..................... You should be an Actor first | हीरो से पहले अभिनेता बनना ज़रूरी - Hindi Filmibeat

हीरो से पहले अभिनेता बनना ज़रूरी

By Staff

Anurag Sinha
सुभाष घई सिर्फ शो मैन ही नहीं बल्कि अभिनय सीखाने वाले एक बेहतरीन शिक्षक भी है. उनके अभिनय की पाठशाला से निकले कई महारथी हैं जो आज बॉलीवुड की शान बने हुए हैं. फिलहाल चार साल बाद निर्देशन में सक्रिय हुए सुभाष घई अपनी फिल्म 'ब्लैक एंड व्हाइट" के माध्यम से एक और नया चेहरा 'अनुराग सिन्हा" को प्रस्तुत कर रहे हैं.

फिल्म 'ब्लैक एंड व्हाइट" में अपने किरदार के बारे में बताइए ?
इस फिल्म में मैं उमर काज़ी नामक एक मुस्लिम कट्टरपंथी की भूमिका निभा रहे हैं. दिल्ली में आतंक फैलाने के इरादे से वह एक प्रतिष्ठित ऊर्दू शिक्षक राजन माथुर (अनिल कपूर) के घर में शरण लेते हैं. उनके घर में शरण लेने का एक मात्र कारण यही है कि वह न सिर्फ पूरे समाज में प्रतिष्ठित हैं बल्कि उनका परिवार समाज में काफी सम्मानित भी है. राजन माथुर के यहां रहते हुए उमर में एक अद्भूत परिवर्तन आता है. उसका अस्तित्व उस पर सवाल करने लगता है.

अनिल कपूर जैसे दिग्गज कलाकार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?
मैं उनसे उम्र, अनुभव और जानकारी हर चीज़ में काफी छोटा हूं. सेट पर उनका व्यवहार काफी दोस्ताना हुआ करता था. उन्होंने मुझे कभी यह महसूस होने नहीं दिया कि मैं नया हूं या उनसे काफी छोटा हूं. वाकई वह सिर्फ बेहतरीन कलाकार ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन इंसान भी है.

पहली फिल्म ही सुभाष घई के निर्देशन में रही किसी तरह का कोई दबाव महसूस किया आपने ?
सुभाष जी इस फिल्म इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी निर्देशक है और लंबे समय से वह बेहतरीन फिल्में बनाते रहे हैं यह उनकी उपलब्धि है. जहां तक दबाव महसूस करने की बात है तो ऐसा कभी मौका आया ही नहीं कि मुझे दबाव महसूस करना पडे. उन्होंने मेरी काफी मदद की. बहुत कम लोग यह जानते हैं कि वह जितने अच्छे निर्देशक हैं उतने ही अच्छे कलाकार भी हैं. कई बार कुछ चीज़ें वह अभिनय के माध्यम से सीखाते थे. वैसे मेरे अनुसार किसी भी चीज़ को पर्फेक्ट करने के लिए दबाव होना बहुत ज़रूरी है. दबाव से चीज़ें और अच्छी हो जाती है सो इस फिल्म से मैंने दबाव को हैंडल करना भी सीखा.

मूलत: कहां के हैं और किस तरह इस फिल्म तक पहुंचे ?
मूलत: मैं पटना का रहने वाला हूं. मुंबई में आने से पहले मैंने 'फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया" से दो साल अभिनय का कोर्स किया है. मुंबई में एक नाटक 'तलघर" के दौरान उन्होंने मुझे अभिनय करते देखा और मुझसे कहा कि आकर मिलो. उन दिनों मैं काफी व्यस्त था सो जा न सका. दो महीने बाद मुक्ता आर्ट्स से मुझे फोन आया और मुझसे कहा गया कि सुभाष जी मुझसे मिलना चाहते हैं. उसी समय मैं उनसे मिलने गया और उन्होंने मुझे यह फिल्म ऑफर की.

मुक्ता आर्ट्स से अपना फिल्मी करियर शुरूआत करने जा रहे हैं. क्या अब दूसरी फिल्मों को लेकर अपेक्षाएं बढ गई हैं ?
देखिए हर इंसान की चाहत होती है कि वह कुछ बेहतर करे और मैं भी इसी कोशिश में लगा हुआ हूं. मैं चाहता हूं कि खुद को एक अच्छे तथा बेहतर अभिनेता के तौर पर इस इंडस्ट्री में प्रतिष्ठित कर पाने में कामयाब हो जाऊं.

क्या बचपन से अभिनेता बनना चाहते थे ?
जी नहीं. मैं बचपन में हीरो बनना चाहता था मगर बडे होने के बाद पता चला कि हीरो बनने से पहले अभिनेता बनना ज़रूरी है. और अभिनेता बनने के लिए अभिनय बहुत ज़रूरी है.

पहली फिल्म से ही आपने अपनी काफी फिमेल फैंस बना लिए हैं उसके बारे में क्या कहना चाहेंगे ?
(मुस्कुराते हुए) अब मैं उसके बारे में क्या कहूं. मुझे इसमें न तो कोई फायदा नज़र आता है और ना ही कोई नुकसान. अगर कोई मुझे पसंद करता है तो यह मेरे लिए अच्छी बात ही होगी.

फिल्म 'ब्लैक एंड व्हाइट" के अलावा और कोई फिल्म साइन की है ?
अभी तो नहीं साइन की है मगर हां यदि आप लोग वक़्त दें तो अवश्य साइन करूंगा.

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