आप अकबर और जोधा को कितना जानते हैं

By Staff

Ashutosh Gowarikar
लगान" और 'स्वदेश" बनाने वाले आशुतोष इन दिनों अपनी लंबे अवधि से प्रतिक्षारत फिल्म 'जोधा अकबर" के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं. जहां लोगों में इस फिल्म के लिए घोर जिज्ञासा है वहीं कुछ शहरों में जोधा बाई को लेकर कुछ विवाद भी पैदा हो गए हैं. फिल्म की कहानी के चयन, उस पर जारी विवाद और उनके भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत.
सबसे पहले यह बताइए आपका बैक पेन कैसा है ?

अभी कंट्रोल में है. एक स्ट्रेच में सिर्फ बीस मिनट ही बैठ सकता हूं. एडिटिंग के दौरान मुझे काफी तकलीफ थी. अपनी अधिकतर फिल्मों की एडिटिंग मैंने बिस्तर पर लेटकर की है. मगर फिर भी खुशी इस बात की है कि यह दर्द मुझे शूटिंग के दौरान नहीं हुई. (हंसते हुए) वर्ना फिर एक बार मुझे अपनी फिल्म की रिलीज़ तारीख को आगे बढाना पडता और आप मुझसे इसका कारण पूछते.

ऐतिहासिक कहानियों में 'जोधा अकबर" ही क्यों ?

दरअसल यह कहानी मुझे मेरे दोस्त और इस फिल्म के लेखक हैदर अली ने सुनाई थी. इस कहानी को चुनने के कई कारण है जिनमें सबसे पहला कारण हिंदु राजकुमारी से मुगल राजा की शादी थी. साढे चार सौ साल पहले हिंदु राजकुमारी का मुस्लिम राजा से शादी करना मेरे लिए आकर्षण का केन्द्र रहा. हालांकि यह शादी एक राजनैतिक शादी थी जो अकबर ने राजपूतों के साथ अपने संबंध सुधारने तथा अपने राज्य का विस्तार करने के लिए जोधा बाई से की थी. उससे भी बडा आकर्षण यह था कि आखिर ऐसा क्या कारण था जिसके कारण एक राजपूत राजा ने मजबूर होकर अपनी बेटी, जो घर की इज़्ज़त कही जाती है, कि शादी एक मुसलमान राजा के साथ करनी पडी. साथ ही मैं एक प्रेम कहानी बनाना चाहता था जिसमें सच्चे प्यार की खुशबू हो. जैसी प्रेम कहानी मैं चाहता था वैसी कहानी मुझे इसमें नज़र आई.

इस फिल्म के लिए हृतिक और ऐश्वर्या का चयन क्यों किया. क्या 'धूम 2" की जोडी से प्रभावित होकर आपने इन्हें लिया है ?

यह बात बिल्कुल गलत है कि मैं 'धूम 2" की जोडी को एक बार फिर पर्दे पर भुनाने की कोशिश कर रहा हूं. सच बात तो यह है कि मेरी फिल्म 'कृष" और 'धूम 2" से पहले की है. कहानी सुनते वक़्त ही मैंने मन ही मन इन दोनों का नाम तय कर लिया था क्योंकि इन दोनों में काफी राजकिय तत्व है. बोलचाल, चाल ढाल तथा पूरे व्यक्तित्व में राजकियता झलकती है. मैंने अपना बचपन 'अमर चित्रकथा" तथा 'चंदा मामा" जैसी बच्चों की किताबों के साथ गुज़ारा है. उन्हीं कहानियों से प्रेरित होकर मैंने कहानी कहना शुरू किया. उन किताबों में जैसे किरदार में देखता था वह बात मैंने इन दोनों में देखी.

आपको नहीं लगता आपका अकबर काफी दुबला पतला है ?

इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहूंगा. आपने अकबर को कहां देखा है. सच बात यह है कि आपने अकबर को मुगल ए आज़म में पृथ्वीराज कपूर के रूप में देखा है. उसमें आपने साठ साल का अकबर देखा है जो जवान नहीं बल्कि एक जवान बेटे के पिता है. मेरी फिल्म में अकबर का युवा रूप है. इस फिल्म में उनकी उम्र के तेरह से अठाइस वर्ष के बीच का जीवनकाल लिया गया है. हृतिक इस किरदार के लिए फिट इसलिए भी थे क्योंकि सिर्फ राजकियता ही नहीं उनकी शारीरिक बनावट, टैलेंट और परिपक्वता भी अकबर के काफी करीब थी. दरअसल मुझे पैशनेट कलाकार चाहिए थे जो मेरी तरह इस फिल्म के प्रति समर्पित रहें. मुझे खुशी है किरदार के साथ साथ वह इसमें भी खरे उतरे.

फिल्म की रिलीज को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. इसकी क्या वजह है ?

मैं यह बात साफ कर देना चाहूंगा कि फिल्म रिलीज़ में कोई देरी नहीं हुई. इस फिल्म को लेकर लोग इतने उत्साहित है कि फिल्म के प्रति उनकी जिज्ञासा बढती ही जा रही है. ऐतिहासिक फिल्मों को बनने में इतना वक़्त लगना जायज़ है. पेपर पर फिल्म बनाना आसान है मगर तकनीकि तौर पर फिल्म बनाने में कई मुश्किलें आती हैं. यह ऐसी फिल्म है जिसमें काफी लोगों की ज़रूरत थी. एक छोटे से सीन में भी सबकी आवश्यकता पडती थी. कई बार ऐसा होता था कि उनमें से कुछ लोग सेट पर रहते नहीं थे फिर उन्हें सेट पर बुलाकर शॉट लेना पडता था. साथ ही इस फिल्म को बनाने से पहले कई शोध किए गए जिनमें ज़ेवर से लेकर लोकेशन, लुक, मेक अप, जुनियर आर्टिस्ट तथा जानवर मुख्य हैं. इतने शोध करने के बाद भी कई बार उन्हें बेहतर तरीके से फिल्माने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पडी.

इस फिल्म की कहानी के लिए संदर्भ कहां से लिया हैं. उसके बारे में बताइए ?

इस फिल्म की कहानी के लिए हमनें मुगल तथा राजपूत इतिहास और आईने अकबरी तथा अकबर नामा से संदर्भ लिया है. इसके अलावा दो लेखक 'बदायूंनी" और जिन्होंने अकबर पर काफी कुछ लिखा है. उनसे लिया. इन दोनों की खासियत यह थी कि दोनों एक दूसरे के विरुद्ध लिखा करते थे. यूं तो मुझे यह जानने में कई दिक्कते पेश आई कि सच क्या है. फिर भी मुझे जो सच लगा मैंने उसे चुना. इसके अलावा जयपुर के राज परिवार और कछावा वंश से भी हमनें कुछ संदर्भ लिया है. साथ ही जयपुर के राजा भवानी सिंह और रानी पद्मिनी ने भी जोधा बाई से जुडी कुछ बातें बताई.

इतना सब होने के बावजूद 'जोधा बाई" से जुडे तथ्यों को गलत मानते हुए फिल्म को लेकर जयपुर में काफी विवाद खडे हो गए हैं ?

हर बडी फिल्म के साथ विवाद जुडता रहा है. इतिहास में 'जोधा" नाम को लेकर हर इतिहासकारों के अपने अपने मत हैं. एक का कहना है उनका नाम हरखा बाई था, एक का कहना है हीरा बाई, एक का कहना है शाही बाई और एक का कहना है जिया बाई. इस तरह सबने अलग अलग नाम बताए हैं. सिर्फ जोधा बाई ही नहीं जोधा बाई की बेटी के भी इतिहास में तीन नाम दर्ज़ है. उनमें मीरा बाई, मणि बाई और जोध बाई मुझ्य है. बहुत संभव है कि जोधा बाई के कारण लोगों लो लग रहा हो कि यह कहानी अकबर की पत्नी जोधा बाई नहीं बल्कि बेटी जोधा बाई है. मगर ऊपर बताए गए इतिहासकारों के अलावा तीन ऐसे इतिहासकार हैं जिनका कहना है कि अकबर की पत्नी का नाम 'जोधा बाई" है. इस नाम के अधिक मिलने और यह नाम अधिक प्रचलित होने के कारण मैने भी इसका नाम 'जोधा अकबर" रखा. वर्ना आप खुद उपर बताए नाम के साथ अकबर का नाम जोडकर देखिए और कैसा लगता है मुझे बताइए.

क्या आप इस तरह के विवादों के लिए तैयार थे ?

जी हां. शोध के दौरान ही मैंने यह जान लिया था कि इस पर बहुत वाद विवाद होने वाला है. जब इतिहास में ही इतने मत है तो फिल्म के बारे में लोगों के अलग अलग मत होने ज़ाहिर सी बात है. मैं तो यही कहूंगा कि जो सच था मैने उसे लिया है. फिलहाल मीडिया के द्वारा अपने दर्शकों को, को मैं यह बात साफ कर देना चाहूंगा कि मैंने यह फिल्म मनोरंजन के लिए बनाई है जिसमें तथ्य से अधिक कल्पना है. मेरा मुख्य उद्देश्य सदियों पहले अस्तित्व में आई दो जातीय गठबंधन को दर्शाना है. इस फिल्म में मैंने यह भी बताने की कोशिश की है कि किस तरह उस समय दो संस्कृतियों का मिलन हुआ था. मेरी लोगों से अपील है इसे फिल्म की तरह ले. इसे मैंने किसी की इज़्ज़त खराब करने के लिए नहीं बनाई है जैसा कि लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं.

फिल्म रिलीज़ के बाद और विवादों के लिए मानसिक रूप से कितना तैयार हैं ?

पहली बात यह विवाद बेबुनियाद है. जहां तक रिलीज़ की बात है फिल्म रिलीज़ होने के बाद लोगों को इतनी अच्छी लगेगी कि वह विवाद करना तो दूर पहले के विवाद भी भूल जाएंगे.

भविष्य में आप किस तरह का निर्देशक कहलाना पसंद करेंगे ?

मैं किसी एक इमेज में बंधना नहीं चाहता. अगर मुझे मर्डर मिस्ट्री फिल्म बनाने का मौका मिला तो मैं ज़रूर बनाऊंगा क्योंकि इसमें मुझे अन्य फिल्मों की तरह गहन शोध तो नहीं करना पडेगा.

आपको नहीं लगता इन दिनों ऐतिहासिक फिल्मों का मार्केट नहीं है ?

ऐसा आपको लगता है. सच तो यह है कि ऐतिहासिक फिल्में बनी ही कितनी है. पहले से ही ऐतिहासिक फिल्मों का ग्राफ काफी नीचे रहा है. दस फिल्मों में से आठ फिल्में कमर्शियल रहती है. ऐतिहासिक फिल्मों में जितनी फिल्में आज तक बनी है उनमें महज़ दो फिल्में बीना रॉय तथा प्रदीप कुमार अभिनीत फिल्म 'ताजमहल" और 'मुगले आज़म" ही अब तक सफल रही हैं. वैसे भी फिल्मों क हिट होना उसकी कहानी पर निर्भर है. फिल्म चाहे ऐतिहासिक हो या कमर्शियल हों उससे कोई फर्क नहीं पडता. हमारी कहानी अच्छी है और यह फिल्म सुपरहिट होगी यह मेरा यकीन है.

आपके पास जोधा बाई की कोई तस्वीर नहीं थी तो आपने उनका लुक कैसे फाइनलाइज़ किया ?

यह काफी दिलचस्प सवाल है. इसके लिए भी मैं यही कहूंगा कि मैंने काफी शोध किया. जोधा बाई के लुक के लिए मैंने कई राजपूत महारानियों की पेंटिंग्स देखी. उन्हें ध्यान से देखकर यह पता लगाने की कोशिश की कि वह शादी से पहले कैसे रहती थी और शादी के बाद कैसे. साथ ही मैंने श्रृंगार रस पर काफी अध्ययन किया. उससे पता चला कि औरत का श्रृंगार कैसा होगा. और उसके अंतर्गत राजपूत महिलाओं का श्रृंगार कैसा होगा. उस आधार पर मैंने ऐश्वर्या के श्रृंगार में बाजूबंद, हेयर पिन, हाथपंजा, टीका तथा बोडला का इस्तेमाल किया. इसके साथ ही मेक अप का इस्तेमाल भी काफी समझदारी से किया है. उनके कॉस्ट्यूम पर भी हमनें काफी शोध की. जोधा बाई के साथ साथ अकबर के लुक्स पर भी काफी काम किया गया है. पहले हृतिक को हमनें नकली मूंछें और कलम लगाई मगर बाद में जब बात बनती नहीं नज़र आई तो सचमुच में हृतिक ने मूंछें और कलम को बढाया. राजसी परिवार में जन्में अकबर यूं तो बहुत गोरे थे मगर लडाई के लिए अधिकतर समय धूप में रहने के कार उनका रंग तांबई हो गया था. उस पर भी हमनें विशेष ध्यान दिया. सिर्फ जोधा अकबर ही नहीं हमनें दूसरे को स्टार से लेकर मामूली से सैनिकों के लुक्स पर भी काम किया है जिससे फिल्म हास्यास्पद न बन जाए. सबके लिए मेक अप का लुक निश्चित करने के लिए तकरीबन छ: महीने तक हम यूं ही मेक अप करके देखते कि कैसा लग रहा है.

हमनें सुना है शूटिंग के दौरान हृतिक और ऐश्वर्या में कुछ अनबन थी. क्या यह सच है ?

(हंसते हुए) यह उडी उडाई बेबुनियाद बात है. यह बात कहां से उडी है यह मैं खुद नहीं जानता. हृतिक और ऐश्वर्या ने एक दूसरे को बहुत सहारा दिया. पर्दे पर वह इतनी बेहतरीन केमिस्ट्री के साथ नज़र आएं है कि मैं फूला नहीं समा रहा हूं.

आपके पसंदीदा जोडी कौन है ?

फिल्मों में मुझे हेमा-धर्मेन्द्र, रेखा-अमिताभ, आमिर-जूही और शाहरुख-काजोल की जोडी बहुत पसंद है. वास्तविकता में मुझे लैला-मजनू की जोडी बहुत प्रभावित करती है.

आपके अनुसार प्यार की क्या परिभाषा है ?

मेरे अनुसार प्यार का मतलब है प्यार में पडकर एक दूसरे की कमियों को अपनाते हुए आगे बढते रहना.

अपनी पहली फिल्म 'पहला नशा" से लेकर अब तक का सफर कैसा रहा ?

मैं बहुत खुशनसीब रहा हूं. मैंने सोचा नहीं था कि मैं कभी इस मुकाम पर पहुंच जाऊंगा. मैं एक्टर और डाइरेक्टर दोनों एक्सीडेंट से बना हूं. मुझे मौका मिला और बिना किसी तरह का वक़्त गंवाए मैंने हर मौका झपट लिया यह मेरी समझदारी रही.

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