EXCLUSIVE: सिद्धार्थ मल्होत्रा बहुत सेंसिटिव कलाकार हैं, उनमें स्टार वाले कोई नखरे नहीं हैं- शांतनु बागची

Shantanu Bagchi Exclusive Interview: विज्ञापन की दुनिया से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले निर्देशक शांतनु बागची अपनी पहली फिल्म 'मिशन मजनू' को मिले रिस्पॉस को लेकर बेहद खुश हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और रश्मिका मंदाना ने मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म को मिली प्रतिक्रिया पर बात करते हुए निर्देशक ने कहा, "पॉजिटिव रिस्पॉस देखकर एक राहत महसूस होती है क्योंकि एक फिल्म सिर्फ निर्देशक या कलाकार की नहीं होती है, उसके पीछे एक लंबी चौड़ी टीम होती है। सब लोगों ने बहुत मेहनत किया था, इसीलिए अब जब तारीफ मिल रही है तो सभी उत्साहित हैं।"
सिद्धार्थ और रश्मिका बहुत सिक्योर एक्टर्स हैं
फिल्मीबीट के साथ हुई खास बातचीत में शांतनु बागची ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और रश्मिका के साथ काम करने के अपने अनुभव पर विस्तार से बातें कीं। निर्देशक ने कहा, "मैंने सिद्धार्थ का काम देखा था और मुझे वो पसंद हैं। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद सिद्धार्थ ने भी फिल्म के प्रति दिलचस्पी दिखाई। उसके बाद फिल्म से रश्मिका जुड़ीं। हमें लगा कि ये काफी फ्रेश जोड़ी होगी। ये मेरी डेब्यू फिल्म थी, लिहाजा थोड़ा रिस्क भी था। लेकिन जब सिद्धार्थ के साथ मैंने बातचीत शुरु की तो मुझे अहसास हुआ कि वो बहुत सेंसेटिव आर्टिस्ट हैं। उनको फिल्म के हर पहलू में बहुत दिलचस्पी रहती है। इसीलिए उनके साथ काम करने का अनुभव बहुत शानदार रहा। रश्मिका भी बहुत टैलेंटेड एक्ट्रेस हैं। और सबसे खास बात है कि फिल्म में वो कहीं भी लाइमलाइट खींचने की कोशिश करती नहीं दिखती हैं। वो बहुत सिक्योर कलाकार हैं। इन दोनों सितारों में कोई नखरा नहीं है। दोनों अपने काम के प्रति फोकस रहते हैं। इसीलिए इनके साथ काम करना मैंने बहुत एन्जॉय किया। ये मेरी पहली फिल्म थी, तो मैंने जरूरत से ज्यादा तैयारी कर रखी थी। लेकिन सिद्धार्थ ने हर तरह से मुझे काफी सपोर्ट किया। हमने काफी वर्कशॉप किये, रिहर्सल किये। शूटिंग के दौरान भी सिद्धार्थ अपनी सलाह शेयर करते थे या कोई इनपुट देते थे। मैं बहुत खुश हूं कि मुझे मेरी पहली फिल्म के दौरान ऐसी टीम मिली।"
हमारी पटकथा राजी से बिल्कुल अलग है
एक ओर जहां फिल्म को तारीफ मिली, वहीं कुछ लोगों ने लगातार इसकी तुलना आलिया भट्ट की राजी से की। इस बारे में बात करते हुए निर्देशक ने हंसते हुए कहा, "विवाद तो आजकल किसी भी बात को लेकर हो सकता है। जैसे फिल्म की रिलीज के बाद कुछ समीक्षकों ने लिखा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी तो फिल्म सच्ची घटना पर आधारित कैसे हुई। इस पर मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि बतौर समीक्षक या तो आप रिचर्स करें कि कहानी सच्ची है या नहीं। या तो जब हम कह रहे हैं कि घटना सच्ची है, तो इस बात को मान लें। फिर कुछ लोगों ने ये भी कहा कि ये राजी फिल्म से मिलती जुलती है। अब इस पर मैं क्या कह सकता हूं! राजी बहुत अच्छी फिल्म है, लेकिन उनकी कहानी का आधार बिल्कुल अलग था। हमारी फिल्म की पटकथा बिल्कुल अलग है। हर स्पाई फिल्म में कुछ एलिमेंट्स होते हैं, जो समान होते हैं.. वही यहां भी है।"
दर्शकों को स्पून फीड की जरूरत नहीं
देशभक्ति से लबरेज़ एक स्पाई- थ्रिलर फिल्म बनाने के चैलेंज पर बात करते हुए शांतनु बागची ने कहा, "देशभक्ति दिखाने का भी एक तरीका होता है। जरूरी नहीं कि हर बार जोर शोर के साथ, नारे लगाकर ही आप देशभक्ति दिखाएं। मुझे वो पसंद ही नहीं है। देशभक्ति आप एक किरदार के द्वारा भी महसूस कर सकते हैं। यदि कलाकार का अभिनय अच्छा है, आपकी कहानी अच्छी है, तो आप वो महसूस करेंगे। उसका ध्यान मैंने मिशन मजनू के दौरान भी रखा है। हमने कई डायलॉग्स में बदलाव भी किये क्योंकि हम कहीं भी ओवर द टॉप नहीं जाना चाहते थे। मुझे लगता है कि आज दर्शक बहुत सेंसेटिव हो चुके हैं। उन्हें स्पून फीड करने की जरूरत नहीं है।"


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