड में सिर्फ दो नायक ऐसे हैं जो खुद को सिलेक्टिव कह सकते हैं. अफसोस मैं उनमें से नहीं हूं क्योंकि मेरे पास सौ फिल्में नहीं आ रही है बल्कि दस फिल्में आ रही हैं उनमे से भी ज़रूरी नहीं कि मैं सारी फिल्में करूं. साथ ही यह कहना चाहूंगा कि आज भी मुझमें असुरक्षा की भावना बिल्कुल नहीं है. मेरे प्रोडक्शन कंपनी पॉपकॉर्न एंटरटॆन्मेंट में इस वक़्त पंद्रह फिल्में एक साथ बन रही हैं. मैंने खुद का नाम अपनी फिल्मों से काट दिया है क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरा हीरो बोले सुनील का रोल मुझसे अच्छा था.
हीरो और निर्माता में से कौन सी भूमिका सबसे अधिक इंजॉय कर रहे हैं ?
दोनों. निर्माता का मतलब यह नहीं है कि मैं इसमें पैसा डाल रहा हूं इसलिए इसे इंजॉय कर रहा हूं. मैं सिर्फ फिल्म में पैसा नहीं लगा रहा हूं बल्कि फिल्म से जुडे हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रहा हूं. मेरी फिल्में महज़ मनोरंजन का माध्यम नहीं है अपनी हर फिल्म में मैं समाज और देश से जुडे तथ्यों को दर्शकों के सामने लाना चाहता हूं. 'मिशन इस्तानबुल" में हम आतंकवाद को दर्शा रहे हैं. 'मुंबई चका चक" के माध्यम से हम सभी मुंबई के लोगों को मुंबई को साफ करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. मुंबई मेरी जन्मभूमि नहीं कर्मभूमि है और इसके प्रति मेरी भी कुछ ज़िम्मेदारियां हैं. 'लिटल गॉडफादर" में ट्रेन ब्लास्ट के दौरान मुंबई की एकता को आधार बनाया गया है. इस फिल्म का निर्देशन जॉय ऑगस्टी कर रहे हैं. अलग अलग फिल्मों को मैं इंज़ॉय कर रहा हूं. इनके साथ ही और तीन चार फिल्मों का निर्माण करने जा रहा हूं, जिनके बारे में मैं बाद में बात करूंगा. फिलहाल सिर्फ यही कहना चाहूंगा कि मैं बहुत कुछ करना चाहता हूं, मेरे बहुत बडे सपने हैं.
संजय दत्त के साथ जो फिल्में साइन की है वह कहानी की डिमांड थी या दोस्ती की पुकार थी ?
कहानी के कारण मैंने संजय को अपनी फिल्म में लिया है. यह किरदार संजय की ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन किरदार होगा और यह बात मैं सबसे ऊंची चोटी पर चढकर चिल्ला सकता हूं. इस फिल्म में वह कमाल के लग रहे हैं. संजय मेरे भाई की तरह है. हमें एक दूसरे को समझने के लिए संवादों की ज़रुरत नहीं है. जहां तक पैसों की बात है जितनी रकम उन्हें दूसरे निर्देशक अपनी फिल्मों के लिए देते हैं मैं भी दूंगा. मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो दोस्ती का गलत फायदा उठाए.
'बालाजी प्रोडक्शन" के साथ मिलकर फिल्म निर्माण करने की कोई खास वजह ?
उनके साथ काम करने की खास वजह बालाजी प्रोडक्शन का प्यार और सम्मान है जो वह मुझे देते हैं. जब मैं पहली बार एकता से मिला तो उन्होंने मुझसे यही कहा 'मैंने अपने पापा से कहा था अगर मैं कुछ करूंगी तो सुनील के साथ ही शुरू करूंगी.' इस तरह की बातों ने मेरे दिल को छू लिया। आपको जानकर हैरानी होगी हम सात फिल्में एक साथ बनाने जा रहे हैं मगर अभी तक हमनें किसी तरह का कोई कॉंट्रैक्ट साइन नहीं किया है. उन्हें मैं अपनी रीढ की हड्डी समझता हूं.
क्या भविष्य में कभी निर्देशक की कुर्सी संभालेंगे ?
जी नहीं मैं बतौर निर्माता बहुत खुश हूं.
इतने किरदार निभाने के बावजूद कोई ऐसा किरदार हो जो आप निभाना चाहते हैं ?
जी हां यदि मौका मिले तो मैं फिल्म 'शराबी" का अमित जी वाला किरदार निभाना चाहूंगा. मेरे अनुसार इस तरह का कॉम्प्लेक्स किरदार बहुत कम फिल्मों में देखने को मिलता है. वह हंस रहे हैं फिर भी हंस नहीं रहे. वह अपने पिता से नफरत करते हैं फिर भी नफरत नहीं करते हैं.


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