Exclusive Interview: ऑस्कर में पहुंची 'चंपारण मटन', एक्ट्रेस फ़लक ख़ान ने कहा- '7 सालों के स्ट्रगल का फल है'

Falak Khan Interview: बिहार के मुजफ्फरपुर से आंखों में सपने सजाए, मुंबई आई अभिनेत्री फलक खान की फिल्म 'चंपारण मटन' इन दिनों सुर्खियों में है। ये शॉर्ट फिल्म ऑस्कर के छात्र एकेडमी अवार्ड के सेमीफाइनल दौर में पहुंच गई है और अब दुनिया भर के 16 फिल्मों से मुकाबला करेगी। फलक ने इस मौके पर पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'यह हम सभी की कड़ी मेहनत का नतीजा है।'
रंजन कुमार द्वारा निर्देशित, चंदन रॉय और फलक खान अभिनीत 'चंपारण मटन' एक मध्यमवर्गीय परिवार और लॉकडाउन के दौरान उनके सामने आने वाली समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जब कई लोगों की नौकरियां चली गईं। यह फिल्म ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित है।
ऑस्कर तक पहुंचना सपने सच होने जैसा है
फिल्म के ऑस्कर पहुंचने तक की सफर के बारे में बताते हुए फलक खान ने फिल्मीबीट से कहा, "मैं बहुत एक्साइटेड हूं। बिहार से मुंबई आने का और फिर यहां तक का जो सफर है, लगता है कि ईश्वर ने उसी का फल अब मुझे दिया है। ऑस्कर तक पहुंचने की ख्वाहिश हर कलाकार को होती है। फिल्म इंडस्ट्री में हर किसी की लाइफटाइम ड्रीम होती है ये। और अपने करियर में हमें इतनी शुरुआत में ये मौका मिल रहा है, यह उम्मीद से परे था। पूरे देश से हमें जो प्यार और इज्जत मिल रही है, सब कुछ मुझे किसी सपने की तरह लगता है।"
अभिनेत्री ने बताया कि 'चंपारण मटन' की शूटिंग पुणे से आगे बारामती गांव में हुई है। उन्होंने कहा, "चंदन और मै, लगभग 12- 15 दिनों तक हम उसी किरदार में ढ़ले रहे, हमने उस किरदार को जीया है। शायद इसीलिए लोगों को हमारी केमिस्ट्री इतनी पसंद आई है।"
मनोज बाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जैसी कलाकार बनना है
इससे पहले फलक खान ने 'सराय' नाम की शॉर्ट फिल्म में भी काम किया है। वो कहती हैं, "मेरी हमेशा से ख्वाहिश है कि लोग मुझे एक परफॉर्मर के रूप में जानें। स्टार और सुपरस्टार बनने की चाह तो सभी की होती है। मेरी भी है। लेकिन सिर्फ एक हीरोइन नहीं, बल्कि एक परफॉर्मर के रूप में मैं अपनी पहचान बनाना चाहती हूं। जैसे पकंज त्रिपाठी को ले लें, या मनोज बाजपेयी की बात करें, तो एक कलाकार के तौर पर उनके लिए कितनी इज्जत है हमारे मन में। तो मैं भी उसी श्रेणी में शामिल होना चाहती हूं।"
जानती हूं कोई बड़ा डायरेक्टर बॉलीवुड में लॉन्च नहीं करेगा
मुंबई में लगभग 6-7 सालों तक संघर्ष करने के बाद, फलक अब उम्मीद करती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री उन्हें कुछ बड़े मौके देगी। वो कहती हैं, "मैं भी समझती हूं कि मुजफ्फरपुर से आई एक लड़की को कोई बड़ा डायरेक्टर सीधे लॉन्च नहीं करेगा। मेरी प्रोफाइल कितनी भी लंबी हो, तो भी शायद मुझे मौका नहीं मिले। लेकिन चूंकि अब मेरी एक फिल्म इंटरनेशनल स्तर पर पहचान बना रही है, तो अब मेरे सामने कुछ बड़े मौके आ रहे हैं। और मुझे लगता है कि अब मुझे मौके मिलने भी चाहिए क्योंकि मैंने खुद को प्रूव किया है। हर एक्टर का सपना मेनस्ट्रीम सिनेमा करना ही होता है। मैं सिर्फ अच्छे स्क्रिप्ट के इंतजार में हूं।"
कई शोज में फ्री में काम किया है, कई बार रिजेक्ट हुई
फलक बताती हैं कि बचपन में शाहरुख खान की फिल्मों का उन पर बड़ा प्रभाव रहा था। अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरा फिल्मों में आना बहुत मुश्किल था। मेरी फैमिली की पृष्ठभूमि एकडेमिक रही है। मैं भी पढ़ने में काफी अच्छी थी इसीलिए सबको मुझसे उम्मीदें भी काफी थी। जैसे जैसे मैं बड़ी हुई, टीवी, फिल्में, शाहरुख खान, इन सबका मेरे ऊपर काफी प्रभाव रहा। धीरे धीरे मुझे अहसास हुआ कि मेरी अभिनय में दिलचस्पी है और मैं इसी में अपना करियर बनाना चाहती हूं। जाहिर है घर पर सब तैयार नहीं थे, फिर मैंने पहले इंजीनियरिंग की। उसके बाद मैं एमबीए करने के लिए मुंबई आ गई क्योंकि मुझे कैसे भी करके यहां पहुंचना था। फिर यहां से मेरे संघर्ष का दूसरा दौर शुरु हुआ। यहां मैं किसी को भी नहीं जानती थी। लेकिन रास्ते में कुछ लोग अच्छे मिलते गए, तो काम मिलता गया।"
फलक कहती हैं, "मैं 2016 में मुंबई आई थी। धीरे धीरे पता चला कि ऑडिशन कहां होते हैं। कई बार रिजेक्शन मिले। कई बार बड़ी फिल्मों में छोटे रोल के लिए साइन किया गया, लेकिन बाद में वो रोल कट छंटकर ना के बराबर रह गया। शुरुआत में मैंने कई शोज में फ्री में काम किया क्योंकि मुझे अपनी प्रोफाइल बनानी थी। धीरे धीरे थोड़ा बहुत काम मिलने लगा। कुछ सीरियल और कुछ फिल्मों में काम भी किया। इसी बीच 'चंपारण मटन' करने का मौका मिला। ये फिल्म कई फेस्टिवल्स में गई और बहुत प्यार पा रही है।"


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