Exclusive Interview- 'बाबा साहब के संविधान की कदर, ना एक इंच इधर ना एक इंच उधर'- मनोज जोशी

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Exclusive Interview- मनोज जोशी.. एक ऐसा नाम जिन्होने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कई किरदार दिए हैं। लोग उनको पर्दे पर देखकर उनके अभिनय के दीवाने हो जाते हैं। पद्मश्री से सम्मानित हो चुके अभिनेता इस वक्त अपनी फिल्म 'द यूपी फाइल्स' को लेकर चर्चा में हैं। फिल्मीबीट से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होने इस फिल्म और अपने करियर को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं।

यहां पढिए इंटरव्यू के प्रमुख अंश:

Q. 'द यूपी फाइल्स' में आप अपने जीवन का पहला लीड रोल निभा रहे हैं, कैसा है ये अनुभव?

A. मैं एक चरित्र अभिनेता तो हूं ही, लेकिन इस फिल्म में एक सेंट्रल कैरेक्टर निभा रहा हूं और मेरे लिए बड़ा आनंद का विषय है। 26 जुलाई को फिल्म रिलीज हो रही है जिसको लेकर के उत्सुकता है। उम्मीद है कि लोगों को ये फिल्म भाएगी क्योंकि ये काफी अलग तरह की फिल्म है।

Q. 'द यूपी फाइल्स' फिल्म आपको कैसे मिली, किस तरह से संपर्क किया गया था?

A. इस फिल्म के निर्देशक हैं नीरज सहाय जी उन्होने मुझसे मुलाकात की और उन्होने फिल्म की कथा सुनाई। उन्होने कहा कि ये यूपी की कहानी है और आपका इसमें मुख्य किरदार है। ये सीएम का कैरेक्टर है जो निस्वार्थ भाव से काम करता है। एक बिगड़ा हुआ प्रदेश है, सत्ता होने के बाद भी इसके विकास नहीं हुआ है। जहां गुंडाराज चल रहा है जंगल राज चल रहा है, वो कि प्रकार से बिना किसी भेदभाव के बाबा साहब के संविधान को ध्यान में रखते हुए माफियाओं का उच्चाटन करते हैँ। किस प्रकार से वो गुंडाराज को खत्म करने का संकल्प लेकर उसको समाप्त कर देते हैं और कैसे प्रदेश चलाते हैँ। तो ये पूरा यूपी का बैकड्रॉप है, ये कहानी उन्होने सुनाई और ये मुझे बहुत अच्छी लगी और मैने तुरंत इसके लिए हां कर दिया।

Q. आपके लुक को देखकर एक बड़े नेता की झलक सामने आ रही है, इस पर आपका क्या कहना है?

A. मेरा ऐसा मानना है कि हर चीज का कोई ना कोई माध्यम होता है। जैसे 90 के दशक में सिर्फ दूरदर्शन था और उससे इंस्पायर होकर बहुत से चैनल आए। तो कुर्ता पैजामा पहनो, टोपी पहना.. उसके बजाय ये पोशाक ले लिया। तो ये सामान्य हो सकता है लेकिन हमको सिर्फ ये देखना है कि फिल्म की कहानी क्या है और फिल्म क्या कहना चाहती है। मुझे कुर्ता पैजामा पहनने और गुलाब का फूल लगाने के बजाय उन्होने मुझे ये पोशाक पहनाया, बस इतनी सी बात है।

Q. ये किरदार आपके लिए कितना चैलेंजिंग रहा, कैसे तैयारी की?

A. हां, एक तो क्या है कि बहुत ही सटीक और बहुत ही स्ट्रेट फॉरवर्ड, कि मुझे सत्ता में शपथ लेने के बाद किस प्रकार से प्रशासन और शासन इसको पैरलल लाइन में चलाना है और प्रदेश का विकास करना है। आजादी के बाद कितने प्रधानमंत्री हुए, कितने प्रधानमंत्री दिए उत्तर प्रदेश ने लेकिन फिर भी यूपी और बिहार का इंफ्राइंस्ट्रक्चरवाइज वैसा विकास नहीं है, ये क्यों नहीं हुआ? ये सवाल हमें अंतर्मुख करना है। ये विकास क्यों नहीं हुआ या नहीं होने दिया... सत्ता चलाने के लिए। एक सीएम इतनो सालों के बाद जब आता है और परिवादवाद चल रहा है, माफियावाद चल रहा है, प्रदेश की जो जनता है, जनता क्या चाहती है? उनको बेसिक सुविधाएं मिलें। तो एक मुख्यमंत्री कैसे आने के बाद अच्छा काम करता है, कैसे विकास की ओर ले जाता है। यही कहानी है और इसीलिए मुझे ये काफी चैलेंजिंग लगा और अच्छा लगा। इसीलिए मैने वो फिल्म की है और ये रोल बहुत ही अच्छी छाप छोड़ता है। ऐसी फिल्मों की आवश्यकता है इस वक्त। एक डायलॉग है कि, ''बाबा साहब के संविधान की कदर, ना एक इंच इधर ना एक इंच उधर।'' तो इस लाइन में सबकुछ आ जाता है। आपको फिल्म जबरदस्त लगेगी।

Q- आपने अपने अभिनय करियर की शुरुआत सरफरोश से की थी, कैसे मिली पहली फिल्म?

A. एक्चुअली जॉन मैथ्यू मैथन हैं जो फिर बाद में मेरे बहुत अच्छे मित्र बने। वो फिल्म में मेरे भाई बने थे और उन्होने ही मुझे ये रोल ऑफर किया था। मैने कहा, यार ये तो छोटा सा रोल है तो बोले नहीं अच्छा रोल है तुम करो। उस वक्त मैं थिएटर करता था और अच्छा चल रहा था। देशभक्ति पर आधारित फिल्म थी, उन्होने 4-5 साल रिसर्च करके फिल्म बनाई थी तो मुझे लगा इसको करना ही चाहिए। वो मेरे जीवन की पहली मेनस्ट्रीम फिल्म थी। वैसे 1990 में मैने फिल्म की थी और इसके बाद सीधे 1997 में इस फिल्म से मैने शुरुआत की। इसके बाद कारवां चलता गया और अबतक मेरी 175-176 फिल्में हो चुकी हैं।

Q. सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान.. आपने तीनों खान के साथ काम किया है, ज्यादा मजा किसके साथ आता है?

A. सभी के साथ काम करने में मजा आया। हम तो चरित्र अभिनेता हैं और चरित्र अभिनेता फिल्म का पिलर होता है। मैने तो अक्षय कुमार के साथ 11 फिल्में की हैं। आमिर के साथ मैने एक ही फिल्म की है, सलमान के साथ 2-3 फिल्में की हैं और शाहरुख खान के साथ 2 ही फिल्में की हैं। मैं मेरे काम को भगवान मानता हूं और आनंद लेता हूं मेरे काम, भले ही कोई भी हो सामने, कोशिश करता हूं कि मैं अपना शत प्रतिशत दूं उस रोल को।

Q. साल 2018 में जब आपको पद्मश्री से सम्मानित किया गया, तब से आपके जीवन में क्या बदलाव आया?

A. जब राष्ट्र आपको सम्मानित करता है.. एक कार्य के लिए, मेरे रंगमंच के कार्य के लिए। किसी भी कार्य के लिए जो पुरस्कार होता है, आपका काम देखकर, तो आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती आपके कार्य के प्रति, ऐसा मेरा मानना है। राष्ट्र मुझे क्या देगा ये मेरी सोच नहीं है, मैने राष्ट्र को क्या दिया मैं ये सोचता हूं।

Q. जो फिल्में रिलीज से पहले ही विवादों में आ जाती हैं, बतौर एक्टर आप इस चीज को कैसे देखते हैं?

A. इस वक्त एक चलन चल रहा है, फ्रॉड न्यूज और फेक न्यूज का। झूठ को कैसे सच में परिवर्तित करना है, ये एक ऑर्गनाइज्ड कार्यक्रम चल रहा है। देश के अंदर चल रहा है, देश के बाहर की शक्तियों से चल रहा है लेकिन ये चल रहा है, ये फैक्ट है। तो सोशल मीडिया पर आई हुई सारी चीजें सत्य ही होंगी या सत्य़ ही हैं तो ऐसा मानने की किसी को आवश्यकता नहीं है। जब तक हम किसी चीज को अपनी आंखों से नहीं देख लेते या समझते नहीं हैं तो इसको सत्य नहीं मान सकते। कुछ लोग नैरेटिव बनाने के लिए करते हैं, कि अरे ये फिल्म तो ऐसी है.. हो सकता है कुछ लोग कुछ लेकर भी ऐसा करते हों, उनका काम ही है ये। दर्शकों को और सोशल मीडिया यूज करने वाले को समझना चाहिए कि जो ये बोल रहा है वो कौन है, उसकी बात का वजन कितना है और वो कितना पढ़ा लिखा है? एक फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत लगती है। एक स्पॉटबॉय से लेकर एक्टर तक सबकी मेहनत होती है। मेहनत के बाद जब फिल्म तैयार होती है तो कुछ लोग नैरेटिव अपने आपसे बनाते हैं, ये अच्छी बात नहीं है।

Q. जाते जाते अगर आप अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर कुछ बताना चाहें...

A. मेरा एक प्रोजेक्ट अभी आ रहा है जिसका नाम है यूपी फाइल्स हैं, और भी प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी हम बाद में चर्चा करेंगे। लेकिन आपके माध्यम से मैं लोगों से विनती करता हूं कि, एक सीएम चाहता है कि मेरा राज्य विकास करे, मेरे राज्य का हर व्यक्ति सुखी रहे। उनको सारी योजनाओं का लाभ मिले। ऐसा मानने वाला, गुंडाओं और माफियाओं का उच्चाटन करने वाला, शासन प्रशासन को एक साथ चलाने वाला, ऐसा योग्य सीएम अगर आता है तो वो क्या काया पलट कर सकता है.. ये आपको फिल्म में देखने को मिलेगा। इसलिए आप फिल्म थिएटर में जाकर देखिए, अपने परिवार के साथ देखिए.. थैंक यू, जय हिंद, वंदे मातरम!

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