बड़े बैनरों के लिए अछूत हूं मैं: ओम पुरी

साठ वर्षीय ओम पुरी का कहना है, "मुझे कोई भी भावपूर्ण भूमिकाएं नहीं मिलीं क्योंकि हमारी फिल्मों में चरित्र अभिनेताओं के लिए मुश्किल से ही ऐसी भूमिकाएं होती हैं।" पुरी भविष्य में फिल्म निर्देशन की ख्वाहिश रखते हैं।
पुरी की 'चाची 420' में निभाई हास्य भूमिका या 'जाने भी दो यारों' की अनूठी व्यंग्यात्मक भूमिका या 'युवा' और 'मकबूल' में उनकी नकारात्मक भूमिकाओं को कौन भुला सकता है। वह कहते हैं, "व्यवसायिक सिनेमा में मेरा पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है। मेरा मतलब है कि बड़े बैनरों ने मुझे छूआ भी नहीं। पता नहीं क्यों उनके लिए मैं अछूत हूं।"
उन्होंने कहा, "करण जौहर को छोड़कर अन्य किसी भी बड़े बैनर के निर्माता मेरे पास नहीं आए। करण के साथ मैंने 'कुर्बान' में काम किया था और अब 'अग्निपथ' के नए संस्करण में काम कर रहा हूं।"
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मैं निकट भविष्य में निर्देशन करूंगा। मैंने अब तक इस विषय में गम्भीरता से नहीं सोचा है लेकिन कभी-कभी मैं इस दिशा में सोचता हूं। इसलिए हो सकता है कि अगले पांच साल में किसी फिल्म का निर्देशन करूं।"
पुरी ने अपने 35 साल के लम्बे फिल्मी करियर में 'अर्ध सत्य', 'मिर्च मसाला', 'आक्रोश' और 'धारावी' जैसी बेहतरीन गैर व्यवसायिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने 'ईस्ट इज ईस्ट' और 'सिटी ऑफ जॉय' जैसी अंग्रेजी फिल्मों में भी अभिनय किया।
जहां तक व्यवसायिक सिनेमा का सवाल है तो उन्होंने 'हेरा फेरी', 'सिंह इज किंग' और 'मालामाल वीकली' जैसी हास्यप्रधान फिल्मों में भी अभिनय किया है। उनकी आने वाली फिल्मों में 'तीन थे भाई', 'लाइफ गोज ऑन', 'अग्निपथ 2' और 'डॉन 2' शामिल हैं।


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