EXCLUSIVE INTERVIEW:'मुझे फिल्मों में सिर्फ आई कैंडी नहीं बनना, मैं परफॉर्म करना चाहती हूं'-आकांक्षा रंजन कपूर

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Akansha Ranjan Kapoor: फिल्म 'मोनिका, ओ माय डार्लिंग' में अहम किरदार निभाने वाली अभिनेत्री आकांक्षा रंजन कपूर फिल्म की सफलता को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वासन बाला के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आकांक्षा ने निक्की अधिकारी की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके साथ राजकुमार राव, राधिका आप्टे, हुमा कुरैशी और सिकंदर खेर जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्मीबीट के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान अभिनेत्री ने अपने किरदारों के चुनाव और करियर पर खुलकर बातें कीं। साथ ही उन्होंने डायरेक्टर्स की लंबी विश लिस्ट शेयर की है, जिनके साथ वो भविष्य में काम करना चाहती हैं।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. 'मोनिका ओ माय डार्लिंग' की सफलता का जश्न कैसे मना रही हैं?

Q. 'मोनिका ओ माय डार्लिंग' की सफलता का जश्न कैसे मना रही हैं?

A. बहुत एक्साइटेड हूं, लोगों का प्यार पाकर अभिभूत हूं.. क्योंकि सच कहूं तो मैंने नहीं सोचा था कि रिस्पॉस इतना जबरदस्त होगा। हम सबने सोचा था कि फिल्म या तो क्रिटिक्स को पसंद आएगी या आडियंस को। लेकिन हर तरफ से इसे इतना प्यार मिला है, जो कि मेरे लिए और पूरी टीम के लिए बहुत एक्साइटिंग है।

Q. वासन बाला की दुनिया में काम करने का अनुभव कैसा रहा? उनके काम करने की प्रोसेस पर कुछ शेयर करना चाहेंगी?

A. वासन बाला के साथ मैं ये दूसरी बार काम कर रही हूं। लिहाजा कहीं ना कहीं मैं उनकी दुनिया को जानती हूं, समझती हूं। मैं उनके प्रोसेस को समझती हूं इसीलिए इस बार मैं काफी तैयार थी। उनके काम का तरीका बहुत ही अलग है। मैंने अभी करियर में ज्यादा काम नहीं किया है, लेकिन जितने भी डायरेक्टर्स के साथ किया है, वासन सर उनमें सबसे अलग हैं। मैं खुद को लकी महसूस करती हूं कि उन्होंने सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दोबारा भी अपनी फिल्म के लिए मुझे चुना।

और उनके प्रोसेस के बारे में बात करुं तो वो सेट पर बहुत ईजी माहौल बनाकर रखना पसंद करते हैं। मैंने दो फिल्मों के दौरान कभी भी उनको गुस्से में नहीं देखा है। सेट पर जब भी वो मेरे हाथों में स्क्रिप्ट देख लेते थे तो बोलते थे, इसे फेंक दे। फिर उनके दिमाग में कुछ और ही पक रहा होता था। फिर हम कुछ नया ट्राई करते थे। उनके साथ काम करके मैंने spontaneous एक्टिंग सीखी है। पहले मैं हमेशा बहुत तैयारी करना पसंद थी। लेकिन वासन सर के साथ ऐसा नहीं है।

Q. स्क्रिप्ट की या अपने किरदार की किस बात ने आकर्षित किया था?

Q. स्क्रिप्ट की या अपने किरदार की किस बात ने आकर्षित किया था?

A. मुझे तो दो बार स्क्रिप्ट पढ़ना पड़ा क्योंकि पहली बार में मुझे समझ ही नहीं आया था। मैं लगातार यही सोच रही थी कि पेपर में जो लिखा है, वो स्क्रीन पर अच्छे से ट्रांसलेट हो पाएगा या नहीं। लेकिन हां, काफी हटके था इसीलिए मुझे लगा कि ये तो करना है। किरदारों की बात करूं तो मुझे लगता है फिल्म में सबके ग्रे कैरेक्टर इतने बेहतरीन तरीके से दिख पाए क्योंकि वो जादू राइटिंग में था। स्क्रिप्ट बहुत मजबूती के साथ लिखा गया था। मैं पूरा क्रेडिट राइटर्स को देना चाहूंगी। जो उन्होंने लिखा, मैंने उनके लिखे हर शब्द को सिर्फ फॉलो किया है।

Q. फिल्म में आपके राजकुमार राव, राधिका आप्टे, हुमा कुरैशी जैसे कलाकार भी हैं। सेट पर कैसा माहौल रहता था?

A. मैं राधिका आप्टे की बहुत बड़ी फैन हूं और सेट पर भी मैं फैन गर्ल ही थी। हुमा के साथ मेरे सीन नहीं थे। और राजकुमार तो बहुत ही शानदार इंसान है। उनके साथ मैं बहुत ही कंफर्टबेल थी। इन सबके साथ काम करना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा था। उन सबको देखकर, उनके आस पास रहकर भी मैंने बहुत कुछ सीखा है, जैसे किस तरह वो डायलॉग्स को अप्रोच करते हैं, किरदार को पकड़ने का उनका क्या प्रोसेस है।

Q. लेकिन मल्टीस्टारर फिल्मों में खुद की जगह बनाने की कोई सोच होती है?

Q. लेकिन मल्टीस्टारर फिल्मों में खुद की जगह बनाने की कोई सोच होती है?

A. मल्टीस्टारर स्क्रिप्ट को अप्रोच करने के दो ही तरीके होते हैं। या तो मैं ये सोचूं कि क्या इतने सारे एक्टर्स में कोई मुझे नोटिस करेगा! या मैं इसे पॉजिटिव तरीके से लूं कि मुझे इतने बेहतरीन एक्टर्स के साथ काम करने का मौका मिल रहा है, कैसे मैं इस मौके से कुछ नया सीखूं। जब आप अच्छे एक्टर्स के साथ काम करते हो, तो आपका भी परफॉर्मेंस ऊपर बढ़ता है। और मुझे खुद के टैलेंट पर भरोसा है कि यदि मुझे मौका मिले तो मैं कुछ भी कर सकती हूं।

Q. आप कंपिटिटिव हैं?

A. कंपिटिटिव इस सेंस में हूं कि मैं चाहती हूं कि लोग मुझे एक अच्छे एक्टर के तौर पर जानें। लोग मुझे गंभीरता से लें।

Q. स्क्रिप्ट के चुनाव के वक्त किन बातों का ध्यान रखती हैं?

Q. स्क्रिप्ट के चुनाव के वक्त किन बातों का ध्यान रखती हैं?

A. मुझे जो करना है, मैं उस बारे में बहुत क्लीयर हूं। मुझे पता है कि मुझे आईकैंडी नहीं बनना है, मुझे सिर्फ डांस- गाना नहीं करना है। मुझे परफॉर्मेंस करना है, इसीलिए उस रास्ते में मुझे जो कुछ मिल रहा है, मैं वो कर रही हूं। अभी मैं अपने करियर की शुरुआत में हूं इसीलिए मुझे ऐसी कहानियां चुननी है, जहां मैं लोगों को दिखा सकूं कि मैं अभिनय कर सकती हूं। कुछ वक्त के बाद शायद मैं रोल्स के साथ एक्सीपेरिमेंट कर सकती हूं।

Q. ओटीटी ने आपको बहुत पहचान दी है। एंटरटेनमेंट के इस माध्यम को किस तरह से देखती हैं?

A. मुझे नहीं लगता कि ओटीटी नहीं होता तो मुझे अभी तक ब्रेक मिला होता। अभी भी मैं शायद कहीं स्क्रीन टेस्ट दे रही होती। ओटीटी की वजह से कितने ही एक्टर्स, राइटर्स, टेक्नीशियंस को मौका मिला है और बराबर का मौका मिला है। ये बहुत अच्छी बात है।

Q. एक्टर बनने की चाहत मन में सबसे पहले कब आई थी?

Q. एक्टर बनने की चाहत मन में सबसे पहले कब आई थी?

A. हमेशा से मुझमें एक्टिंग का एक कीड़ा था। स्कूल में ड्रामा करती थी, फिर इंटर- कॉलेज ड्रामा भी किया। मैं नाटकों को डायरेक्ट भी करती थी। तो हमेशा मुझमें वो परफॉर्मेंस करने की चाहत थी। इसीलिए कॉलेज के बाद मैं सीधा फिल्म स्कूल गई। मुझे कुछ और करना ही नहीं था।

Q. बतौर कलाकार फेवरिट डायरेक्टर्स की कोई विश लिस्ट है?

A. (हंसते हुए) हां, बिल्कु। अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवाने, हंसल मेहता, अनुभव सिन्हा, अभिषेक चौबे इन सबके साथ मुझे काम करना है।

Q. आपकी बेस्ट फ्रेंड आलिया भट्ट बीते दिनों मां बनी हैं। इस नए फेज के बारे में कुछ कहना चाहेंगी?

A. मैं खुश हूं, बहुत एक्साइटेड हूं। लेकिन इस बारे में फिलहाल ज्यादा बात नहीं कर पाउंगी।

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