EXCLUSIVE: कब्ज़ा, साउथ सिनेमा और आने वाली फिल्मों पर बोले आनंद पंडित- 'सरकार 4, देसी बॉयज 2 पर काम शुरु है'

Anand Pandit Interview: फिल्म निर्माता आनंद पंडित ने लेटेस्ट रिलीज हुई 'कब्ज़ा' के साथ दक्षिण सिनेमा में कदम रखा है। उपेन्द्र, किच्चा सुदीप और श्रिया सरन स्टारर ये फिल्म 5 भाषाओं में 17 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। निर्माता ने कहा, जब राइटर- डायरेक्टर आर चंद्रू ने मुझे इसकी कहानी सुनाई तो मुझे लगा कि ये एक पैन इंडिया फिल्म हो सकती है और हमें इसे अलग अलग भाषा में लानी चाहिए। यहीं से फिल्म की शुरुआत हुई।
क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट को एक्सप्लोर कर रहे हैं दर्शक
बतौर निर्माता अपनी योजनाओं पर बात करते हुए आनंद पंडित कहते हैं, "एक स्टूडियो के तौर पर हमने फैसला किया कि हम अलग दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। ये इसीलिए क्योंकि लॉकडाउन के बाद ऑडियंस के टेस्ट में काफी बदलाव आया है। आज के समय में वो सिर्फ हिंदी या इंग्लिश भाषा के कंटेंट तक नहीं बंधे हुए हैं। वो अलग अलग क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट को और ओवरसीज के कंटेंट को भी एक्सप्लोर करना चाहते हैं, चाहे वो साउथ की फिल्में हों या कोरियन, स्पैनिश और चीनी। यही ट्रेंड देखते हुए हमने फैसला किया कि जब हिंदी फिल्मों के साथ साथ हम पंजाबी फिल्में और मराठी फिल्में कर ही रहे हैं तो साउथ फिल्में क्यों नहीं। इसी इरादे के साथ हमने नई शुरुआत की है। और साउथ की फिल्मों में भी हम मुख्य तौर पर पैन इंडिया फिल्में ही प्रोड्यूस करना चाहते हैं। कब्जा हमें वैसी ही एक फिल्म लगी, जो हमारे लिए परफेक्ट थी।"

साउथ की फिल्मों में आया है बदलाव
दक्षिण सिनेमा पर बात करते हुए निर्माता ने आगे कहा, "साउथ की फिल्मों पिछले कुछ सालों में बहुत बदलाव आया है क्योंकि वो अपने कंटेंट को लेकर बहुत जुनूनी और समर्पित होते हैं। वो एक्सपेरिमेंट के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इसके साथ ही एक बड़ी बात है कि वो एक्टर्स को भारी भरकम फीस देने के बजाए, अपने राइटिंग स्किल्स को लेकर ज्यादा कॉफिडेंट रहते हैं। उनकी फिल्मों में एक लोकल फ्लेवर होता है, एक ओरिजनैलिटी होती है। यही वजह है कि उनकी फिल्मों में बदलाव दिखा है और लोगों को ये पसंद आ रहा है।"
बॉलीवुड vs साउथ सिनेमा पर बोले निर्माता
बीते कुछ समय में लोगों द्वारा हिदीं फिल्म इंडस्ट्री की लगातार साउथ की फिल्म इंडस्ट्री से तुलना की जा रही है। इस बारे में निर्माता का कहना है कि ये तुलना होना लाजिमी है। आनंद पंडित कहते हैं, "लोग अपने दो बच्चों के बीच भी तुलना करते हैं। तो इससे हम बच नहीं सकते। तुलना यदि constructive है, तो बहुत ही अच्छा है। लेकिन यदि सिर्फ नीचा दिखाने के लिए है, तो गलत है। एक समय पर हम हॉलीवुड की फिल्मों से भी हिंदी फिल्मों को कंपेयर करते थे। ये लाजिमी है। लेकिन कुल मिलाकर बात यही है कि फिल्मों को लेकर आखिरी फैसला हमेशा ऑडियंस के हाथ में होता है। उन्हें फिल्म अच्छी लगी तो अच्छी है, नहीं अच्छी लगी तो नहीं है.. सिंपल।"

दो भाग में बंट गई है ऑडियंस
आनंद पंडित मानते हैं कि लॉकडाउन के बाद से ऑडियंस दो भाग में बंट गई है। ओटीटी पर लोग थोड़ी edgy फिल्में देखना पसंद करते हैं। लेकिन जब बात थियेटर की आती वो लार्जर देन लाइफ फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं या ऐसी फिल्में जिससे उन्हें कुछ एक्सपीरियेंस मिलना चाहिए। तभी वो थियेटर तक जाएंगे। आज के जमाने में कंटेंट इज किंग। कंटेंट से ऊपर कुछ नहीं है। यदि आपकी फिल्म का कंटेंट अच्छा है तो लोग जरूर देंखेगे। आपका कंटेंट अच्छा है, लेकिन प्रोडक्शन वैल्यू कम है.. तो भी चलेगा। जैसे हमारी फिल्म थी दृश्यम। उसमें कोई बड़ा सेट, गाड़ियां, हेलीकॉप्टर.. ऐसा कुछ नहीं था। वो सिंपल कहानी है, लेकिन बहुत अच्छी तरह से कही गई है इसीलिए लोग उससे कनेक्ट हुए।

सरकार 4, देसी बॉयज 2, बिग बुल 2 पर काम शुरु है
अपनी आने वाली फिल्मों पर बात करते हुए निर्माता ने बताया कि उनके पास काफी लंबी स्लेट है। उन्होंने कहा, "फिलहाल हमारे पास मराठी और गुजराती में काफी फिल्में हैं। पंजाबी में हम शुरु कर रहे हैं। हिंदी में सरकार 4, देसी बॉयज 2, बिग बुल 2 और एक रीमेक है.. इन चारों की राइटिंग पर काम शुरु कर दिया गया है। राइटिंग खत्म होने के बाद ही कास्टिंग फाइनल की जाएगी। इसके अलावा रणदीप हुड्डा स्टारर वीर सावरकर आने वाली है, जो हम अगस्त में रिलीज करेंगे।"


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