EXCLUSIVE INTERVIEW: "खुद को रिपीट नहीं करना चाहती, चाहे वो बंगाली सिनेमा हो या हिंदी"- स्वास्तिका मुखर्जी

बंगाली और हिंदी सिनेमा में सराहनीय काम कर रहीं अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी का कहना है वह अपने किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करती हैं। वह चाहती हैं कि दर्शक हर बार उनके काम से सरप्राइज हों। अभिनेत्री को 'साहेब बीबी गुलाम', 'शाहजहां रीजेंसी', 'भूतर भाबिष्यत' समेत 'ब्योमकेश बख्शी', 'दिल बेचारा' और 'पाताललोक' (वेब सीरीज) में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। जटिल किरदारों को भी स्क्रीन पर बड़ी सहजता के साथ निभाने वालीं स्वास्तिका मुखर्जी डिज्नी+हॉटस्टार की आगामी सीरीज 'एस्केप लाइव' में अहम किरदार निभाते दिखेंगी।

'एस्केप लाइव' में अपने किरदार को लेकर उत्साहित स्वास्तिका कहती हैं, "शो में मैं एक सेल्फ मेड वुमेन की भूमिका निभा रही हैं, जो एक चाइनीज रेस्त्रां की ओनर है। मेरे किरदार का नाम माला है। कह सकते हैं कि मेरे किरदार में काफी ग्रे शेड्स हैं, इसीलिए मैं ये देखने के लिए उत्साहित हूं कि स्क्रीन पर वह किस तरह से उभर कर आया है। मुझे लगता है मेरा किरदार दर्शकों के लिए सरप्राइज पैकेज की तरह होगा।"

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एस्केप लाइफ 20 मई से डिज़्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम करेगी। सिद्धार्थ कुमार तिवारी के निर्देशन में बनी इस सीरीज में सिद्धार्थ, जावेद जाफ़री, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, स्वास्तिका मुखर्जी, प्लाबिता बोरठाकुर, वलूचा डी सूजा, ऋत्विक साहोरे, सुमेध मुद्गलकर, गीतिका विद्या ओह्यान, जगजीत संधू, रोहित चंदेल और आद्या शर्मा जैसे कलाकार नजर आएंगे।

'एस्केप लाइव' की रिलीज से पहले स्वास्तिका मुखर्जी ने फिल्मीबीट से विशेष बातचीत की है, जहां उन्होंने अपने किरदारों के चुनाव, सोशल मीडिया ट्रेंड और सलमान खान के साथ काम करने की ख्वाहिश को लेकर खुलकर बातें की हैं।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. ग्रे कैरेक्टर को निभाने के दौरान आपके और किरदार के बीच कितना संघर्ष रहता है?

Q. ग्रे कैरेक्टर को निभाने के दौरान आपके और किरदार के बीच कितना संघर्ष रहता है?

सभी किरदारों के अपने अलग चैलेंज होते हैं.. मुश्किलें होती हैं। देखा जाए तो कुछ भी आसान नहीं है। एक हैप्पी- गो- लकी किरदार को भी पर्दे पर निभाना भी आसान नहीं होता है क्योंकि उसमें कुछ अलग बारीकियां होती हैं। लेकिन हां, एस्केप लाइव के किरदार माला की बात करें तो यह थोड़ा मुश्किल था क्योंकि यहां मेरे लिए कोई रेफरेंस या रियल लाइफ एक्सपीरियंस नहीं था कि इसे कैसे निभाना है। इसमें मैं अपने व्यक्तिगत या प्रोफेशनल अनुभव से कुछ भी शामिल नहीं कर सकती थी। यहां तक कि इस तरह की महिलाएं भी रोजमर्रा की जिंदगी में हमने शायद बहुत कम ही देखी होगी। और सच कहूं तो इस तरह के निगेटिव किरदार में अक्सर मेल एक्टर्स को ज्यादा देखा गया है। इसीलिए ये मेरे लिए थोड़ा चैलेजिंग था और मुझे लगता है कि ये दर्शकों के लिए सरप्राइजिंग पैकेज होगा। मैंने इस तरह का किरदार पहले कभी नहीं निभाया है.. ना बंगाली सिनेमा में, ना हिंदी में।

Q. कह सकते हैं कि आप अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर काम करना पसंद करती हैं?

Q. कह सकते हैं कि आप अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर काम करना पसंद करती हैं?

हां, ये सच है कि मैं खुद को बिल्कुल रिपीट नहीं करना चाहती। लेकिन ये हमेशा संभव नहीं हो पाता कि हमें कुछ अलग रोल ही मिलें। किस तरह के निर्माता- निर्देशक अप्रोच कर रहे हैं, इस पर भी निर्भर करता है। बंगाल में भी मैंने जितना काम किया है, मैं अपने किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट करती रही हूं, चाहे वो बेसिक व्यवहार हो, या मेरे लुक्स के साथ हो या मेरा अपीयरेंस हो। मैं नहीं चाहती कि मेरे दर्शक हमेशा मुझे एक ही तरह के रूप में देंखे। और अब जब मैं मुंबई में काम कर रही हूं, तो भी मेरी कोशिश यही रहती है।

Q. अपने किरदार के चुनाव के दौरान किन बातों का ख्याल रखती हैं?

Q. अपने किरदार के चुनाव के दौरान किन बातों का ख्याल रखती हैं?

मेरे लिए स्क्रिप्ट सबसे महत्वपूर्ण है। फिर मैं देखती हूं कि मेरे किरदार का फिल्म में या सीरीज में कितना योगदान है.. और ये हमेशा स्क्रीन टाइम के बारे में नहीं होता है कि आपके कितने सीन हैं या कितने डायलॉग्स हैं। ये किरदार की लिखावट और उसकी गहराई के बारे में है, जिसे दर्शक हमेशा याद रखें।

जब हम एक सीरीज करते हैं तो उसमें पचासों किरदार होते हैं। यहां कहानी किसी एक किरदार के इर्द गिर्द नहीं घूमती है.. इसीलिए यह देखना बहुत जरूरी हो जाता है कि यहां मेरे लिए परफॉर्म करने का कितना स्कोप है। मैं इसी पर फोकस करती हैं।

यदि कोई 'पाताललोक' सीरीज में मेरे स्क्रीन टाइम को देखे तो शायद बाकी किरदारों में तुलना में वो काफी कम था। लेकिन दर्शकों ने वो सीरीज देखा और उन्हें मेरा किरदार, मेरी परफॉर्मेंस आज भी याद है.. तो एक कलाकार के तौर पर मुझे इससे ज्यादा क्या चाहिए। फिर एक निर्देशक का विजन भी मैं महत्वपूर्ण मानती हूं कि वो अपनी सोच को लेकर कितने स्पष्ट हैं, वो अपने एक्टर्स से क्या अपेक्षा रखते हैं। साथ ही प्रोडक्शन हाउस भी एक अहम पक्ष है क्योंकि ये उन पर ही निर्भर करता है कि वो एक फिल्म को या शो को किस तरह बनाते हैं और कैसे रिलीज करते हैं। तो हां, कुल मिलाकर यही कुछ बातें हैं जो किसी भी प्रोजेक्ट को हामी भरने से पहले मैं देखती हूं।

Q 'एस्केप लाइव' में इतने बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

Q 'एस्केप लाइव' में इतने बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

सच कहूं तो मुझे खुद भी सारे एक्टर्स से मिलने का मौका ट्रेलर लॉन्च के दौरान ही मिला। दरअसल, एक्सेप लाइव किसी एक फैमिली या किरदार के बारे में नहीं है.. इसमें बहुत सारी कहानियां हैं, जो देश के अलग अलग भाग को दिखाती है। एक कहानी बनारस की है, एक जैसलमेर की, तो एक मुंबई की। इसीलिए हम सभी का शूटिंग शेड्यूल और ट्रैक भी बिल्कुल अलग अलग ही था। सेट पर बहुत कम लोगों से हमारी मुलाकात हुई थी। जैसे मेरे किरदार का सबसे ज्यादा कनेक्शन प्लाबिता के किरदार के साथ है, तो हमारी काफी अच्छी बॉण्ड रही। मैंने उनका काम देखा है और मुझे वो बहुत पसंद हैं। वो बहुत अच्छी अदाकारा हैं।

Q. ये सीरीज कंटेंट क्रिएटर्स के बारे में है। तो सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर आपकी व्यक्तिगत राय क्या है? आप इस ट्रेंड को किस तरह देखती हैं?

मुझे लगता है कि इसके अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं। सोशल मीडिया पर कई कंटेंट क्रिटर्स हैं, जो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, चाहे वो लाइफस्टाइल को लेकर हो, ट्रैवलिंग हो, स्टाइलिंग हो, सोशल वर्क हो.. सोशल मीडिया के जरीए जागरूकता बढ़ाने के इतने कार्य किये जा रहे हैं। लेकिन वहीं साइड इफेक्ट ये है कि आज के समय में सभी फेमस होना चाहते हैं। वर्चुअल दुनिया ही सबकी दुनिया हो गई है। 10 मिनट के फेम के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार हैं। लोग कुछ भी उलटा सीधा कर रहे हैं और दूसरे उससे प्रेरित भी हो रहे हैं। तो ये गलत है। यहां भी एक बैलेंस होने की जरूरत है।

Q. आपने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से भी ज्यादा का समय गुजारा है। बतौर कलाकार सोशल मीडिया से आए बदलाव को महसूस करती हैं?

Q. आपने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से भी ज्यादा का समय गुजारा है। बतौर कलाकार सोशल मीडिया से आए बदलाव को महसूस करती हैं?

हां बिल्कुल.. और मुझे ये बदलाव अच्छा लगता है। मैं इसे पॉजिटिव नजरीए से देखती हूं। सोशल मीडिया के जरीए हम दुनियाभर के लोगों से बात कर पा रहे हैं, अपने काम को प्रमोट कर पा रहे हैं, लाखों- करोड़ों फैंस से सीधे संपर्क कर पा रहे हैं। आज अमेरिका और अफ्रीका में बैठे लोग भी देख पा रहे हैं कि हम क्या काम करते हैं। हम लगातार अपने दर्शक, फैंस, फॉलोअर्स के साथ हैं। पहले के समय में यह असंभव था। दर्शक भी अब एक्टर्स को एलियन नहीं समझते हैं। वो हमारी जिंदगी की झलक देखते हैं, हमारा व्यक्तित्व देखते हैं। हां, यहां भी एक सीमा रेखा होनी चाहिए.. लेकिन मुझे ये लोगों से जुड़ने का एक अच्छा और सेसिंबल ज़रिया लगता है। मैं इसे एन्जॉय करती हूं।

Q. आपने हिंदी फिल्मों में अपने डेब्यू के दौरान सलमान खान के साथ काम करने की तमन्ना जताई थी। वह अभी भी कायम है?

Q. आपने हिंदी फिल्मों में अपने डेब्यू के दौरान सलमान खान के साथ काम करने की तमन्ना जताई थी। वह अभी भी कायम है?

(हंसते हुए) अरे हां, हां। वो तमन्ना अभी भी है.. बिल्कुल है। मैं उम्मीद करती हूं कि सलमान खान के साथ कभी काम कर पाऊं, उसके बाद मैं बिना किसी गिला- शिकवा के बाकी की जिंदगी जिउंगी। ये मेरी जिंदगी की खास ख्वाहिश है। आप मुझसे पांच साल बाद भी पूछेंगी तो मेरा जवाब यही होगा। लेकिन मैं उम्मीद करती हूं कि उससे पहले मैं उनके साथ काम कर लूं।

Q. जाते जाते अपनी आगामी फिल्मों/सीरीज की कुछ अपडेट देना चाहें तो? 'एस्केप लाइव' के बाद किन प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं?

अभी इस बारे में मैं ज्यादा नहीं बता सकती, लेकिन मैं डिज्नी हॉटस्टार के साथ ही एक और शो कर रही हूं, जो इसी साल रिलीज होगी। इसके साथ ही एक फिल्म कर रही हूं, जो नेटफ्लिक्स पर इसी साल आएगी। तो हां, फिलहाल ये दो प्रोजेक्ट्स हैं।

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