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    मिर्जापुर 2 Exclusive: हम आउटसाइडर के लिए एक्टिंग नौकरी है, काम पसंद तो प्रमोशन होता है- हर्षिता गौर

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    मिर्जापुर 2 केवल कालीन भैय्या, गुड्डू और मुन्ना की दहशत से भरी दुनिया नहीं है। मिर्जापुर की दीवारों पर डिम्पी, गोलू और बीना त्रिपाठी के भीतर की आग की लपटे भी हैं। मिर्जापुर 2 में महिला किरदारों की ज्वाला और भयानक होती हुई दिखाई देगी। एल अलग मोड़ लेगा डिम्पी का किरदार। डिम्पी जो कि अपने पिता के उसूलों पर चल अहिंसा को सही मानती थी।

    वो अपने भाई बबलू पंडित को खोने के बाद बंदूक को जीने का जरिया समझ रही है। वैसे ये जानकर आपको ताज्जुब होगा कि डिम्पी यानी कि एक्ट्रेस हर्षिता गौर असल जिंदगी में मिर्जापुर के भय को अपने बचपन का हिस्सा बना चुकी हैं। हर्षिता का ननिहाल मिर्जापुर में है। ऐसे में उन्होंने वो धुआं देखा है जो कि आग बनकर पर्दे पर मिर्जापुर में छाया हुआ है।

    डिम्पी ( हर्षिता गौर) ने मिर्जापुर 2 में महिलाओं की भूमिका पर केवल प्रकाश नहीं डाला है बल्कि फिल्मीबीट हिंदी FILMIBEAT HINDI से बातचीत में वह वेब की दुनिया में आउटसाइडर को मिल रही लोकप्रियता पर भी अपनी मजबूत राय पेश कर रही हैं। चलिए फिर मिलते हैं डिम्पी से।

     मिर्जापुर 2 में डिम्पी ने यू टर्न लिया

    मिर्जापुर 2 में डिम्पी ने यू टर्न लिया

    मेरे लिए मिर्जापुर प्रोफेशनल स्तर पर ऐसी सीरीज है जिसमें मुझे खुद को तलाशने का का मौका मिला है। खुश हूं कि मेरे साथ ये सीरीज मेरे साथ हुई है। पहले भाग में अहिंसा के साथ थी डिम्पी। अपने भाई गुड्डू और बबलू पंडित की सोच से अलग रहा है डिम्पी का किरदार । मिर्जापुर 2 में डिंपी ने यू टर्न लिया है। उसूलों पर चलने वाली लड़की का गुनाह के रास्ते पर चलने के बीच का एक बहुत बड़ा संघर्ष है। बाकी वो क्या करेगी और कैसे करेगी इसके लिए आपको मिर्जापुर 2 देखना होगा।

    मिर्जापुर की खूंखार दुनिया मैंने देखी है

    मिर्जापुर की खूंखार दुनिया मैंने देखी है

    मिर्जापुर को करने के पीछे की बड़ी वजह ये रही है कि मेरे लिए ये सच है। मैंने मिर्जापुर की खूंखार दुनिया देखी है। ये कहानी भी अपने आप में काफी दिलचस्प है। जब मैं जाकर अपने निर्देशक से मिली थी, उन्होंने मुझे मिर्जापुर के बारे में बताया था तो उस दौरान मुझे लगा कि जिस बैकग्राउंड से मैं आती थी,उसके लिए मेरे लिए ये अपने आप को साबित करने का सटीक मौका है।

    जब मिर्जापुर रिलीज हुई तो लोगों ने कहा सिर्फ क्रूरता है

    जब मिर्जापुर रिलीज हुई तो लोगों ने कहा सिर्फ क्रूरता है

    मिर्जापुर जब रिलीज हुआ तो तो कई लोगों का कहना था कि सिर्फ हिंसा और क्रूरता है। हालांकि इसमें एक परिवार की कहानी भी है। दो भाईयों की कहानी। कैसे एक सीधा परिवार पूरी तरह से बदल जाता है। कुल मिलाकर इसकी ऊर्जा आकर्षित करती है। ऊपर से वेब अभी एक नया प्टेलफार्म बनकर मिर्जापुर के समय आ रहा था है तो मैंने सोचा कि इसमें खुद को परखना सही होगा।

    मैंने बचपन में मिर्जापुर का आतंक देखा है

    मैंने बचपन में मिर्जापुर का आतंक देखा है

    बचपन में मेरी मिर्जापुर के आतंक से हल्की सी मुलाकात हुई है। हां, मैंने ऐसा खास बड़ा नहीं देखा है। मेरे नानाजी मिर्जापुर में पले-बढ़े हैं। मेरी मां इकलौती संतान है । मुझे याद है कि बचपन में मेरी मां जाती थी तो हम भी नानाजी के यहां मिर्जापुर गए थे।

    वहां मैंने बंदूक देखी है। वहां के किस्से भी सुने हैं। एक समय बाद हमें बोल दिया गया था कि हमारे परिवार को मिर्जापुर नहीं जाना चाहिए। वहां पर कुछ संपत्ति का मामला चल रहा था। मैंने बचपन से ये सारी बातें सुनी हैं। ऐसे में मिर्जापुर की कहानी सुनने के दौरान मेरे लिए वो चौंकाने वाला नहीं था कि अरे ऐसा भी होता है? मुझे लगा कि हां,मिर्जापुर में ऐसी चीजें होती हैं। अगर आपने चिंगारी देखी है तो आग तो होगा ही।

    मिर्जापुर 2 में महिला शक्ति

    मिर्जापुर 2 में महिला शक्ति

    मिर्जापुर के जरिए केवल पुरुष किरदार ही नहीं बल्कि महिला किरदारों को भी एक दमदार संदेश के जरिए दर्शकों के बीच पेश किया जा रहा है। ये सीरीज बताती है कि औरतों को कमजोर नहीं समझना चाहिए। हर स्तर और सोच वाला महिला किरदार मिर्जापुर की कहानी को मजबूत तरीके से पेश करता है।

    इस मिथ्या को मिर्जापुर तोड़ता है कि औरतें ऐसी होती है जो घर के भीतर रहती हैं। नाजुक होती हैं। ऊंची आवाज में बात नहीं करती हैं। पुरुष प्रधान समाज में कई बार महिलाओं को कमजोर समझा जाता है। मिर्जापुर महिला सशक्तिकरण पर भी रोशनी डालती है। डिम्पी, गोलू और बीना की भूमिका इसे साफ तौर पर दर्शाती है।

     ऐसी कहानी को बिग स्टार्स की जरूरत नहीं

    ऐसी कहानी को बिग स्टार्स की जरूरत नहीं

    मिर्जापुर जैसी कहानी के लिए किसी बिग स्टार्स की जरूरत नहीं है। ये मुझे नहीं बल्कि पूरी दुनिया को मानना चाहिए। वेब की दुनिया ने ये साबित किया है। जहां कोई बड़ा स्टार नहीं है। कई फिल्मों ने भी ये साबित किया है। मेरे ख्याल से कंटेंट हीरो, हीरोइन है। ये हम सभी जितना जल्दी समझ जाए उतना अच्छा है। रहा सवाल मेरा तो मैं एंटरटेनमेंट की हर दुनिया में खुद का विस्तार करना चाहती हूं। ऐसा नहीं है कि मुझे ए लिस्ट एक्टर या निर्देशक के साथ काम नहीं करना है। मेरे ख्याल से सबसे पहले स्क्रिप्ट आती है। बाकी तो सब दूसरे पायदान पर आता है।

     मिर्जापुर की लोकप्रियता का फायदा मुझे मिला

    मिर्जापुर की लोकप्रियता का फायदा मुझे मिला

    पहले के मुकाबले मेरा संघर्ष कम हुआ है। मिर्जापुर के बाद अब शायद मुझे एक टीवी विज्ञापन के लिए दो घंटे ऑडिशन में खड़ा नहीं होना पड़े। या तो शार्ट लिस्ट ऑडिशन के लिए बुलाया जाए या फिर सीधे प्रस्ताव दिया जाए। हम आउटसाइडर हैं, जिनका इंडस्ट्री में कोई नहीं है, हमारे लिए तो एक्टिंग नौकरी की तरह है। हमारा काम पसंद किया गया तो प्रमोशन मिलता है। बस ऐसा ही इंडस्ट्री में।

     टीवी का तरीका लंबा इस वजह मैं दूर हूं

    टीवी का तरीका लंबा इस वजह मैं दूर हूं

    वेब ने सारे दरवाजे खोले हैं खासकर, कलाकार,निर्देशक और लेखकों के लिए। वेब ने ये नई चीजों को विस्तार देने के लिए जगह दी है।आज की तारीख में इतना सारा काम है एक्टर के लिए करने के लिए। मैंने अपने लिए कोई सीमा तय नहीं की है। टीवी करने में कोई समस्या नहीं है। टीवी का तरीका लंबा हो जाता है।

    आपने किसी शो के लिए एक साल के लिए हामी भर दी है तो आप उसके अलावा कोई दूसरा काम नहीं कर सकते। समय ही नहीं मिलता। वहीं दूसरी तरफ आप एक साल में तीन सीरीज आराम से कर लेते हैं। यही वजह है कि फिलहाल मैं टीवी से दूर हूं।

    English summary
    Exclusive Interview mirzapur 2 dimpy Harshita Gaur talk about her special connection with series
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