INTERVIEW: मैंने अपने रंग-रूप की वजह से खोई हैं कई फिल्में, ये मेरे लाइफ की ट्रैजेडी है - दीया मिर्जा

interview-dia-mirza-on-bheed-trolling-and-being-sterotyped-says-i-lost-projects-because-of-my-looks

Dia Mirza Interview: ब्यूटी पेजेंट जीतने से लेकर मॉडलिंग में आने तक, बॉलीवुड में खुद के लिए एक जगह बनाने से लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए आवाज उठाने तक, दीया मिर्जा एक ऐसी कलाकार हैं, जिन्होंने अपने करियर में कई पहलूओं को छुआ है। दीया की लेटेस्ट फिल्म 'भीड़' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी ये फिल्म लॉकडाउन के दौरान बुनियादी जरूरतों के लिए तरसते प्रवासी मजदूरों की कहानी कहती है। फिल्म में दीया एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी बेटी को उसके हॉस्टल से लाने के लिए दूसरे राज्य में जाना चाहती है, लेकिन लॉकडाउन के वजह से ये संभव नहीं हो पाता है।

भीड़ की रिलीज के साथ, दीया मिर्जा ने फिल्मीबीट के साथ खास बातचीत की है, जहां उन्होंने अपनी फिल्मों की चुनाव प्रक्रिया से लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग और इंडस्ट्री में स्टीरियोटाइप होने को लेकर खुलकर बातें की। लगभग दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहीं दीया को भी भेदभाव का सामना करना पड़ा है। अभिनेत्री ने कहा, "कई निर्देशकों ने मेरे लुक को 'मेनस्ट्रीम' या 'कमर्शियल' कहकर मुझे रिजेक्ट कर दिया। उनके हिसाब से मैं बहुत ज्यादा खूबसूरत हूं।"

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. फिल्म 'भीड़' की किस बात ने आकर्षित किया? आप उससे कैसे जुड़ीं?

Q. फिल्म 'भीड़' की किस बात ने आकर्षित किया? आप उससे कैसे जुड़ीं?

A. मैं अनुभव सिन्हा को कैसे मना कर सकती हूं। मैं उन्हें लगभग 23 सालों से जानती हूं। उनके साथ मैं कैश, दस और फिर थप्पड़ में काम कर चुकी हूं। थप्पड़ के पहले उन्होंने मुल्क और आर्टिकल 15 जैसी फिल्में बनाई थीं, तो जब मैं उनसे एक पार्टी में मिली तब मैंने कहा कि आप मुझे किसी फिल्म में कास्ट क्यों कर रहे हैं, मैं आपके साथ काम करना चाहती हूं। मैं हमेशा से ऐसे मेकर्स के साथ काम करने की ख्वाहिश रखती हूं, जिनका सीरियस सिनेमा पर फोकस हो। तब उन्होंने मुझे थप्पड़ के बारे में बताया था। खैर, भीड़के लिए उन्होंने मुझे कॉल कर बस यही कहा कि इस फिल्म में तुम्हारे लिए कुछ ऐसा है, जो तुम्हारी इमेज से बिलकुल अलग है। पता नहीं तुम उसे करोगी या नहीं, पहले तुम स्क्रिप्ट पढ़ लेना, फिर बताना। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैं बिना कुछ सोचे तुरंत राजी हो गई। मैं खुश हूं कि मुझे उन्होंने अपनी इस फिल्म का हिस्सा बनने का मौका दिया है। दर्शक भी जब यह फिल्म देखेंगे, तो उन्हें एहसास होगा कि कन्वेंशनल दीया इसमें बिलकुल भी नहीं है। यह किरदार रिएलिटी से बहुत जुड़ा है। इस किरदार को करने के बाद यही समझ आया कि यहां कोई भी परफेक्ट नहीं होता है। हर किसी में कुछ न कुछ कमी तो जरूर है।

Q. आपने कहा आप सीरियस सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती हैं। ये झुकाव करियर की शुरुआत से रहा है?

Q. आपने कहा आप सीरियस सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती हैं। ये झुकाव करियर की शुरुआत से रहा है?

A. अनुभव सिन्हा जैसी फिल्में कोई नहीं बनाता है। सोशल- पॉलिटिकल ड्रामा कौन बनाता है बॉलीवुड में! वो भी ऐसी मेनस्ट्रीम फिल्म। मैं हमेशा से ऐसी कहानियों की तरफ आकर्षित रही हूं जो कुछ बदलाव ला सके। मैं लकी हूं कि पिछले 5-6 सालों में मुझे इस तरह की फिल्में मिल रही हैं। जब मैंने काम शुरु किया था, मैं बहुत यंग थी। उस वक्त मुझे समझ नहीं थी कि किस तरह का काम करना है। लेकिन अब मैं समझ चुकी हैं कि मुझे उन फिल्मों के सेट पर ही सबसे ज्यादा खुशी मिलती है, जिसकी कहानी में बदलाव लाने की कुछ क्षमता हो। शायद ये इसीलिए भी क्योंकि फिल्मी दुनिया से बाहर, मैं निजी जीवन में भी ऐसे काम कर रही हूं, जिससे समाज में बदलाव आए।

Q. करियर की शुरुआत में मन मुताबिक काम नहीं मिलने का अफसोस है?

A. मैं सीरियस सिनेमा में काम करना चाहती थी, लेकिन उन मेकर्स ने कभी उन किरदारों के लिए मुझे उपयुक्त ही नहीं समझा, जो मैं करना चाहती थी। कई मेकर्स ने मुझे साफ साफ कहा कि मैं उनके किरदारों के हिसाब से ज्यादा खूबसूरत हूं। ऐसा नहीं है कि मुझे अपने लुक से कंपलेन है या मैं खुद को पसंद नहीं करती हूं। लेकिन इस बात में पूरी सच्चाई है कि कई एक्टर्स को उनके लुक की वजह से सीमित कर दिया जाता है। जो एक आर्टिस्ट के लिए अच्छा नहीं होता है। डायरेक्टर्स ने मुझे कहा है कि आपका लुक बहुत मेनस्ट्रीम है। मैंने कई फिल्में हाथों से इसलिए गवाई हैं क्योंकि मेकर्स के अनुसार मैं बहुत ज्यादा खूबसूरत हूं। (हंसते हुए) लोगों को लगता होगा शायद मैं घमंड में बोल रही हूं लेकिन ये मेरी लाइफ की ट्रैजेडी है।

Q. फिल्म में आप मां का किरदार निभा रही हैं। रियल लाइफ में मां बनने के बाद ऐसे किरदार से ज्यादा जुड़ाव महसूस होता है?

Q. फिल्म में आप मां का किरदार निभा रही हैं। रियल लाइफ में मां बनने के बाद ऐसे किरदार से ज्यादा जुड़ाव महसूस होता है?

A. मुझमें हमेशा से मैटरनल इमोशन रहा है। जब मैंने काफिर किया था, उस वक्त मैं मां नहीं बनी थी लेकिन शूटिंग के दौरान भी मेरे इमोशन में कोई कमी नहीं दिखी होगी। मैं उस बच्ची से इमोशनली कनेक्ट भी हो गई थी। खैर, बात सही है कि असल जिंदगी में मां बनने के बाद फर्क तो आता है। मुझे याद है जब बेटा 6 महीने का था, तो मैं उसे घर पर छोड़ शूटिंग के लिए बाहर निकली थी। मेरा दिल जानता है कि मैंने कितनी हिम्मत जुटाई थी। ऐसे में आप अपने किरदार के साथ भी इमोशनली और ज्यादा जुड़ जाते हैं।

Q. एक एक्टर के पास कई तरह के विशेष अधिकार होते हैं, सुविधाएं होती हैं। ऐसे में भीड़ यानि की आम जनता का हिस्सा बनकर क्या महसूस कर रही हैं?

A. थोड़ी empathy तो मुझमें हमेशा से थी। यदि तपती हुई गर्मी हो, बरसात हो या ठंड हो, तो मेरा ख्याल हमेशा उन बच्चों की तरफ या उन लोगों के तरफ आकर्षित होता है जो मजदूरी कर रहे हों। आप सोचते हैं उनके बारे में कि कैसे इनकी मदद कर सकते हैं। और ये एक इंसानियत वाली बात है। लेकिन मुझे लगता है कि महामारी ने वास्तव में मुझे उन लाखों लोगों की तरह खींचा है, जो हमारे दैनिक जीवन का अदृश्य हिस्सा हैं। हम तो सोचते ही नहीं हैं ना उनके बारे में। और ये फिल्म उसी बारे में हैं। यह हमें एहसास कराएगी कि वे भी समाज का हिस्सा हैं और हमारे जीवन जुड़े हुए हैं।

Q. लॉकडाउन का दौर आपके लिए कैसा रहा था?

Q. लॉकडाउन का दौर आपके लिए कैसा रहा था?

A. पहले फेज के दौरान तो मुझे यही एहसास हुआ कि मैं बहुत लकी हूं कि मैं अपनी मां के साथ अपने घर में थी। इसी दौरान मैं अपने पति से भी मिली। फर्स्ट लॉकडाउन के बाद हमने शादी भी कर ली थी। तो हां, व्यक्तिगत तौर पर उस वक्त मेरी जिंदगी में बहुत बदलाव आ रहे थे और सभी अच्छे बदलाव थे। फिर दूसरे लॉकडाउन के वक्त मैं मां बनीं। उस वक्त मुझे स्थास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मुझे प्रेग्नेंसी के दौरान एमआरआई की जरूरत थी और मैं जिस अस्पताल में एडमिट थी, वहां एमआरआई मशीन नहीं थी। कोविड की वजह से माहौल ऐसा था कि हमें लिमिटेड सुविधाओं में ही सरवाइव करना था। एमआरआई नहीं होने की वजह से, मेरी कॉम्प्लीकेशन बढ़ी और मुझे 6 महीने में ही अपने बच्चे की डिलीवरी करनी पड़ी। अगर उस अस्पताल में एमआरआई मशीन होता, तो शायद मैं नॉर्मल डिलीवरी कर बच्चे को जन्म देती। जब बेटा हुआ, तो उसे आईसीयू में तीन महीने के लिए रखा गया था और मुझे हफ्ते में केवल एक ही दिन उससे मिलने की इजाजत थी। उस वक्त हर कोई दुख में था, हर कोई जिंदगी से जूझ रहा था। सबकी अपनी दिक्कतें थीं, कितनों ने अपनों को खोया था। कहीं ना कहीं, हम सब उस वक्त खुद को पावरलेस महसूस कर रहे थे।

Q. पावरलेस होना कितना परेशान करता है?

A. पॉवरफुल आप तब महसूस करते हैं, जब आप परिस्थितियों पर कंट्रोल रख सकते हैं। या जब आपके पास जीवन में विकल्प हों। और जब यही कंट्रोल आपके पास नहीं होता है तो आप पॉवरलेस हो जाते हैं। लेकिन परेशानी के वक्त में मैंने कई लोगों को देखा है बहुत प्यार के साथ चीजों से डील करते हैं और मुझे लगता है कि यही है जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।

Q. फिल्म को रिलीज से पहले ट्रोलिंग का काफी सामना करना पड़ा। इस बारे में आपकी क्या सोच है?

Q. फिल्म को रिलीज से पहले ट्रोलिंग का काफी सामना करना पड़ा। इस बारे में आपकी क्या सोच है?

A. मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि ट्रोलिंग क्यों हो रही है। यदि कुछ हुआ है और हम वो दिखा रहे हैं तो उसमें ट्रोलिंग की क्या जरूरत है। आप पहले देखें की नीयत क्या है कहानी की। ये फिल्म सिर्फ दिखाना चाहती है कि उस वक्त क्या हुआ था और कैसे हम सबकी ज़िंदगी जुड़ी हुई है। कैसे हम सब एक दूसरे की ज़िंदगी से प्रभावित होते हैं। बस। इससे ज्यादा यहां कोई एजेंडा नहीं है।

Q. व्यक्तिगत गौर पर ट्रोलिंग को किस तरह से देखती हैं?

A. हमारे देश और दुनिया की भाषा बहुत निगेटिव हो गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हम एक कहानीकार या एंटरटेनर के रूप में सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना चाहते हैं। हम सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। इसलिए यह देखना बहुत मुश्किल है कि हमें सॉफ्ट टारगेट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोगों द्वारा लगातार हमारी बदनामी की जाती है, क्योंकि वे एक निश्चित नरैटिव या उनका एजेंडा जो भी हो, उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसे काफी लोग हैं जो फिल्मों और फिल्म उद्योग को प्यार देते हैं। और ट्रोलिंग, पर्सनल टैग, फेसलेस अटैक, शेमिंग से मुझे लगता है कि आज के समय में हम सभी को इससे निपटना पड़ता है।

Q. बॉलीवुड में क्या बदलाव देखना चाहती हैं?

A. बदलाव आज भी मैं यही चाहूंगी कि सेट पर मुझे और महिलाओं को देखना है। आज भी बेहद कम महिलाएं फिल्म इंडस्ट्री में काम करती हैं। ये बदलना चाहिए।

More from Filmibeat

Read more about: dia mirza bheed interview
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X