EXCLUSIVE INTERVIEW: शेरशाह के लिए सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपना सबकुछ दिया है- निर्देशक विष्णु वर्धन
कारगिल हीरो परमवीर चक्र सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा पर बनी फिल्म 'शेरशाह' 12 अगस्त को अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली है। धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन विष्णु वर्धन ने किया है। फिल्म में विक्रम बत्रा का किरदार निभा रहे हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और उनके साथ दिखेंगी कियारा आडवाणी।
निर्देशक विष्णु वर्धन इस फिल्म के साथ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बतौर निर्देशक डेब्यू करने वाले हैं। हालांकि दक्षिण में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट दी हैं। इनकी निर्देशित फिल्मों में अरिंथुम अरियामलम, पट्टियाल, बिल्ला, सर्वम जैसी फिल्में शामिल हैं। बहरहाल, अब अपनी हिंदी फिल्म को लेकर निर्देशक बेहद उत्साहित हैं। शेरशाह की रिलीज से पहले विष्णु वर्धन से फिल्मबीट से खास बातचीत की, जहां उन्होंने करण जौहर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, कियारा आडवाणी के साथ काम करने के अनुभव को साझा किया। साथ ही कारगिल में फिल्म की शूटिंग करने और विक्रम बत्रा के परिवार को लेकर भी बातें शेयर कीं।

शेरशाह को लेकर निर्देशक ने कहा, "मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि मैं ये फिल्म करूंगा। लेकिन मैं ये जानता था कि जो भी निर्देशक ये फिल्म करेंगे, ये उनके जीवन की एक यादगार फिल्म होगी। मुझे खुशी है कि मैं इस फिल्म से जुड़ पाया और अब ये मेरे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। मैं बहुत खुश हूं।"
यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

'शेरशाह' कुछ ही दिनों में रिलीज होने वाली है। कई बार फिल्म की तारीख बदली, फिर थियेटर से ओटीटी का सफर; एक निर्देशक के तौर पर कैसा महसूस कर रहे हैं?
मुझे बहुत खुशी है कि फिल्म अब अमेज़न प्राइम पर आ रही है। कभी-कभी ऐसा लग रहा था कि पता नहीं, फिल्म कब रिलीज होने वाली है। हम सबने इतनी मेहनत और इतना समय उसमें दिया है। हालांकि सच कहूं तो हमें इस फिल्म को बनाने में इतना मजा आया कि मुझे पता ही नहीं चला कि इतना समय कब निकल गया है। हम अभी भी फिल्म को जी रहे हैं। इस फिल्म में मैं डूब चुका था। मैं इस फिल्म को बहुत उत्साहित था क्योंकि मैंने इससे पहले कभी भारतीय सेना पर फिल्म नहीं बनाई थी। मैंने कभी बायोपिक नहीं की थी। इसीलिए इतना उत्साह था और यह अभी भी है क्योंकि अब फिल्म दर्शकों के सामने आने वाली है।

आपने फिल्म की शूटिंग कारगिल में ही की है। वह अनुभव कैसा रहा और टीम को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि जाहिर तौर पर कारगिल फिल्म शूटिंग के लिए आसान जगह तो नहीं होगी?
(हंसते हुए) सबकी सांसे चढ़ी हुई थी। Everybody died literally. खैर, मैं कहूंगा कि कारगिल हमारे लिए एक वरदान की तरह साबित हुआ। हमें मूल रूप से कारगिल में शूटिंग नहीं करनी थी। हमने कश्मीर के पास और लद्दाख के पास कुछ लोकेशन को चुना था, लेकिन भारतीय सेना ने कहा कि हम आपका सपोर्ट नहीं कर पाएंगे क्योंकि कश्मीर में कुछ तनावपूर्ण स्थिति चल रही थी। और भारतीय सेना के सपोर्ट के बिना आप यह फिल्म नहीं बना सकते। फिर उन्होंने सुझाव दिया कि आप लोग कारगिल आएं और यहीं शूटिंग करें। यह हमारे लिए वरदान के समान था। आपको और क्या चाहिए, आपको इससे बेहतर और क्या मिल सकता है। हमें बस वहां कुछ लोकेशंस ढूंढ़ने थे।
वहां हमें जनरल वाई.के जोशी से सपोर्ट मिला, जो लेह-लद्दाख के उस समय के कोर कमांडर थे, जो 1999 के युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा के कमांडिंग ऑफिसर थे। हालांकि सबसे कठिन हिस्सा उस ऊंचाई पर शूटिंग करना था। यह सभी अभिनेताओं और तकनीशियनों के लिए मुश्किल था। हम कहीं 12000-14000 फीट के बीच में शूटिंग कर रहे थे। लेकिन उन लोगों ने 16000 फीट की ऊंचाई पर जो जंग लड़ी है वो अविश्वसनीय था। खैर, हमने अपने काम में ईमानदार रहने की कोशिश की है।
आपको बता दें, कारगिल में कभी किसी फिल्म की शूटिंग नहीं हुई है। इसलिए, वहां शूटिंग के लिए ऐसा कोई सेट नहीं है, यहां तक कि पूरे क्रू के ठहरने के लिए ऐसा कोई होटल भी नहीं है। मैं कहना चाहूंगा कि, प्रोडक्शन हाउस ने बहुत कुछ किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि हमें वहां फिल्म की शूटिंग में कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।

कारगिल के अलावा भी फिल्म की शूटिंग कुछ रियल लोकेशंस पर की गई है?
हां, विक्रम बत्रा पालमपुर (हिमाचल) के रहने वाले हैं। इसलिए हमने पालमपुर में कुछ खास दृश्यों की शूटिंग की है, वहां की सड़कों पर, यूनिवर्सिटी की। हमने पंजाब यूनिवर्सिटी में शूटिंग की, जहां से विक्रम बत्रा ने पढ़ाई की थी। और फिर हमने कारगिल में भी शूटिंग की। लेकिन जहां विक्रम बत्रा ने लड़ाई लड़ी थी, प्वाइंट 5140; हम वहां शूटिंग नहीं कर पाए क्योंकि वह संभव नहीं था। यह वास्तव में बहुत खतरनाक था। फिर शूटिंग के लिए हमने उसी तरह के दिखने वाले लोकेशन तलाशे।

बतौर निर्देशक 'शेरशाह' आपकी पहली हिंदी फिल्म है। कब और कैसे जुड़ना हुआ इस फिल्म से?
कभी-कभी जिंदगी में कुछ खूबसूरत मौके आपको मिल जाते हैं, बस अचानक ही.. और यह आपके जीवन में केवल एक बार होता है। शेरशाह मेरे लिए वही मौका है। दरअसल, फिल्म के लेखक संदीप श्रीवास्तव शेरशाह पर रिसर्च कर रहे थे। और उस समय मैं और संदीप एक तमिल के लिए स्क्रिप्ट लिख रहे थे। हम आम तौर पर कैप्टन विक्रम बत्रा के बारे में जानकारी साझा किया करते थे। मैं उनसे जुड़ी जितनी बातें सुनता, उतना ही अधिक प्रभावित होता जा रहा था। संदीप एक निर्देशक का दृष्टिकोण चाहते थे, इसलिए हम आम तौर पर चर्चा करते थे, स्क्रिप्ट पर अपने विचार साझा करते थे। यह सफर वहां से शुरू हुआ। इस बीच मेरी उस तमिल फिल्म पर बात नहीं बनी। मैं एक दिन शब्बीर बॉक्सवाला से मिला, जिनके पास फिल्म के अधिकार हैं। उन्होंने मुझे धर्मा प्रोडक्शंस में करण जौहर से मिलाया। और वहां से सब कुछ बदल गया। मुझे कभी नहीं पता था कि मैं ये फिल्म करूंगा। लेकिन मैं यह जानता था कि जो कोई भी यह फिल्म करेगा वह उनके जीवन में एक यादगार फिल्म होगी। और मुझे खुशी है कि यह अब मेरे जीवन का हिस्सा बन गया है।

धर्मा प्रोडक्शन के साथ जुड़ना कैसा रहा? करण जौहर खुद भी एक निर्देशक हैं, तो उनका फिल्म से किस तरह का जुड़ाव रहा?
करण एक शानदार निर्देशक हैं और एक निर्देशक होने के अलावा, वह उन सबसे शानदार निर्माताओं में से एक हैं जिनसे मैं मिला हूं। मेरे पास वास्तव में कहने के लिए बहुत कुछ है। उदाहरण के लिए, उन्हें पता होता है कि आप वास्तव में क्या कह रहे हैं कि फिल्म को क्या चाहिए क्योंकि वह खुद एक निर्देशक है। और मुझे कहना होगा कि वह एक रचनात्मक निर्माता हैं। वह जानते हैं कि फिल्म को लेकर कैसा विजन रखना है। वॉर फिल्मों का बजट दूसरी फिल्मों की तुलना में थोड़ी अधिक ही होती है, और उन्होंने फिल्म के लिए उतना बजट दिया। इन बातों को कोई क्रिएटिव प्रोड्यूसर ही समझ सकता है। दूसरी बात जो मुझे उनकी सबसे अच्छी लगती, वो ये कि, वो पूरी तरह से आप पर विश्वास करते हैं। धर्मा प्रोडक्शन का पूरा मकसद यही रहता है कि फिल्म को क्या चाहिए और फिल्म बनाने के लिए फिल्म निर्देशक को क्या चाहिए, ये पूरा हो। और करण जौहर की सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने निर्देशकों पर बहुत विश्वास करते हैं। निर्देशक को सिर्फ फिल्म बनाना भर है। निश्चित तौर पर उनके साथ काम करने में मजा आया।

सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी को निर्देशित करना कैसा रहा?
सिद्धार्थ और कियारा बहुत ही बेहतरीन कलाकार हैं। मेरे लिए विक्रम बत्रा सिद्धार्थ मल्होत्रा हैं और डिंपल कियारा आडवाणी हैं। वास्तव में इन किरदारों को निभाने के लिए इन दोनों से बेहतर कोई नहीं हो सकता। मैं बहुत खुश हूं। मैं आपको बता दूं, यदि आपको अपनी फिल्म के लिए सही कास्ट मिल जाता है, तो आपका 50 प्रतिशत काम वहीं खत्म हो जाता है। बाकी के 50 प्रतिशत में इसकी शूटिंग करते हैं, इसे तैयार करते हैं। जो बात मुझे वास्तव में सबसे अच्छी लगी, वो ये कि सिद्धार्थ अपने कैरेक्टर में असल जीवन से बिल्कुल अलग दिख रहे हैं। उन्होंने वास्तव में कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाने के लिए अपना सबकुछ दिया है। और कियारा भी एक शानदार अभिनेत्री हैं, उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया है।

विक्रम बत्रा से जुड़ी बातें लोगों से छिपी नहीं है। वहीं, वो लोगों के दिल के बहुत करीब भी हैं। इस तरह की कहानी को निर्देशित करते हुए, बतौर निर्देशक आप क्रिएटिव लिबर्टी और मूल जानकारी के बीच रेखा कहां खींचते हैं?
इन सारी बातों का ख्याल, शूटिंग से पहले स्क्रिप्टिंग के दौरान ही हमने रखा था कि हमें कितनी रियल कहानी बताने की कितनी जरूरत है.. और कहां कहां पर क्रिएटिव लिबर्टी ली जा सकती है। या आप फिल्म को कितना नाटकीय बनाने जा रहे हैं, वे सभी निर्णय हमें पहले लेने होते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि वास्तव में जो घटनाएं हुई थीं, मैंने उसके करीब रहने की पूरी कोशिश की है। हां, मैंने क्रिएटिव लिबर्टी ली है, लेकिन आपको कुछ भी बहुत लाउड देखने को नहीं मिलगा। शूटिंग के दौरान मुझे बस इतना करना था कि मैंने जो भी निर्णय लिए हैं, मुझे शूटिंग के दौरान उस पर टिके रहना है। उस समय, मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहता था।

वॉर फिल्मों और देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों के साथ विवादों का पुराना नाता रहा है। ऐसे में टीम क्या सोच रखती है?
देखिए, जब आप पूरी ईमानदारी के साथ काम करते हैं, अपनी फिल्म के प्रति सच्चे रहते हैं, तो आपको किसी बात का डर नहीं रहता। इसलिए, मैं भी चिंतित नहीं हूं। इसके अलावा, अगर कुछ भी विवाद होने वाला है, अगर लोग इसमें कोई मुद्दा ढूंढना ही चाहेंगे, तो यह उनके अपने इरादे और मोटिवेशन या जो भी हो। हमें विक्रम बत्रा के परिवार से, भारतीय सेना से, जिन्होंने फिल्म देखी है, सभी से मंजूरी मिली है। हम सभी इसके बारे में बहुत खुश हैं क्योंकि हमने एक तकनीकी दल के रूप में, एक निर्माता के रूप में और एक मेकर्स के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की। कितनी सच्चाई और कितनी ईमानदारी से एक कहानी बताई जा सकती है, हमने बस यही दिखाने की कोशिश की है।

फिल्म को देखकर विक्रम बत्रा के परिवार ने कैसी प्रतिक्रिया दी है?
फिल्म का ट्रेलर देखकर वो बहुत खुश थे। मुझे उनसे ज्यादा बात करने का मौका नहीं मिला, लेकिन मैंने विशाल बत्रा से बात की। वह एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्होंने फिल्म देखी है। वो बहुत उत्साहित हैं। हम फिल्म को परिवार और इंडियन आर्मी को दिखाने का इंतजार कर रहे हैं। हमें रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिल गई।

फिल्म बनाने के दौरान लगातार आप बत्रा परिवार के संपर्क में थे?
हां, हम निश्चित रूप से परिवार के संपर्क में थे। और उनके साथ साथ हम अधिकारियों के संपर्क में भी थे। हमने कुछ महीनों तक जो भी रिसर्च किया था, वह सारी जानकारी हमने शूटिंग से पहले इकट्ठी कर ली थी। कभी-कभी जब हमें कुछ संदेह होते थे, तो हमें अधिकारियों को किसी भी समय कॉल करने की स्वतंत्रता होती थी। इंडियन आर्मी से हमें बहुत बड़ा सपोर्ट मिला है क्योंकि शूटिंग के दौरान दो अधिकारी लगातार हमारे साथ रहे थे, जिन्होंने तकनीकी चीजों को समझने में हमारी मदद की।

ओटीटी की पहुंच दुनियाभर में है। ऐसे में फिल्म का थियेटर की जगह ओटीटी पर रिलीज होने को आप अवसर की तरह देखते हैं?
बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। एक दिन आपका कंटेंट हर घर में पहुंच जाता है। कोई भी आपकी फिल्म देख सकता है। फिल्म बनाने के पीछे मुख्य धारणा ही ये होती है कि इसे लोगों तक पहुंचाना है। और अमेज़न प्राइम वीडियो हमारे लिए ऐसा करने जा रहा है। हां, यह एक थियेट्रिकल फिल्म है, इसे उस पैमाने के साथ शूट किया गया है, लेकिन ओटीटी पर भी इसकी कहानी का वही प्रभाव रहेगा। कहानी का प्रभाव बदलने वाला नहीं है। अनुभव अलग हो सकता है लेकिन प्रभाव शायद वही होगा। मैं इसकी उम्मीद कर रहा हूं।

शेरशाह में दर्शकों को विक्रम बत्रा की निजी जिंदगी की कहानी ज्यादा देखने को मिलेगी या कारगिल युद्ध?
दर्शक इस फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा को एक इंसान के तौर पर देखेंगे, क्योंकि वह एक साधारण इंसान थे जो लेजेंड बन गए हैं। जो उनकी उपलब्धियां हैं, वह किस तरह के व्यक्ति थे और युद्ध के दौरान उन्होंने जो कुछ हासिल किया वह सब आप फिल्म में देखेंगे।


Click it and Unblock the Notifications