INTERVIEW: 12वीं फेल, सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री पर विक्रांत मैसी, "मुझे पॉवरप्ले से बहुत चिढ़ होती है"

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Vikrant Massey Interview: किरदार चंद मिनटों का हो या पूरे ढ़ाई घंटे का, विक्रांत मैसी उन अभिनेताओं में हैं, जो अपने हर किरदार से दर्शकों पर छाप छोड़ते हैं। टेलीविजन के बाद, कई बेहतरीन फिल्में और वेब सीरीज का हिस्सा रह चुके अभिनेता अब विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 12वीं फेल में नजर आ रहे हैं। विक्रांत इसे अपनी सबसे खास फिल्म मानते हैं। और फिल्म देखने के बाद, हम भी उनके विश्वास से पूरी तरह सहमत हैं।

फिल्मीबीट के साथ साथ बातचीत में विक्रांत मैसी ने 12वीं फेल में मुख्य भूमिका निभाने की खुशी व्यक्त की। साथ ही एक्टर ने मनोरंजन जगत में अपने सफर और संघर्ष को लेकर भी काफी बातें शेयर की।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश:

Q. लंबे समय के बाद आपकी फिल्म थियेटर्स में आ रही है। कैसा महसूस कर रहे है?

A. मैं बहुत खुश हूं। 12वीं फेल मेरे लिए बहुत खास फिल्म है। साथ ही बतौर एक्टर आज भी मैं काम कर पा रहा हूं, आप लोगों से मिलकर अपनी फिल्मों के बारे में बात कर पा रहा हूं, ये सब मेरे लिए बहुत मायने रखता है। अपनी हर रिलीज से पहले मैं आभारी महसूस करता हूं। जिंदगी में मैंने जो भी मांगा, मुझे उससे ज्यादा ही मिला। लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया है और मुझे महसूस होता है कि कहीं ना कहीं अब ये वापस देने का वक्त है। उन्हीं की कहानियां, उन तक पहुंचाऊं.. या उनकी आवाज बनूं। सभी लोग जानते हैं कि मेरा सफर कैसा रहा है। टेलीविजन में मैंने कितना काम किया, फिर फिल्मों में कैसे आया, कितने सालों से काम करता आया हूं। आज मैं कह सकता हूं मेरा जीवन सफल रहा है।

Q. लोगों की उम्मीदों से बतौर कलाकार डर लगता है या एक्साइटमेंट महसूस करते हैं?

A. उम्मीदों से डर नहीं लगता है। लेकिन हां मैं सोचता रहता हूं कि लोगों ने जो मुझे ये privilege दिया है, यहां तक पहुंचने का जो मौका दिया है, मैं उन्हें इसके बदले में कुछ दे पाऊं। इसीलिए मैं लोगों के समय और पैसे के लायक बनना चाहता हूं। मैं समझता हूं कि फिल्म देखने के लिए वक्त निकालना, अपनी मेहनत की कमाई किसी पर लगाना, उसे देखना, पसंद करना, उसकी चर्चा करना, एक अभिनेता के लिए ये बहुत बड़ी चीज है। इसीलिए कोशिश हमेशा अच्छी फिल्म देने की ही रही है। कुछ फिल्में चलती हैं, कुछ नहीं चलती हैं, ये तो काम का हिस्सा है।

Q. करियर के उतार- चढ़ाव से कैसे डील करते हैं?

A. मुझे लगता है, यह मेरा आत्म-विश्वास है। और बहुत लकी रहा हूं कि एक मजबूत फैमिली है मेरी। दोस्त कम हैं, जितने सच बोलने वाले हैं सारे। मेरी सक्सेस से या मेरे फ्लॉप होने से उन्होंने मेरे प्रति अपना बर्ताव नहीं बदला। यहां तक की मैं मीडिया को भी मैं क्रेडिट देना चाहूंगा। बीच में जब मेरी कुछ फिल्में नहीं चलीं, तो लोगों ने साफ लिखा कि ये विक्रांत मैसी का काम नहीं हो सकता। इन सारी बातों से मुझे खुद के काम को समझने में मदद मिलती है। और यही मुझे आगे बढ़ते रहने में मदद करता है। साथ ही खुद पर विश्वास है कि मैं अच्छा काम कर सकता हूं। मैं अच्छी कहानियों का हिस्सा बनना चाहता हूं।

Q. फिल्म की टैग लाइन है Restart. आपकी लाइफ में कोई मोड़ आया है, जब आपने रिस्टार्ट किया हो?

A. लगभग तीन- चार साल के बाद, मेरी कोई फिल्म सिनेमाघरों में आ रही है। तो ये एक रिस्टार्ट ही है मेरे लिए। इससे पहले जब मैंने टीवी छोड़ा, उसके बाद भी मुझे रिस्टार्ट करना पड़ा। एक अच्छा खासा प्लेटफॉर्म जो मैंने अपने लिए 10 सालों में बनाया था, उसे मैंने पूरी सोच समझ के साथ छोड़ा क्योंकि मुझे विश्वास था कि मैं फिल्मों में एक चांस डिजर्व करता हूं।

Q. आपकी बाहरवीं कैसी रही थी?

A. बहुत ही बेकार। दसवीं के बाद ही मैंने काम शुरु कर दिया था। हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। मैं जूनियर कॉलेज में था, जब मैंने श्यामक डावर की ग्रूप को ज्वॉइन कर लिया था। वहां मैंने एक- डेढ़ साल काम किया था। उसके बाद मैंने टेलीविजन में एक्टिंग शुरु कर दी थी। इसी वजह से मेरी बाहरवीं की पढ़ाई तो बहुत ही बेकार रही थी। लेकिन हां, मैं मानता हूं कि शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा बेहतर जिंदगी का रास्ता बनाती है। लेकिन केवल शैक्षणिक सफलता ही सफलता नहीं है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको दयालु होना होगा, एक अच्छा इंसान बनना होगा।

Q. फिल्म में भ्रष्टाचार, रिश्वत लेन- देन की भी चर्चा है। रियल लाइफ में कभी पाला पड़ा है?

A. सच बताऊं तो, मैंने दो बार रिश्वत दी है। और दोनों बार मेरे पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. मैं 17 साल का था, अंडरएज था पर अपने दोस्त की बाइक बहुत घुमाता था। तो मैं एक बार पकड़ा गया। उस वक्त मेरे जेब में कुछ 40-50 रुपए थे, देकर वहां से निकलना पड़ा। लेकिन मैं बहुत जल्दी समझ गया था कि यह सब गलत है। रिश्वत लेना और देना दोनों गलत है। आज के समय में मुझे पॉवरप्ले से बहुत चिढ़ है।

Q. फिल्म इंडस्ट्री में पॉवरप्ले का सामना करना पड़ा है?

A. (हंसते हैं) वो तो आए दिन पड़ता रहता है। और तकलीफ भी होती है। लेकिन कहीं ना कहीं मेरी आत्म विश्वास उस पॉवरप्ले से ज्यादा अटूट है। ऐसा होता है और आपको इसे अपनी हिम्मत बनाकर आगे बढ़ना होता है। आप इसे अपने या किसी और के विरुद्ध नहीं रख सकते। क्योंकि हमसे पहले भी ऐसा ही था। पॉवरप्ले सिर्फ इंडस्ट्री में ही नहीं, समाज में भी हमेशा से ही रहा है। गरीबों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी है। यदि बहुत निडर होकर मैं ये कह सकूं.. कि गरीब को गरीब क्यों रखा गया है? यदि गरीब पढ़ लिख जाएगा, थोड़ी जानकारी यदि हासिल कर जाएगा, तो ये जो पोजिशन ऑफ पॉवर में बैठे लोग हैं, इनको दिक्कत नहीं हो जाएगी? बिल्कुल होगी। इसीलिए वो चिकन देकर, दारू देकर या 500 रूपए देकर वोट करवाते हैं।

Q. आप अब सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं हैं। आप महसूस करते हैं कि अपने बयानों की वजह लोग कलाकारों को बहुत जल्दी जज कर लेते हैं?

Q. हां बिल्कुल, लोग जजमेंटल हैं। और आप इसमें कुछ कर भी नहीं सकते हैं। मैं अब सोशल मीडिया पर भी ज्यादा एक्टिव नहीं हूं क्योंकि वहां अपने विचार रखने के भी अलग दुष्परिणाम हैं। जब सोशल मीडिया की शुरुआत हुई थी तो एक्साइटमेंट थी कि वहां से जानकारी मिलेगी। एक क्लिक से आप दुनियाभर का ज्ञान हासिल कर सकते हैं। लेकिन लोगों ने उन प्लेटफॉर्म्स को कुछ अलग ही बना दिया है। वहां हम कैंसिल कल्चर में जी रहे हैं। यदि आप एक खास विचार से सहमत नहीं हैं तो आप हट जाइए। इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, खासकर युवाओं पर। आप एक दूसरे की सुनेंगे ही नहीं.. तो आगे कैसे बढ़ेंगे। हमारे बाप- दादाओं से सिखाया था कि माफ करना एक बड़ा गुण होता है। लेकिन आज हम माफ नहीं पाते हैं।

Q. आपके ज्यादातर किरदार ऐसे होते हैं, जिससे आम आदमी भी जुड़ सके। क्या आप जानबूझकर ही ऐसे किरदारों का चयन करते हैं?

A. हां, मैं काफी सोच समझकर ऐसे किरदारों का चुनाव करता हूं। मनोरंजन के क्षेत्र में सफलता और फेम बहुत अस्थायी है। मुझसे पहले भी बहुत बड़े बड़े दिग्गज आए हैं, मेरे बाद भी आएंगे। लिहाजा, इस दौर में मैं जो कर पाऊं, वो मेरे लिए बहुत मायने रखता है। ये मेरे लिए एक privilege है। मैं जहां से आता हूं, मैंने ऐसे दिन देखे हैं, जब मैं अपने किसी दोस्त को अपने घर लेकर गया.. और मेरी आर्थिक स्थिति देखकर दूसरे दिन से उन्होंने मेरा फोन उठाना बंद कर दिया। इसलिए, मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहता हूं, जिन्हें कोई नहीं सुनता। मैं आम आदमी का प्रतिनिधित्व करना चाहता हूं।

Q. हमेशा से एक्टर ही बनना चाहते थे?

A. हां, एक्टर मैं बचपन से ही बनना चाहता था। मुंबई का ही हूं, तो बचपन में फिल्मों की शूटिंग भी खूब देखी है। कभी संजय दत्त आ रहे हैं शूट करने, तो कभी कोई और एक्टर, मैं दूर से ही सबको देखा करता था। हालांकि मैं पढ़ाई खत्म करने के बाद इस क्षेत्र में आना चाहता था। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति की वजह से मुझे जल्दी काम शुरु करना पड़ा। अंडा और ब्रेड खा खाकर परेशान हो गया था मैं।

Q. और आज खुद को विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म में बतौर लीड देखकर कितनी खुशी होती है?

A. मैं ये शब्दों में बयां नहीं कर सकता। ये फिल्म बहुत खास है मेरे लिए। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म में काम करने का मौका मिलेगा। इनकी फिल्में तो देखते हुए बड़ा हुआ हूं मैं। साथ ही इस फिल्म की खास बात है कि इसमें आपको मेरी, विधु सर की और खुद की.. सबके जीवन की झलक दिखेगी क्योंकि कहीं ना कहीं, हम सबने जिंदगी में संघर्ष किया है। इस कहानी में हर उस इंसान की झलक दिखेगी, जो सपने देखता है, जो कुछ कर पाने की उम्मीद रखता है।

Q. आप अपनी पर्सनल लाइफ को फिल्म इंडस्ट्री से बिल्कुल अलग रखते हैं। कोई खास वजह?

A. ऐसा नहीं है कि मैं अपनी प्राइवेट लाइफ किसी से छिपाकर रखता हूं। मेरी सोच ये रही है कि बतौर एक्टर मैं हर दिन 12- 14 घंटे काम करता हूं, इसके बाद मैं अपना वक्त अपनी फैमिली के साथ गुजारना चाहता हूं। आजकल बतौर कलाकार आपको सोशली काफी एक्टिव होना पड़ता है, जो कि मुझसे नहीं हो पाता है। मैं दिन भर काम करने के बाद पार्टियां नहीं कर सकता। और यदि मैं पार्टियों में ही दिखता रहूंगा तो मैं काम कब करूंगा। मैं ज्यादातर जो फिल्में करता हूं, वो डेढ़ से दो महीने में खत्म करनी होती है क्योंकि एक लिमिटेड बजट होता है उसका। जाहिर है हमारी फिल्म में कोई 200 करोड़ तो लगा नहीं रहा। तो मेरी कोशिश यही रहती है कि कैसे समय पर अपना काम खत्म कर दूं। इसीलिए लोगों को लगता है कि मैं दिखता नहीं हूं। दूसरी बात कि जब मैं बाहर निकलता भी हूं.. तो मैं मीडिया नहीं बुलाता कि मुझे कवर करो। मैं आज भी अपने घर का राशन लाने खुद ही जाता हूं। मैं जिंदगी को सिंपल रखना चाहता हूं क्योंकि मैं ये भी जानता हूं कि मैं बहुत ज्यादा लंबे समय तक काम नहीं करूंगा।

Q. अपने अब तक के करियर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो कैसा महसूस करते हैं?

A. मैं बेहद आभारी महसूस करता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि मैंने तो अभी शुरुआत ही की है। मैं अभी 36 साल का हूं (smiles)। अभी बहुत काम करना है, बहुत कहानियां बोलनी हैं.. सिर्फ एक्टिंग ही नहीं करनी है, लिखना भी है, शायद डायरेक्ट भी करना है, प्रोड्यूस भी करना है। एंटरटेनमेंट से हटकर भी लाइफ में कुछ चीजें करनी हैं।

Q. 12वीं फेल के बाद, किन फिल्मों पर काम कर रहे हैं?

A. एक है जियो सिनेमा के साथ फिल्म "ब्लैक आउट" । फिर आएगी "हसीन दिलरूबा" और "सेक्टर 36"।

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