EXCLUSIVE INTERVIEW: "इम्तियाज अली की रॉकस्टार का रीमेक बने, तो मैं जरूर करना चाहूंगा"- पर्ल वी पुरी

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"मैं हमेशा से फिल्मों में आना चाहता था और आखिरकार मेरा ख्वाब पूरा हुआ है", यारियां 2 से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू कर रहे एक्टर पर्ल वी पुरी कहते हैं। इस फिल्म में पर्ल के साथ दिव्या खोसला कुमार और मिज़ान जाफरी मुख्य किरदारों में नजर आएंगे।

छोटे पर्दे की दुनिया में पर्ल वी पुरी ने खूब नाम और शोहरत कमाई है। 'फिर भी ना माने बदतमीज दिल' से शुरुआत करने के बाद, वो 'मेरी सासू मां', 'नागार्जुन-एक योद्धा', 'नागिन' जैसे चर्चित शोज का हिस्सा बने। वहीं, अब एक्टर फिल्मों में कदम रखने के लिए तैयार हैं।

फिल्मीबीट से साथ खास बातचीत में पर्ल वी पुरी ने अपने सफर पर खुलकर बातें की हैं। पहला टीवी सीरियल मिलने से लेकर, अपने संघर्ष, अपनी सफलता और अब फिल्मों में डेब्यू करने को लेकर एक्टर ने काफी कुछ शेयर किया है।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश:

Q. डेब्यू फिल्म की रिलीज में कुछ ही दिनों का वक्त रह गया है। कैसा महसूस कर रहे हैं?

A. सच कहूं तो, नर्वस महसूस कर रहा हूं। उम्मीद है कि फिल्म अच्छे से रिलीज हो जाए, दर्शकों को फिल्म पसंद आए क्योंकि हमने बहुत मेहनत की है। इसके साथ साथ मैं बहुत खुश भी हूं। मैं वास्तव में खुद को भाग्यशाली और धन्य महसूस करता हूं। तो हां, फिलहाल मिक्स्ड इमोशंस चल रही हैं।

Q. टेलीविजन में आपने लंबे समय तक काम किया है। वहां आपको एक पहचान मिली है। फिल्मों के साथ फिर एक नई शुरुआत करना कहीं मुश्किल लगा?

A. टेलीविजन शो करने के दौरान भी हर दिन मैं थोड़ी नर्वसनेस के साथ ही जाता था, जैसे ये मेरा पहला शॉट हो। और मैं हर शॉट में अपनी पूरी जान डाल देता था। मैंने इस फिल्म में भी यही कोशिश की है। जिन्होंने मुझे टेलीविजन में इतना प्यार दिया है, उसके लिए मैं सभी का पूरे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। मुझे जो भी शोहरत और प्यार मिला है, मैं इसे आशीर्वाद की तरह देखता हूं। मैंने कभी भी सफलता को सिर पर नहीं चढ़ने दिया। क्योंकि मेहनत तो सेट पर बैठा हर इंसान करता है.. लाइट्समैन से लेकर प्रोडक्शन में काम कर रहा हर इंसान। मेहनत सबकी होती है, लेकिन दर्शकों का प्यार तो एक्टर को ही मिलता है। इसीलिए मैं कभी इस प्यार को हल्के में नहीं लेता हूं। ये प्यार ही मेरे लिए सब कुछ है। मुझे खाना मत दो, लेकिन ये प्यार देते रहो। मुझे दर्शकों से प्यार नहीं मिलता है तो मैं दुखी हो जाता हूं।

Q. इसे आप अपना ड्रीम डेब्यू मानते हैं?

A. बिल्कुल, इस फिल्म में मैंने अपना दिल, जान, आत्मा, सब लगा दी है। ताकि मैं इसे अपने फैंस के लिए बेस्ट अनुभव बना सकूं। जो लोग मुझे सालों से प्यार देते आए हैं, जो इंतजार कर रहे हैं कि मेरी पहली फिल्म आएगी और वो देखेंगे.. तो उन्हें देने के लिए मेरे पास सिर्फ मेरा काम ही है। मैं उन्हें अपने काम से कभी निराश नहीं करना चाहता। जो दो- ढ़ाई घंटे वो मुझे बड़ी स्क्रीन पर देखेंगे, मैं चाहता हूं कि वो ढ़ाई घंटे उनकी जिंदगी के सबसे अच्छे ढ़ाई घंटों में गिने जाएं। बस मेरी यही कोशिश रहती है।

Q. फिल्मों में काम करना आपका हमेशा से सपना रहा है। ऐसे में यारियां 2 का अनुभव कैसा रहा?

A. बहुत ही शानदार अनुभव था। वो मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। लेकिन बहुत ही अच्छा लगता है। जैसा कि शाहरुख खान जी ने कहा है "किसी चीज को आप शिद्दत से चाहोगे, पूरी कायनात आपको उससे मिलाने में लग जाती है।" मेरे साथ भी वही हुआ। मैं हमेशा से यही चाहता था और आखिरकार मेरा ख्वाब पूरा हो रहा है। लेकिन अभी तो शुरुआत है। अभी मुझे बहुत कुछ करना है।

Q. आपकी फैन फॉलोइंग काफी जबरदस्त है। फैंस के साथ अपने बॉण्ड पर क्या कहना चाहेंगे?

A. ये मेरे अपने लोग हैं। ये मेरी फैमिली है। ये सभी लोग जो हैं, शायद किसी जन्म में मेरे साथ ही होंगे क्योंकि जिस तरीके का ये मुझे प्यार देते हैं, मैं सच बता रहा हूं, मुझे खुद ही विश्वास नहीं होता। मेरे लिए ये लोग प्रार्थना करते हैं, मेरे नाम का टैटू करवाते हैं और मैं दिल की गहराई से इनसे बहुत प्यार करता हूं। मैं इन्हें फैंस नहीं, फैमिली ही कहता हूं और मानता हूं। उनके प्यार की वजह से ही मैं बहुत स्पेशल महसूस करता हूं। मैं मुंबई में अकेला आया था, जानता भी नहीं था किसी को। लेकिन आज मैं जिस भी मुकाम पर हूं, मुझे कभी अकेला फील नहीं होता। मैं जब कभी भी चलता हूं, मुझे लगता है कि हजारों लोग मेरे साथ चल रहे हैं। ये लोग हर मोड़ पर मुझे इतना सपोर्ट देते हैं कि मैं बहुत स्ट्रॉन्ग फील करता हूं। मैं जो कुछ भी हूं, इन्हीं लोगों की वजह से हूं।

Q. यारियां 2 में अपने किरदार को लेकर कुछ बताएं?

A. मेरे किरदार नाम बजरंग है। इसमें बहुत सारे इमोशंस हैं। इस कैरेक्टर में परफॉर्मेंस का इतना स्कोप है कि काफी हद तक मैं अपने अभिनय को दिखा पाया.. वो सारे इमोशंस दिखा पाया, जो मैं दिखाना चाहता था। सच बताऊं तो बजरंग आपको फिल्म में हंसाएगा भी, रूलाएगा भी और आखिर में यह भी महसूस करवा देगा कि ये तो मैं ही हूं। मुझे लगता है कि हर फिल्म में दर्शक यही ढूंढते हैं। जैसे मुझे इम्तियाज अली की रॉकस्टार बहुत अच्छी लगती है क्योंकि मैं उस फिल्म से बहुत कनेक्ट करता हूं। किसी भी कहानी के सबसे महत्वपूर्ण यही है.. कि आप उससे कनेक्शन महसूस करें।

Q. बजरंग से आपने कितना कनेक्ट किया?

A. (हंसते हुए) बहुत। दुनिया में शायद ही कोई होगा, जिसका दिल ना टूटा हो। मेरा भी टूटा था और बुरी तरह टूटा था। मैं तो इंडस्ट्री में आया ही अपनी गर्लफ्रैंड के चक्कर में था। दरअसल, मैं रियल लाइफ में बहुत इमोशनल इंसान हूं। इंडस्ट्री में भी मैं बहुत ज्यादा घुल मिल नहीं पाता हूं क्योंकि मैं पार्टी करता नहीं। शराब और सिगरेट मैंने ज़िंदगी में कभी ट्राई नहीं किया, तो मैं पार्टियों में अजीब महसूस करता हूं। इसीलिए मैं जाता ही नहीं।

Q. लेकिन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में तो पार्टियों में जाना, दूसरों से कनेक्शन बनाना एक महत्वपूर्ण पक्ष होता है?

A. नहीं, मुझे नहीं लगता कि सोशलाइजिंग से कुछ होता है यहां। आप सबके साथ अच्छे से रहो, अच्छा बर्ताव करो, अच्छा काम करो.. ये जरूरी है। कनेक्शन बनाने से कोई स्टार नहीं बनता। क्राफ्ट से लोग आगे बढ़ते हैं। मुझे भी इंडस्ट्री में सभी लोगों ने बहुत प्यार दिया है। मुझे कभी बाहरी महसूस नहीं कराया। चाहे वो सलमान भाई हों, एकता हो, उन्होंने हमेशा मुझे प्यार दिया है। लेकिन मैंने हमेशा कोशिश की है कि किसी पर भी बोझ ना बनूं।

Q. आपने कहा कि आप गर्लफ्रैंड के चक्कर में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आए। इस किस्से को शेयर करना चाहेंगे?

A. मैं छिंदवाड़ा का हूं, बाद में हम शिफ्ट हो गए थे आगरा। वहां से मैं अपनी गर्लफ्रैंड के चक्कर में भागकर यहां मुंबई आया था। टीशर्ट, पैजामा, चप्पल, वॉलेट और फोन.. बस यही लेकर घर से निकल गया था। मेरी गर्लफ्रैंड को शाहरुख खान बहुत पसंद था। वो चाहती थी कि मैं एक्टर बनूं। तो उस चक्कर में मैं घर पर लड़ता था कि मुझे मुंबई जाना है। मेरे पापा बिजनेसमैन थे, अब वो इस दुनिया में नहीं रहे। एक दिन उन्होंने मुझसे कह दिया कि जिस दिन 100 रूपए खुद से कमाने पड़ गए ना, तब पता चलेगा। ये सुनकर मैं घर से भागकर मुंबई आ गया।

यहां का सफर काफी संघर्ष से भरा रहा। कुछ ही दिनों में पैसे खत्म हो गए थे। उधार मैं किसी से लेना नहीं चाहता था। फिर एक महीना तो मैंने सिर्फ गोलगप्पे खाकर गुजारा। मैं पूरा दिन भूखा रहता था, रात में 9 बजे गोलगप्पे खाता था और सो जाता था। वो गोलगप्पे वाले भईया एक डायरी में मेरा हिसाब लिखकर रखते थे। जब एक महीना पूरा हो गया तो उन्होंने पैसे के बारे में पूछा। फिर मैं लगभग 8- 9 दिनों तक भूखा ही रह गया। मतलब पूरी तरह से भूखा, सिर्फ पानी पीकर रहा। नौवें दिन मुझे मेरा पहला चेक मिला.. 5000 रूपए का। वो मैंने कैश कराया और सबसे पहले गोलगप्पे वाले को जाकर पैसे दिये। उसके बाद मैं लगातार काम करता रहा। ये जो कुछ दिन थे, जो जर्नी थी मेरी, वो मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। मैं अच्छे खासे घर में पला बढ़ा था। आर्थिक संघर्ष मैंने कभी नहीं देखी थी। लेकिन इस जर्नी ने मुझे सिखाया कि सच में 100 रूपए कमाने में भी बहुत मेहनत लगती है।

Q. फिर पहला टेलीविजन शो आपने कब साइन किया?

A. जब मैं टीवी कर्मशियल कर रहा था, उस वक्त मैंने एक फिल्म साइन की थी। जो किसी वजह से रूकी हुई थी। मैं हमेशा से फिल्में ही करना चाहता था, लेकिन बात बन नहीं पा रही थी। वहीं, टीवी के ऑफर्स मेरे पास लगातार आ रहे थे क्योंकि मैं मिलता रहता था लोगों से। एक समय पर मुझे एक साथ तीन शोज ऑफर हुए थे, जिनमें से मुझे एक करना था। एक शो था 'चमक', जो बनी ही नहीं। वो लाइफ ओके पर आने वाला था। दूसरा शो था बदतमीज दिल, और तीसरा शो था 'वीरा'। वो ऐसा वक्त था, जब मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और उसी दिन मैंने डिसाइड किया था कि मैं टीवी कर रहा हूं और मैंने बदतमीज दिल साइन कर ली।

Q. टीवी आपको घर घर तक पहुंचाता है। लेकिन दूसरी ओर ये आपको ओवर एक्सपोज भी करता है। छोटे पर्दे से फिल्मों में गए कई एक्टर्स ने कहा है कि 'टीवी एक्टर' का टैग लंबे समय तक उनके साथ बना रहता है, जिससे उनका करियर भी प्रभावित होता है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

A. टीवी एक्टर का जो टैग है ना, मुझे लगता है कुछ एक्टर्स खुद उसे लेकर बहुत धारणा बनाकर रखते हैं। मैं दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर खड़े होकर चिल्ला सकता हूं कि.. हां मैं टीवी एक्टर हूं और मैंने जो कुछ कमाया है टीवी से कमाया है, लेकिन आज मैं यहां हूं। मायने ये करता है कि मैं काम अच्छा कर रहा हूं। यदि मैं काम अच्छा नहीं कर रहा हूं, तो मैं टीवी एक्टर हूं, ओटीटी एक्टर हूं या टिकटॉक एक्टर हूं, कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई मुझे पसंद नहीं करेगा। लेकिन अगर मैं अच्छा काम करता हूं तो सब मुझे पसंद करेंगे, चाहे मैं किसी भी मीडियम से आया हूं। टीवी एक्टर की बात करें तो शाहरुख खान भी टीवी से ही आए हैं। सुशांत सिंह राजपूत, जो आज हमारे साथ नहीं हैं, वो भी टीवी एक्टर ही थे। मृणाल ठाकुर भी टीवी एक्टर हैं। लेकिन आज इन सभी को दुनिया जानती है और पसंद करती है। शाहरुख खान ने अच्छा काम किया.. तो आज वो देश के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं। इसीलिए मुझे नहीं लगता कि टीवी आपको रोकती है। उसी के जरीए आपके काम को एक साथ लाखों, करोड़ों लोग देखते हैं.. इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है। कभी भी टेलीविजन को नीचा नहीं सोचना चाहिए।

Q. अंत में, बतौर एक्टर आप किस तरह के किरदार करने की ख्वाहिश रखते हैं?

A. मैं दिल से ये हमेशा कहता हूं.. कि रॉकस्टार यदि दोबारा बने, तो इम्तियाज सर प्लीज मेरे साथ कीजिएगा। वो फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है। साथ ही मुझे इम्तियाज सर का काम बहुत पसंद है। मैं असल जिंदगी में बड़ा शांत सा हूं ना, तो मुझे वैसा रॉकस्टार जैसा कैरेक्टर करने का बड़ा शौक है। मैं चाहता हूं कि मैं मुझे ऐसे रोल ऑफर हों, जहां परफॉमेंस का काफी स्कोप हो।

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