बड़े पर्दे पर फिर लौट रहे फारुख़

By Super

आर्ट फिल्मों के साथ कमर्शियल फिल्म और उनमें भी विशेष रूप से कॉमेडी फिल्मों में फारूक शेख ने अपनी अच्छी पहचान बनाई है। उनकी हर फिल्म को दर्शकों ने दिल से सराहा है यह शायद किसी भी कलाकार के लिए गर्व की बात हो। फिलहाल ग्यारह साल बाद एक बार फिर दर्शकों को अपनी कॉमेडी से गुदगुदाने फारूक 'सास बहू और सेंसेक्स" के माध्यम से बडे पर्दे पर नज़र आनेवाले हैं।

“सास बहू और सेंसेक्स" के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे ?

यह फिल्म उन औरतों की कहानी है जो सेंसेक्स के बारे में जानने के लिए अपने घर से निकल पड़ती हैं और मुझसे आकर मिलती हैं। इस फिल्म में मैं एक ईमानदार शेयर ब्रोकर फिरोज़ सेठना की भूमिका निभा रहा हूं। वह अपने काम में बहुत अच्छा है मगर औरतों से काफी चिढ़ता है।

यह भी कह सकते हैं कि तबियत का थोड़ा चिड़चिड़ा है। जहां एक औरत से उसे इतनी चिढ़ है वहीं जब ढेर सारी औरतों का झुंड उस पर टूट पड़ता है तो वह बौखला जाता है मगर फिर भी वह उन्हें सलाह सही और अच्छी देता है। यह फिल्म का एक भाग है फिल्म का दुसरा भाग है कि वह औरतें अपने परिवार में किस तरह से रहती हैं।

1997 में फिल्म 'मोहब्बत" के बाद अब आप नज़र आ रहे हैं। इतने लंबे गैप की वजह ?

देखिए मैं काफी सुस्त तबियत का आदमी हूं साथ ही बहुत अधिक काम से मुझे उलझन होती है। इसकी एक वजह तो यह कि जो काम आप करते हैं उसे करने में आप कितना इंजॉय करते हैं, साथ ही दुसरों का कितना मनोरंजन करते हैं। अगर इतनी मेहनत के बाद भी आप दर्शकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सकें तो इतने मेहनत का फायदा क्या।

यह तो वही बात हुई कि आप किसी के पैरों में अपना खून बहा दें और वह शख्स कहे कि अरे यार जूते मत खराब करो। दर्शक पैसे देकर फिल्म देखने आता है तो उसे पूरा हक है कि वह उसे बकवास कहे। इसलिए ज़रूरी यह है कि काम करें तो अच्छा करें और अच्छे लोगों के साथ काम करें। साथ ही अधिकता से दर्शक ऊब जाते हैं इसलिए दर्शकों को ऊबाने की बजाय मैं क्वांटिटी से अधिक क्वालिटी में विश्वास करता हूं।

इस फिल्म में आपको क्या खास लगा जिसके लिए आपने हां कहा ?

उसकी वजह है सही समय, यूनिट और निर्देशिका शोना। यह वही यूनिट है जिसके साथ मैंने तीस साल पहले 'चश्मे बद्दूर" की थी। साथ ही शोना को मैं काफी लंबे समय से जानता हूं। मुझे दुख है कि उसकी पहली फिल्म में मैं उसके साथ काम नहीं कर पाया मगर इस फिल्म में मुझे अच्छा मौका मिला।

निर्देशिका शोना के बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

दरअसल आपकी और आपके बाद की जो पीढ़ी है वह काफी महत्वाकांक्षी और योजनाबद्ध पीढ़ी है। यह बात हममें नहीं थी और हमसे पहले वालों में तो और भी नहीं थी। इसकी एक वजह यह भी है कि आज की पीढी को ढेर सारी सुविधाएं मिली हैं और वह उनका पूरा फायदा उठाना जानते हैं।

शोना एक बात बहुत अच्छी निर्देशिका है, जो पहला कारण थी इस फिल्म के लिए हां कहने की। उसके कहानी कहने का अंदाज़ बहुत बढिया हैं। अपनी फिल्म के बारे में उन्हें पूरी जानकारी है।

मासूमी का कहना है कि इस फिल्म के मुख्य कलाकार आप हैं ?

ऐसी कोई बात नही हैं। यह उसने दयालुता के भाव में कहा होगा। इस फिल्म में सभी मुख्य कलाकार है। दरअसल यह ऐसा ही है कि एक दुसरे का हाथ पकड़कर साथ चलें। सभी की कोशिश से यह फिल्म अच्छी बनी है।

दर्शकों ने आपकी कई बेहतरीन फिल्में देखी हैं। क्या यह फिल्म उनमें से एक होगी ? देखिए यह मैं नहीं बता सकता मगर हां इतना ज़रूर कह सकता हूं कि यह फिल्म दर्शकों के लिए आनंददायक, देखनेयोग्य और नॉन वल्गर साबित होगी। यह मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं क्योंकि यही फिल्म का सकारात्मक पहलू है।
आजकल की कई कॉमेडी फिल्मों में जो कॉमेडी दिखाई जाती है उनसे मैं ज़रा भी खुश नहीं हूं।

आज अधिकतर बेहतरीन कलाकार महज़ पैंसों के लिए काम कर रहे हैं। आपके लिए पैसे की कितनी अहमियत है ?

मेरे लिए नहीं हां मेरे बैंकर के लिए मेरे पैंसों की बहुत अहमियत है। मैं जब सौ रूपए कमाता था तब भी बहुत खुश था आज लाखों कमा रहा हूं तब भी खुश हूं। मुझे लगता है ज़िन्दगी के अनमोल क्षणों को स्टूडिओ की अंधेरी कोठियों में खर्च करने के बजाय ज़िन्दगी के उन लम्हात का मज़ा उठाया जाए जो आपके ज़िन्दगी में दुबारा नहीं आएंगे।

जहां तक दुसरे कलाकारों की बात है तो यह उनका अपना शौक है। अगर ज़िन्दगी के पच्चीस साल गंवाने के बाद अपने बैंक में करोड़ों रूपए देखकर उन्हें खुशी मिलती है तो यह भी अच्छी बात है। हर चीज़ प्राइस टैग के साथ आती है मगर ज़रूरी यह है कि उसकी किमत सही हो। अगर सही कीमत में सही चीज़ मिलती है तो ज़रूर लीजिए।

आप आर्ट के साथ कमर्शियल फिल्मों के भी बेहतरीन कलाकार माने गए हैं। आज हर तरह की फिल्मों का दौर है आप स्वयं को किस जॉनर के लिए बेस्ट मानते हैं ?

मुझे किसी भी तरह की फिल्मों में काम करने से कोई परहेज़ नहीं है बशर्ते मेरा किरदार अच्छा हो।

इस तरह मुझे एनिमेशन फिल्में करने में भी कोई परेशानी नहीं है। अब जहां तक कमर्शियल फिल्मों की बात है तो हर फिल्म किसी ना किसी अंदाज़ में कमर्शियल होती है। सत्यजीत साहब ने कभी थियेटर के बाहर खड़े होकर दर्शकों से यह नहीं कहा कि आइए मुफ्त में मेरी फिल्म देखिए।

हर फिल्म में कमोबेश वही चीज़ें होती हैं बस जंचने और सहज होने की बात है। मुझे लगता है अब कोई खास फर्क रहा नहीं है। सभी हर जगह काम कर रहे हैं। साथ ही दर्शक भी आज समझदार हो गए है।

आज के सिनेमा के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे ?

आज के सिनेमा के बारे में मैं यही कहना चाहूंगा कि आज हर तरह से बॉलीवुड समृद्ध है फिर वह चाहे तकनीकि क्षेत्र हो, टैलेंट हो या फिर एक्सपोज़र हो। हां एक चीज़ जिसमें हम सबसे अधिक मार खाते है, वह है लेखन। यह ऐसा क्षेत्र है जिस पर वाकई बहुत मेहनत करने की ज़रूरत है।

ग्यारह साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी हो रही है तो छोटे पर्दे पर कब तक वापसी होगी ?

अगले साल तक कुछ और करने का इरादा नहीं है सो अभी यह बता पाना थोड़ा मुश्किल होगा।

अपने समय के बेस्ट रिएलिटी शो 'जीना इसी का नाम है" के साथ आप भविष्य में दुबारा नज़र आएंगे ?

अगर 'ज़ी" और 'एन डि टी वी", यह दोनों चैनल आपस में कोई समझौता करें तो मुमकिन है। उसके बाद भी वह दोनों मेरे पास आए तो देखा जाएगा।

इन दिनों रिएलिटी शो का काफी बोलबाला है। उसमें कभी जज या होस्ट के तौर पर नज़र आने का कोई इरादा है ?

देखिए रिएलिटी शो तो महज़ नाम है, उसमें सचमुच रिएलिटी कितनी है यह तो खुदा जाने। सभी की तरह मुझे भी कई ऑफर आए मगर मुझे वह खास जंचे नहीं।

पहले फिल्में कम बनती थी मगर अच्छी बनती थी आज फिल्में बहुत बनती हैं मगर कोई भी हिट नहीं हो पाती। क्या आप मानते हैं कि क्वांटिटी के चक्कर में क्वालिटी का ह्रास हो रहा है ?

यह ज़िन्दगी की सबसे बड़ी सच्चाई है। हर चीज़ की अधिकता से यही होता है जो आजकल फिल्मों में हो रहा है। जैसे कि मैं पहले भी कह चुका हूं लोग कहानी पर काम नहीं कर रहे हैं। पहले कहानी को लेकर महीनों या वर्षों तक लोग बैठते थे और उसके बाद शूटिंग शुरू होती थी। मगर आज आलम यह है कि कहानी सबसे अधिक गौण हो गई है।

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