अमिताभ ने अगर ओवरशैडो किया तो भी भाग्यशाली हूं-धनुष

By Sonika

रांझना में एक दीवाने के किरदार में साउथ के सुपरस्टार धनुष ने दर्शकों को मोह लिया। खासतौर पर फिल्म के अंत में जब धनुष अपनी आंखें बंद करते हैं और उनके जो संवाद सुनाई देते हैं वो दर्शकों को इस कदर इमोशल कर गये कि लोगों की आंखें नम हो आईं। एक बार फिर से धनुष सिल्वर स्क्रीन पर नज़र आने वाले हैं लेकिन इस बार बिल्कुल ही अलग अंदाज में। शमिताभ में धनुष अमिताभ बच्चन के साथ नज़र आएंगे और फिल्म में उनका किरदार बेहद रोमांचक व खूबसूरत है। शमिताभ के दौरान धनुष से हुई बातचीत के कुछ अंश-

अमिताभ बच्चन जी के साथ फिल्म करने के दौरान कभी इस बात का डर नहीं लगा कि उनके किरदार के आगे कहीं आपका किरदार फीका ना पड़ जाए?

अमित जी के साथ काम करना बेहतरीन अनुभव था। जब आप फिल्म देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि फिल्म की कहानी में दोनों किरदारों को बराबर का महत्व दिया गया है। कोई भी स्टार इस किरदार को करना चाहेगा। अमित जी के साथ काम करना चाहेगा। अगर फिल्म में मैं अमित जी के किरदार द्वारा ओवर शेडो भी हुआ हूं तो भी मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं। मैं अपनी खुशी को शब्दों में जाहिर भी नहीं कर सकता।

Dhanush feels it's blessing to work with Amitabh Bachchan

जब भी आप किसी अभिनेता के साथ काम करते हैं तो कुछ ना कुछ सीखते हैं। अमित जी तो खुद में एक इंस्टीट्यूशन हैं। उनसे क्या सीखा आपने?

मैंने बहुत कुछ सीखा है अमित जी से। अगर एक चीज हो तो वो ये है कि अमित जी अपनी हर फिल्म को अपनी पहली फिल्म की ही तरह लेते हैं। हर एक सीन, हर एक शॉट से जुड़ी बारीकियों पर ध्यान देते हैं। ये एक बात है जो मैंने अमिताभ जी से सीखी है। चीजें जितनी भी छोटी वो सबको महत्व देते हैं।

राझना में आपने एक प्रेमी का किरदार निभाया था, शमिताभ में बिल्कुल अलग किरदार। इतने अलग अलग तरह के किरदार निभाकर क्या साबित करना चाहते हैं आप?

रांझना को बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन रिस्पॉंस मिला, साथ ही क्रिटिक्स की तरफ से भी फिल्म को काफी सराहा गया। इस बात की खुशी है। लेकिन मैं कुछ भी नहीं करना चाहता। मेरे पास कई सारी कहानियां आती हैं लेकिन जब कहानी मुझे पसंद आती है तभीमैं उसे करने के लिए हां करता हूं। बाल्की सर ने जब मुझे इस फिल्म के लिए फोन किया तो मैं उनसे मिलने जाते समय यही सोच रहा था कि भगवान ये कहानी मेरे लायक हो। क्योंकि बाल्की जी एक बेहतरीन निर्देशक हैं और मुझे उनके साथ काम करने का बेहद मन था। आखिरकार मैं जब बाल्की सर से मिला तो एक घंटे के अंदर मैंने ये फैसला कर लिया कि मुझे ये फिल्म करनी है। इस तरह से शमिताभ में मेरी एंट्री हुई। ऐसा नहीं है कि मैं कुछ साबित करना चाहता हूं। बस जो पसंद आता है वही करता हूं।

शमिताभ फिल्म में सबसे मुश्किल कौन सा सीन था?

शमिताभ का हर एक सीन बेहद मुश्किल व चैलेंजिंग था। मैने अब तक करीब 28-29 फिल्में की हैं और उनमें से सबसे ज्यादा चैलेंजिंग शमिताभ रही है। दिमागी तौर पर इस किरदार को निभाने में काफी मुश्किलें सहनी पड़ीं।

बॉलीवुड में एंट्री करने के बाद भाषा को लेकर कितनी मुश्किलें सहनी पड़ीं और अब आप हिंदी में कितना सहज हैं?

पहली फिल्म के दौरान मुझे भाषा में काफी मुश्किल हुई, दूसरी फिल्म में थोड़ा बेहतर हुआ। अब अगर आगे भगवान ने मुझे और फिल्में करने का मौका दिया तो मैं और भी बेहतर हो जाउंगा। मैं अब हिंदी समझ लेता हूं, हालांकि थोड़ी बहुत मुश्किल होती है। पर मैं अब लोगों के सामने बिना झिझक के हिंदी बोलता हूं और वो मुझे बीच बीच में टोंकटे भी हैं। तो उम्मीद है कि आने वाले समय में मैं और बेहतर हिंदी बोल पाउंगा। मुझे उम्मीद है कि आने वाली दो फिल्मों के बाद मैं हिंदी में इंटरव्यू देना शुरु कर दूंगा।

शमिताभ के सेट पर जाने से पहले किसी तरह की कोई खास तैयारी की थी, क्योंकि पहली बार आप अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करने जा रहे थे?

शमिताभ के सेट पर जाने से पहले मैंने ये फैसला कर लिया था कि मैं वैसे ही काम करुंगा जैसे कि हमेशा करता आया हूं। कुछ भी अलग हटकर नहीं करुंगा। पहले भी मैं सिनेमा के दिग्गजों के साथ काम कर चुका हूं और अब अमिताभ बच्चन के साथ काम कर रहा हूं। तो कुछ भी बनावटी करने की जरुरत नहीं थी। मुझसे ज्यादा मुझे कंफरटेबल महसूस कराया अमित जी ने। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि मैं किसी भी पल उनके किरदार या उनके अभिनय के आगे इग्नोर ना महसूस करने लगूं। उन्होंने बहुत इज्जत दी, प्यार दिया और जिसकी वजह से मैं काफी कंफरटेबल महसूस करने लगा।

कोलावरी डी को अपने करियर के लिए कितना महत्वपूर्ण मानते हैं आप?

मैं एक अभिनेता हूं। मुझे गाना गाना नहीं आता। ये एक हादसा था जो मेरे साथ हुआ, मैं इस बात से खुश हूं कि ये मेरे साथ ही हुआ, इस हादसे ने मुझें कहां से कहां पहुचा दिया। अब चार साल बाद भी ये मुझे नहीं छोड़ रहा है। लोग आज भी मुझसे कोलावरी गाने को कहते हैं। मेरे लिए हिंदी फिल्मों में गाना गाना या ना गाना उतना महत्व नहीं रखता। इसने मेरे करियर पर कुछ खास प्रभाव नहीं डाला लेकिन मेरी शोहरत में जरुर इसकी वजह से काफी इजाफा हुआ है।

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