INTERVIEW: बायकॉट हो रही फिल्मों पर 'लाइगर' के निर्देशक पुरी जगन्नाथ ने दिया बयान, कहा- 'कंटेंट पर भरोसा है'

विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे अभिनीत फिल्म 'लाइगर' 25 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। जोर शोर से फिल्म का प्रमोशन किया जा रहा है। इस बीच फिल्म के निर्देशक पुरी जगन्नाथ ने फिल्मीबीट से बातचीत की है, जहां उन्होंने लाइगर को लेकर खासा उत्साह जताया है। फिल्म की थियेट्रिकल रिलीज पर निर्देशक ने कहा, "फिल्म को लेकर नर्वस नहीं, बल्कि एक्साइटेड हूं। मैंने एक फुल मसाला एक्शन फिल्म बनाई है और मुझे फिल्म के कंटेंट पर बहुत भरोसा है। मैंने कई लोगों को ये फिल्म दिखाई भी है और सभी को बहुत पसंद आई है।"

लाइगर की कहानी से दर्शक कितने कनेक्ट हो पाएंगे, इस पर निर्देशक कहते हैं, "मैं सभी उम्र के दर्शकों को ध्यान में रखते हुए ही फिल्में लिखता हूं। ऐसी फिल्में जो बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग भी देख सकें। यहां तक की मैं फिल्मों के एक्शन को भी उसी तरह डिजाइन करता हूं। लाइगर भी वैसी ही फिल्म है, जिसे सभी तरह के लोग देख सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ मल्टीप्लेक्स ऑडियंस के लिए है, या सिर्फ सिंगल स्क्रीन के लिए।"

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वहीं, बातों बातों में उन्होंने फिल्म के मुख्य नायक विजय देवरकोंडा की दिल खोलकर तारीफ भी की। निर्देशक ने कहा, "विजय बहुत ही सधे हुए और सच्चे अभिनेता हैं, साथ ही अपने काम के प्रति ईमानदार हैं। वही सच्चाई स्क्रीन पर उनके अभिनय में भी झलकती है। वो ऐसे इंसान हैं कि यदि आप कभी उनसे मिलेंगे तो उनके प्रति प्यार और बढ़ जाएगा।"

बता दें, विजय और पुरी जगन्नाथ 'लाइगर' के बाद, फिल्म 'जन गण मन' भी ला रहे हैं। जिसे निर्देशक अपना ड्रीम प्रोजेक्ट मानते हैं। 'जन गण मन' के बारे में शेयर करते हुए उन्होंने कहा, "जन गण मन मेरी फेवरिट फिल्म है। वह देशभक्ति से भरी एक कमर्शियल फिल्म है। मैं कह सकता हूं कि ये मेरी ड्रीम प्रोजेक्ट है। दो- तीन बार मैंने इसे शुरु करने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। फाइनली विजय को मैंने कहानी सुनाई और उसे ये आइडिया बहुत पसंद आया। उसने कहा कि अगली फिल्म मैं यही करना चाहता हूं। फिर हमने उस पर काम शुरु कर दिया। जन गण मन में हमने एक मैसेज देने की कोशिश की है।"

सोशल मीडिया पर हिंदी फिल्मों को लेकर चल रहे विवादों पर बात करते हुए निर्देशक ने कहा, "पिछले 3 साल से मैं सोशल मीडिया से दूर हूं इसीलिए मुझे कंट्रोवर्सी भी चिंता नहीं होती है। सच कहूं तो सोशल मीडिया मुझे वक्त की बर्बादी लगती है। और जहां तक दर्शकों के पसंद की बात है तो लोगों को इवेंट फिल्में देखने में मजा आता है। बड़ी स्क्रीन पर वो उसे एन्जॉय करते हैं, चाहे छोटे बजट की ही फिल्म क्यों ना हो। साथ ही मुझे लगता है कि जमीन से जुड़ी फिल्मों से भी लोग हमेशा कनेक्ट करते हैं। उसे पैन इंडिया बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, वो फिल्में खुद ब खुद पैन इंडिया बन जाती है।"

निर्देशक आगे कहते हैं, "मैं खुद अमिताभ बच्चन की फिल्में देखते हुए ही बड़ा हुआ हूं, जिसकी कहानियां सलीम- जावेद लिखते थे। वो सभी फिल्में जमीन से जुड़ी होती थीं। बीच में निर्देशकों का एक जेनरेशन आया, जो हॉलीवुड से प्रेरित दिखे। लेकिन ऐसी बात नहीं है कि भारतीय संस्कृति और कल्चर पर फिल्में नहीं बन रही हैं।" उन्होंने कहा कि वो आगे भी हिंदी फिल्में जरूर बनाना चाहेंगे। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, विक्की कौशल को उन्होंने अपना पसंदीदा बताया।

फिल्म लाइगर के प्रोडक्शन का जिम्मा करण जौहर ने संभाला है। उनके साथ काम करने के अनुभव को निर्देशक पुरी जगन्नाथ ने शानदार बताया। उन्होंने कहा, "करण जौहर शानदार इंसान हैं। मैं उनका फैन रहा हूं। इस फिल्म को पैन इंडिया स्तर तक ले जाने के दौरान वो बहुत बड़े सपोर्ट रहे हैं। वो ऐसे इंसान हैं कि रात 3 बजे भी यदि आप उनको कॉल करके परेशानी शेयर करेंगे तो वो आपकी बात सुनेंगे और कोई समाधान देंगे।"

सिनेमा में दो दशक से भी ज्यादा का वक्त गुजार चुके निर्देशक पुरी जगन्नाथ ने अपने फिल्मी सफर पर भी कुछ बातें शेयर की है। करियर के शुरुआती समय को याद करते हुए उन्होंने बताया, "साल 2000 से मैंने फिल्म मेकिंग में काम करना शुरू किया था। लेकिन आज भी सीखने की प्रक्रिया जारी है। मेरे पिता एक एक्जीबिटर थे। हमारे गांव में एक टूरिंग टॉकीज था। जहां मैं एक ही फिल्म में कई कई हफ्ते देखा करता था। उस वक्त से ही मैंने थोड़ा बहुत लिखना शुरू कर दिया था। उस समय शायद मैं 12 साल रहा हूंगा। मैंने लिखना जारी रखा। फिर जब मैं कॉलेज में था तो मैंने एक प्ले लिखा और खुद ही उसे डायरेक्ट भी किया। उस नाटक को मेरे पैरंट्स ने भी देखा। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरे पिताजी ने मुझे बीस हजार रूपए दिये और कहा कि फिल्म इंडस्ट्री जाओ और अपनी किस्मत आजमाओ। उसके बाद मैं तुरंत ही हैदराबाद चला आया और फिर यहां धीरे धीरे काम सीखने लगा।"

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