»   » INTERVIEW: 'इस फिल्म में कोई नया बिहारी बाबू नहीं दिखाया है हमने....'

INTERVIEW: 'इस फिल्म में कोई नया बिहारी बाबू नहीं दिखाया है हमने....'

Written By:
Subscribe to Filmibeat Hindi

अर्जुन कपूर और श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म 'हॉफ गर्लफ्रैंड' 19 मई को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह फिल्म लेखक चेतन भगत की किताब पर आधारित है, जिसका निर्देशन किया है मोहित सूरी ने। फिल्म में अर्जुन बिहारी लड़के माधव झा का किरदार अदा कर रहे हैं। जिसे अर्जुन ने काफी रोमांचक अनुभव बताया। 

Arjun Kapoor

हॉफ गर्लफ्रैंड प्रमोशन के दौरान फिल्मीबीट ने भी अर्जुन कपूर से खास बातचीत की। जहां उन्होंने फिल्म के किरदार, कहानी से लेकर कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार सामने रखे। फिल्मों के साथ साथ अर्जुन ने देश में भाषा को लेकर उठ रही समस्याओं पर भी बात की।

यहां पढ़ें अर्जुन कपूर की इंटरव्यू के कुछ मुख्य अंश-

 

फिल्म के लिए किन बातों ने किया आकर्षित

फिल्म के लिए किन बातों ने किया आकर्षित

माधव झा जैसा किरदार मैंने आज तक नहीं किया है। ऐसा नहीं यह एकदम हटके किरदार है या ऐसा कुछ..बल्कि इस किरदार की सोच काफी अलग है।

माधव झा ने स्कूल में बास्केट बॉल खेलना शुरु कर दिया.. ताकि वो एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले सके.. वहां पढ़े सके। और फिर अपने गांव वापस आकर वहां के लोगों की मदद कर सके और उन्हें आगे ले जा सके।

माधव झा काफी प्रेरणादायक किरदार है। मैं चाहूंगा कि सभी इस किरदार से कुछ सीखें।

फिल्म में एक सीन.. जब प्रिंसिपल कहते हैं- तुम जो कह रहे हो, वह सही है। लेकिन तुम्हारी इंग्लिश काफी बुरी है। मुश्किल है कि तुम्हें एडमिशन मिल पाएगी।

तो माधव कहता है- सर एक बात कहना चाहेंगे.. आप एक छात्र को लेना चाहेंगे जो समझदार हो.. या एक ऐसे छात्र को जो किसी दूसरे देश का भाषा बहुत बढ़िया बोलता है।

बॉस्केटबॉल चैपियन

बॉस्केटबॉल चैपियन

मैंने स्कूल में बास्केट बॉल खेली है। मैं स्कूल टीम में था। लेकिन इसीलिए नहीं क्योंकि मैं अच्छा खेलता था। बल्कि इसीलिए क्योंकि मैं बॉल की तरह दिखता था।

खैर, जब मैं इस फिल्म से जुड़ा तो समझ आया कि कितना मुश्किल है स्पोर्ट्स। इस फिल्म के लिए मैं इस खेल का और भी ज्यादा सम्मान करने लगा हूं। ये मेरा नया प्यार है। मैंने ट्रेनिंग के दौरान कई बारीकियां सीखी हैं।

ट्रेलर ने काफी ध्यान आकर्षिक किया.. मैं खुश हूं

ट्रेलर ने काफी ध्यान आकर्षिक किया.. मैं खुश हूं

कई फिल्मों को भी इतना attention नहीं मिल पाता.. जितना फिल्म के ट्रेलर को मिला है.. मैं खुश हूं। फिल्म के कुछ सीन पर meme भी बने हैं। लेकिन लोगों के दिमाग में ये फिल्म है, यह अच्छी बात है। लोगों ने इसे नोटिस किया है और वे थियेटर तक आएं, यही मायने रखता है।

पटना में शूटिंग का अनुभव.. भाषा के लिए ली ट्रेनिंग

पटना में शूटिंग का अनुभव.. भाषा के लिए ली ट्रेनिंग

बिहार एक राज्य है.. उसमें पटना की अलग बोली है। यहां जो किरदार है वह सिमराव का है। माधव राज परिवार से ताल्लुक रखता है इसीलिए हमने इसकी बोली हिंदी जैसी ही रखी है।

मैंने इसके लिए पहले ही काफी तैयारी कर रखी थी। मेरे लिए एक कोच भी रखा गया था। लिहाजा, फिल्म शूटिंग के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं हुई। यूं भी माधव जब दिल्ली के कॉलेज में आ जाता है तो दोस्तों के साथ हिंदी में ही बात करता है.. लेकिन लहज़ा वही होता है क्योंकि बचपन से माधव ने वही सीखा है।

नया 'बिहारी बाबू' नहीं दिखाया है हमने

नया 'बिहारी बाबू' नहीं दिखाया है हमने

हम चाहते हैं कि लोग ये समझें कि फिल्म में यहां कोई नया बिहारी बाबू नहीं दिखाया गया है। मैं चाहता हूं कि बिहार का कोई भी व्यक्ति पूरी दुनिया में कहीं भी यह फिल्म देखे तो उसे गर्व हो.. उसे लगे कि हमने भाषा को सही अपनाया है।

बिहार का इतिहास काफी गाढ़ा है.. लेकिन सबके दिमाग में वहां कि एक ही छवि बैठा दी गई है। इस फिल्म में कोई छिछोड़ापन नहीं दिखाया गया है।

भाषा सिर्फ बिहार की समस्या नहीं

भाषा सिर्फ बिहार की समस्या नहीं

यदि इस फिल्म में बिहार की जगह कोई भी राज्य दिखाया जाता तो भी मैं ये फिल्म करता। क्योंकि बिहार में ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों, राज्यों में भाषा की समस्या है। मैं ये नहीं कहता कि सिर्फ हिंदी में ही बात करनी चाहिए। लेकिन अंग्रेजी की वजह से हिंदी को त्याग देना गलत है।

पटना में आप जाएंगे तो कई जगह एड दिखती है.. अंग्रेजी बोलना सीखें.. क्योंकि बिना इंग्लिश के आजकल नौकरी भी नहीं मिलती। यह बहुत बड़ी समस्या है।

मुबारकां का कैसा है अनुभव

मुबारकां का कैसा है अनुभव

हॉफ गर्लफ्रैंड की तरह मुबारकां का सफर भी काफी अलग सा रहा है। कॉमेडी किसी भी एक्टर के लिए सबसे मुश्किल है। भारत में कॉमेडी फिल्में हमेशा परिवार से जुड़ी होती हैं। इसीलिए मुझे करना काफी अच्छा लगा। मुबारकां भी परिवारिक फिल्म है.. फुल ऑफ लाइफ। साथ ही अनीस बज्मी और अनिल कपूर के साथ काम करना शानदार था।

अनिल कपूर के साथ काम करने का अनुभव

अनिल कपूर के साथ काम करने का अनुभव

जिस आदमी को देखकर मैं बड़ा हुआ हूं.. जिन्हें मैं इतना मानता हूं। उनके साथ स्क्रीन शेयर करना बड़ी बात है। मुझे बहुत अच्छा लगा। कहीं ना कहीं अब वे मेरे चाचा से मेरे दोस्त बन गए। लगभग 60, 70 दिन एक साथ रहना। मैंने उनके व्यक्तिव्य का नया पहलू देखा है।

मिस्टर इंडिया का रीमेक

मिस्टर इंडिया का रीमेक

मिस्टर इंडिया से लोगों के इमोशन जुड़े हैं.. बचपन जुड़ा है। लोग आज भी उस फिल्म को एन्जॉय करते हैं। कुछ चीजों को हाथ ना ही लगाया जाए तो सही है। इस फिल्म का रीमेक नहीं बन सकता.. कोई कहानी आगे ले जाना चाहे तो ले जा सकता है।

    English summary
    Arjun Kapoor in an interview talks about his upcoming film Half Girlfriend and much more.

    रहें फिल्म इंडस्ट्री की हर खबर से अपडेट और पाएं मूवी रिव्यूज - Filmibeat Hindi

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more