..................... This film is a very Simple Love Story | यह फिल्म धर्मोपदेश नहीं है - Hindi Filmibeat

यह फिल्म धर्मोपदेश नहीं है

By Super

इन दिनों अजय देवगन अपनी हर फिल्म में लीक से हटकर और चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रहे हैं और वह अपने इस कदम से खुश भी हैं. अब वह इस बात को मानने लगे हैं कि उन्हें उनकी मेहनत के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं. इतना ही नहीं सोलह साल तक अभिनय करने के बाद अब अजय देवगन ने भी अभिनय के साथ साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रख लिया है. बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 'यू मी और हम" प्रदर्शन के लिए तैयार है पर उन्होंने अभिनय से संयास नहीं लिया है. वह आज भी कई बेहतरीन फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं. आइए उनसे सुनते हैं अतिउत्साहित और अतिप्रफुल्लित अजय देवगन की कहानी उनकी ज़ुबानी.

लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में उतरने के लिए सही समय का फैसला कैसे किया ?

इमानदारी की बात यह है कि मुझे सही समय या गलत समय का तो पता ही नहीं है लेकिन मुझे पता था कि मुझे एक कहानी लोगों को सुनानी है. एक ऐसी कहानी जिसमें मेरा यकीन है और इसे मैंने दिल से महसूस किया. वास्तव में काफी समय से मेरे दिमाग में एक आइडिया घूम रहा था. एक दिन मैंने उसे कहानी के रूप में लिखा है और फिर जैसे जैसे पटकथा तैयार होती गई, वैसे वैसे मुझे लगा कि इस विचार को मैं यदि फिल्म के माध्यम से पहुंचाना चाहूं तो वह तभी संभव है जब मैं इस फिल्म का निर्देशन करूं. मुझे लगा यदि दूसरे निर्देशक इस फिल्म का निर्देशन करते तो इसका प्रारूप बदल जाता है. लोग कहते हैं कि मुझे निर्देशन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडा होगा जब कि ऐसा कुछ नहीं हुआ. शायद लोग भूल गए हैं कि अभिनेता बनने से पहले मैंने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया था. जब मेरी उम्र 8-9 साल थी, तब से मैं अपने पिता के साथ एडिटिंग वगैरह में हिस्सा लेता रहता था. उसके बाद मैंने शेखर कपूर के साथ बतौर सहायक काम किया सो निर्देशन के बारे में पूरी तरह जानता था. इसके अलावा मेरा मानना है कि एक निर्देशक के तौर पर यदि आपका नज़रिया साफ है और आपके साथ एक अच्छी टीम हो तो कभी कोई समस्या नहीं आ सकती.

कुछ लोगों का मानना है कि यही कहानी ?

इसके लिए मैं एक नहीं कई कारण बता सकता हूं लेकिन सबसे बडा कारण इस कहानी का सकारात्मक होना रहा. मैं काफी समय से देख रहा था कि इंसान बहुत ही ज़्यादा मनोवैज्ञानिक तौर पर बीमार सा हो गया है. वह आशावादी होने की बजाय निराशावादी होता जा रहा है. हर बात को वह नकारात्मक दृष्टिकोण से देखने लगा है. खासकर शादी, प्रेम, परिवार, रिश्तों, एहसास आदि को वह नकारात्मक दृष्टिकोण से ही लेने लगा है. लोगों को आशावादी बनाने और उनके अंदर सकारात्मक सोच पैदा करने के लिए मैंने इस फिल्म का निर्माण किया है.

आज के वैज्ञानिक युग में हर इंसान किसी भी काम को करने के लिए एक सही कारण जानना चाहता है. यहां तक कि प्रेम को लेकर भी लोग घंटो सोच विचार करते हैं.

ऐसे लोगों से मेरा सवाल है कि आखिर हमारा रोमांस गया कहां ?

हम इस बात को स्वीकार क्यों नहीं कर पाते कि हर आत्मा गहराई से दूसरे के साथ अचानक संबंध बनाती है. एक तरफा प्रेम, खुशहाल वैवाहिक जीवन आदि कॉसेप्ट में मेरा यकीन है. मेरा मानना है कि यह असंभव है. यही वजह है कि यह मेरी फिल्म के महत्वपूर्ण तत्व हैं.

तमाम लोग विवाह संस्था को लेकर प्रश्नचिन्ह उठाते हैं या जब समस्याएं खडी होती है तो वह विवाह संस्था पर आरोप लगाते हैं. मुझे लगता है कि हर शादी या किसी भी रिश्ते में समस्याओं का उत्पन्न होना लाजिमी है. फिल्म 'यू मी और हम" एक रोमांटिक फिल्म है लेकिन इसमें प्यार की कोई व्याख्या नहीं दी है क्योंकि प्यार की कोई व्याख्या नहीं होती है. फिल्म में मेरे कुछ संवाद है, जो बहुत कुछ कह जाते हैं. जैसे कि एक संवाद है -“जिस तरह से प्यार को पाने के लिए जुनून ज़रूरी है, उसी तरह प्यार को निभाने के लिए जुनून ज़रूरी है.“ मेरा मानना है कि यदि इंसान जुनून को अपनी पूरी ज़िंदगी रखे तो कभी कोई समस्या इंसान से बडी नहीं होती.

कटु सत्य यह है कि हर रिश्ते में काम करना ज़रूरी होता है. रिश्तों को प्रगाढ बनाए रखने के लिए काफी प्रयास करने की ज़रुरत होती है. यदि रिश्ते का आधार प्रेम हो तब तो प्रयास स्वत: शुरू हो जाते हैं और यह प्रयास सुखद एहसास दिलाते है. जब किसी रिश्ते को जीवंत रखने में प्रयास कम पडते हैं तभी उनमें दरार आती है. इसके लिए विवाह संस्था पर दोष नहीं मढा जाना चाहिए बल्कि इसके लिए इंसान खुद ब खुद दोषी होता है क्योंकि हर समस्या का समाधान मौजूद होता है.

मगर कुछ लोग समाधान खोजने की बजाय सिर्फ समस्या पर ध्यान केन्द्रित रखते हैं. मेरी फिल्म 'यू मी और हम" एक लडके की कहानी है कि किस तरह वह एक लडकी को अपने प्यार में पटाता है. कैसे उसकी शादी होती है और फिर कैसे वह उसे निभाता है. यह पूरी फिल्म एक सहज फिल्म है. इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो अनोखा या अस्वाभाविक लगे लेकिन हर दर्शक इस फिल्म के साथ खुद को आइडेंटिफाय कर सकेगा. मेरा मानना है कि यदि मेरी फिल्म देखकर इंसान अपने परिवार के करीब आ जाए तो मैं समझूंगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई. यकीन मानिए इस फिल्म को बनाने के पीछे मेरा मकसद लोगों को उपदेश देना या भाषणबाजी करना नहीं है. हमारी यह फिल्म धर्मोपदेश नहीं है.

मैंने इस फिल्म को अपनी निर्देशकिय प्रतिभा को साबित करने के लिए बनायी है. मेरा मकसद लोगों की सोच या उनकी जीवनशैली में परिवर्तन लाने का नहीं है बल्कि हर दर्शक के द्वारा खर्च किए जा रहे पैसे की उचित कीमत का मनोरंजन करना मेरा मूल मकसद है. यदि मेरी फिल्म देखकर लोगों को मनोरंजन मिला तो मैं समझूंगा कि मेरी मेहनत सफल रही और यदि मनोरंजन के साथ किसी को रिश्तों को प्रगाढ रखने का मंत्र मिल जाए तो यह मेरे लिए दोहरी सफलता होगी. मुझे अपनी पहली फिल्म में ही काजोल जैसी श्रेष्ठ अदाकारा को निर्देशित करने का मौका मिला जो हर निर्देशक का सपना होता है. काजोल एक सशक्त व बेहतरीन अदाकारा होने के साथ साथ फिल्म की निर्माता भी है.

वह सेट पर शूटिंग करने से पहले ही वह अपने चरित्र के बारे में काफी बारीकी से जानती थी इसलिए उनके साथ काम करना काफी आसान रहा. उन्हें इस फिल्म से जोडने के लिए मुझे कोई खास मशक्कत नहीं करनी पडी. पटकथा लेखन का काम घर के अंदर हो रहा था, उस दौरान काजोल भी सारी बातें सुनती रहती थी. कभी कभार वह भी अपनी राय देती थी तो एक तरह से पटकथा लेखन के दौरान ही वह इस चरित्र के साथ जुड गई.

कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैंने अपनी फिल्म 'यू मी और हम" को विदेशों में फिल्माया है ?

जबकि ऐसा नहीं है. मैंने अपनी इस फिल्म की ज़्यादातर शूटिंग 'स्टार क्रूज़" नामक एक शिप पर की है. इसके अलावा कुछ दृश्य हमनें मुंबई के फिल्मीस्तान स्टूडियो में सेट बनाकर फिल्माए हैं. बतौर अभिनेता मैंने कई दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया है पर मुझे नहीं लगता कि मेरे उपर किसी भी निर्देशक की छाप है. हर निर्देशक का अपना एक ग्राफ होता है, अपनी कार्यशैली होती है. मैं अपनी तुलना दूसरों से नहीं करता. मैंने 'यू मी और हम" का निर्देशन करने के लिए अपनी सभी फिल्मों की शूटिंग पूरी कर ली थी. जब यह फिल्म पूरी हो गई उसके बाद मैंने बतौर अभिनेता निर्देशक रोहित शेट्टी की फिल्म 'गोलमाल रिर्टंस" स्वीकार की. इसकी आधे से ज़्यादा शूटिंग पूरी हो चुकी है. इसके अलावा एनिमेशन फिल्म 'टूनपुर का सुपरस्टार" कर रहा हूं. इसका निर्माण मैं ही कर रहा हूं मगर इसका निर्देशन मैं नहीं कर रहा हूं.

मेरा मानना है निर्देशन मेरा पेशा नहीं है बल्कि अभिनय मेरा पेशा है लेकिन जब भी कोई दूसरा विचार मेरे दिमाग में आएगा तब मैं ज़रूर निर्देशन करूंगा. वैसे कुछ विषय मेरे दिमाग में है लेकिन जब तक किसी विषय को लेकर मेरे अंदर जुनून नहीं आता, तब तक मैं निर्देशन नहीं करूंगा. यह फिल्म एक्शन नहीं है पर मैं एक्शन प्रधान फिल्म निर्देशित करना चाहता हूं और उसके लिए अच्छी विषयवस्तु की तलाश जारी है. लोगों का मानना है 'टूनपुर का सुपरस्टार" मैं अपनी बेटी न्याशा को ध्यान में रखकर बना रहा हूं मगर ऐसा नहीं है. दरअसल न्याशा के साथ साथ मुझे भी कार्टून बहुत पसंद है.

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