मेरा पुरस्कार दर्शक बनें: प्रीती जिंटा

प्रश्न - लगभग डेढ साल बाद आपकी लगातार तीन फिल्में रिलीज़ होनेवाली हैं ?
उत्तर - जी हां। 'हीरोस" के साथ इस साल मेरी दो और फिल्में रिलीज़ होनेवाली हैं। दीवाली में 'हीरोस" के बाद दीपा मेहता की 'हैवन ऑन अर्थ" और जानू बरुआ की 'हर पल" आएगी। इन तीनों फिल्मों में 'हीरोस" और 'हर पल" पूरी तरह से कमर्शियल फिल्म है मगर 'हैवन ऑन अर्थ" पूरी तरह से रिएलिस्टिक सिनेमा है। यह घरेलू हिंसा पर बेस्ड है। 'हीरोस" और 'हैवन ऑन अर्थ" दोनों में मैं पंजाबी लडकी का किरदार निभा रही हूं। यह दोनों किरदार एक महिला के दो रूप की तरह है। एक किरदार जहां काफी चंचल और चुलबुला है वही दुसरी काफी गंभीर और मजबूत है। 'हर पल" का किरदार मेरे अब तक के निभाए किरदार से काफी अलग और अनोखा है। इस फिल्म ने मुझे 'क्या कहना" की याद दिला दी।
प्रश्न - इन तीनों फिल्मों की विशेषता क्या है ?
उत्तर - इन तीनों फिल्मों की विशेषता यह है कि यह तीनों फिल्में मेरी पर्सनल फिल्म लाइब्रेरी में अवश्य रहेंगी। मुझे इन तीनों पर काफी गर्व है क्योंकि इसके द्वारा मैंने अपने अंदर के कलाकार को चुनौती दी है। साथ ही आज के दौर में जहां कमर्शियल फिल्मों का बोलबाला है वहां कुछ ऐसी फिल्में भी बन रही हैं जो रिएलिस्टिक होने के साथ साथ कमर्शियल भी है। 'तारे ज़मीन पर", 'रंग दे बसंती", 'मुन्नाभाई" और 'वेडनेस्डे" इसके उदाहरण हैं। मेरी आनेवाली तीनों फिल्में इसी क्रम में आती हैं। साथ ही 'हीरोस" की विशेषता यह है कि आर्मी पर बेस्ड होने के बावजूद इसमें पाकिस्तान की बुराई नहीं की गई है।
प्रश्न - दीपा मेहता के बारे में क्या कहना चाहेंगी ?
उत्तर - उनके बारे में क्या कहूं वह पूरी दुनिया में बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं। मैं अक्सर उनके बारे में सोचती थी कि उनका फैसला कभी गलत नहीं हो सकता और यह बात मैंने अपने आंखों से देखी जब टोरंटो में हमारी फिल्म की स्क्रिनिंग के बाद लोगों ने खडे उठकर हमारी फिल्म 'हैवन ऑन अर्थ" के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रश्न - इन तीन फिल्मों में आप भारतीय लडकी के अलग अलग रूप में नज़र आई हैं। इन तीनों में असली प्रीति कौन है ?
उत्तर - मुझे लगता है इन तीनों में सबसे ज़्यादा जो मेरे नज़दिक है वह है 'हीरोस" की कुलजीत कौर क्योंकि मेरी तरह वह भी काफी देशभक्त है। मगर मुझे लगता है किसी एक किरदार को अपनी तरह मानना नाइंसाफी होगी। अपने किरदारों से अधिक मुझे इन फिल्मों पर भरोसा है।
प्रश्न - यानी कि इस बार आपके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पक्का है ?
उत्तर - (हंसते हुए) पता नहीं। मैं चाहती हूं मेरा पुरस्कार दर्शक बनें। वह जाकर फिल्म देखें क्योंकि ऐसी फिल्मों को देखना बहुत ज़रूरी है। विशेष रूप से हर पुरूष और महिला से यह मेरी गुज़ारिश है कि वह दीपा मेहता की 'हैवन ऑन अर्थ" अवश्य देखें।
प्रश्न - हमनें सुना है 'हीरोस" में हीरोइन को साइडलाइन कर दिया गया है ?
उत्तर - जी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। यह सब कुछ मीडिया वालों की राय है। यह उन लोगों में से हैं जिन्हें हर बात में विवाद ढूंढने की और उसे बढा चढाकर पेश करने की आदत होती है। मैं तो उनकी दाद देना चाहूंगी कि इस बार भी उनका बाण नहीं चूका। जिस तरह 'वीर ज़ारा" शाहरुख और प्रीति की फिल्म थी सो फिल्म के पोस्टर पर हमेशा प्रीति और शाहरुख ही थे। उसी तरह इस फिल्म में हीरोइन का किरदार काफी स्ट्रॉग है मगर 'हीरोस" बेसिकली हीरो की ही फिल्म है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।
प्रश्न - डेढ साल बाद 'लास्ट लियर" में नज़र आने के बाद अब आनेवाली फिल्मों में आप कुछ अलग किरदार निभाने के लिए उत्साहित हैं। यही समय क्यों ?
उत्तर - मतलब।
प्रश्न - मतलब कि आपको फिल्में ही वैसी मिली या आप मन बनाकर आई थी कि मुझे कुछ अलग करना है ?
उत्तर - मैं वाकई मन बनाकर आई थी कि मुझे कुछ अलग करना है। इसके लिए मैंने कई बडी फिल्में भी छोडी, जिसका ज़िक्र करना बेवकूफी होगी। हालांकि मीडिया में यह चर्चे होने लगे थे कि प्रीति को फिल्में नहीं मिल रही हैं, वह शादी करने जा रही है। सच बात यह थी कि अपने सारे फिल्मकारों से मैंने आई पी एल के लिए एक साल का गैप लिया था क्योंकि जब तक कुछ होना जाए मैं किसी को कुछ बता नहीं सकती थी। इन सबके बीच मेरे दिल में यह बात थी कि मैं कुछ ऐसा करूं जिससे मैं प्रेरित हो जाऊं। मेरे फैसले से मेरे कई दोस्त नाराज़ भी हुए कुछ ने तो यह भी कहा कि तू इस दुनिया की सबसे बडी पागल और अमहत्वाकांक्षी लडकी है।
प्रश्न - मगर ऐसा फैसला क्यों लिया ?
उत्तर - उस वक़्त सभी मुझसे यही पूछ रहे थे कि प्रीति तू ऐसा फैसला क्यों ले रही है। तब मैंने सबसे यही कहा कि भले ही अपने इरादों में मैं नाकामयाब हो जाऊं मगर फिर भी मैं खुद को एक मौका देना चाहूंगी। अगर मैं हारूंगी भी तो इसके लिए कोई और नहीं मैं खुद ज़िम्मेदार होऊंगी। अक्सर होता यह था कि मुझसे लोग कहते थे प्रीति यह फिल्म कर ले और मैं यह सोचकर कर लेती थी कि फिल्म अच्छी है, बैनर अच्छा है, पैसे अच्छे मिल रहे हैं। ऐसा लगता था कोई रिमोट कंट्रोल से मुझे कंट्रोल कर रहा है। इसमें कहीं भी मेरा दिल नहीं रहता था। जब आई पी एल की बात बन गई तो मुझे ऐसा लगा कि यह भगवान का इशारा है क्योंकि जिस दिन मैंने सोचा मुझे कुछ अलग करना है दीपा मेहता की तरफ से मुझे इस फिल्म का ऑफर आया।
प्रश्न - क्या इससे पहले आपको दीपा मेहता और रितुपर्णो घोष जैसे निर्देशक के ऑफर नहीं आए थे ?
उत्तर - बिल्कुल आए थे मगर तब मैं अंधी थी। जब मैं हार्डकोर कमर्शियल फिल्म कर रही थी तब भी मेरे पास इस तरह के कई बडे निर्देशक बडी बडी फिल्मों के साथ आए। तब मैंने उन्हें यही कहा था अगर किसी चीज़ में मेरी दिलचस्पी है तो पूरे सौ प्रतिशत है और अगर नहीं है तो सौ प्रतिशत नहीं है। अगर मैं किसी फिल्म में अपना सौ प्रतिशत नही दे पा रही या आधे मन से काम कर रही हूं तो यह मेरे साथ उस फिल्म का माइनस पॉइंट है।
प्रश्न - 'मिस्टर एंड मिसेस खन्ना" तथा 'रब ने बना दी जोडी" में बतौर कैमिओ नज़र आने की वजह ?
उत्तर - देखिए जहां तक 'मिस्टर एंड मिसेस खन्ना" फिल्म की बात है तो उसका निर्देशक मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और वह कई दिनों से चाहता था कि मैं उसके साथ काम करूं। मगर मुझ पर इन तीनों फिल्मों का इस कदर भूत सवार था कि मैने उसे इंकार कर दिया। अब जब वह इस छोटे से रोल के साथ मेरे पास आया तो मैं उसे ना नहीं कर पाई। 'रब ने बना दी जोडी" के बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहूग़ी। इस फिल्म के लिए फिलहाल मेरी ज़ुबान बंद है।


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