फिल्म से बाप बेटों में प्यार पैदा होगा

मेरे बाप पहले आप अन्य फिल्मों से किस तरह भिन्न है?
मेरी अन्य फिल्मों की तरह यह फिल्म भी पारिवारिक मनोरंजन तो प्रस्तुत करती है लेकिन यह उनसे पूरी तरह भिन्न है। यह बाप बेटे के रिश्ते को लेकर बनाई गयी है। आपने इससे पहले कई संबधो पर फिल्म देखी होगी लेकिन बाप बेटे के बीच मधुर रिस्ते पर इस तरह की फिल्म नहीं देखी होगी। फिल्म में सामान्य तौर पर बाप चाहता है कि बेटा विवाह कर लेकिन बेटा चाहता है कि पहले उसका बाप विवाह कर ले क्योंकि बेटे की मां जन्म देकर मर गई और बाप ने बेटे को मां की तरह ही पाल पोसकर बढा किया। इसलिए बेटा चाहता है कि उसका बाप विवाह करके अपनी जिंदगी को खुश होकर बिताये। यही इस फिल्म की कहानी का आधार है।
यह किसी मलयालम फिल्म की रीमेक है क्या?
वास्तव में यह एक बहुत पुरानी फिल्म इस्तम पर आधारित है। लेकिन मैंने इसे फिल्म से कहानी का सिर्फ आधार लिया है। इसलिए इसे रीमेक नहीं कह सकते।
क्या फिल्म देखने के बाद लोगो में पिता और पुत्र के संबंधो के प्रति कुछ प्रभाव पडेगा?
बिल्कुल पडेगा। फिल्म देखने के बाद कोई भी बाप अपने बेटे के प्रति प्यार महसूस करेगा, वहीं बेटा भी बाप के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझेगा।
फिल्म भूलभुलैया के बाद आपने कहा था कि आप अब कामेडी फिल्म नहीं बनायेंगे। फिर आपने यह फिल्म कामेडी क्यों बनाई?
मैं स्पष्ट कर दूं कि यह फिल्म कामेडी नहीं है। फिल्म में हलके फुलके प्रसंग हैं। लेकिन फिल्म गंभीर तथ्य को लेकर चलती है।
वह कैसे?
फिल्म में महान भारतीय कलाकार नसीरुद्दीन शाह और नृत्यांगना शोभना को लिया गया है। दोनो फिल्म के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इनकी अदाकारे देखने बाद पता चलेगा कि यह फिल्म किस तरह से गंभीर है। मैं सोचता हूं फिल्म को देखने के बाद ही लोग तय करेंगे कि यह किस तरह की फिल्म है।
आप हिंसा पर आधारित फिल्में क्यों नहीं बनाते?
(मुस्कुराते हुए) मुझे अभी बालीवुड को समझना बाकी है। इसलिए मैं सोचता हूं कि मैं अभी हास्य फिल्मों तक ही सीमित रहूं।


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