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    Exclusive Interview: 'हिंदी-मराठी दोनों सिनेमा करूंगा, मुझे यहां तक मराठी ऑडियंस ने ही पहुंचाया है'- आकाश ठोसर

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    डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर 26 फरवरी को वेब सीरीज़ '1962 द वॉर इन द हिल्स' (1962 The War In The Hills) स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हो चुकी है। महेश मांजरेकर के निर्देशन में बनी सीरिज में अभय देओल, सुमित व्यास, माही गिल, रोहन गंडोत्रा, अनूप सोनी के साथ अभिनेता आकोश ठोसर एक अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।

    अपने किरदार पर बात करते हुए आकाश ने कहा, "आर्मी में जाना मेरा बचपन का सपना था। वो सपना तो सपना ही रह गया। लेकिन जैसे ही महेश सर ने मुझे इसके लिए अप्रोच किया, मैंने तुरंत हां कर दी। इसमें मैं आर्मी के एक जवान का किरदार निभा रहा हूं।"

    सुपरहिट मराठी फिल्म 'सैराट' के साथ आकाश ठोसर ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। पहली फिल्म से ही उन्हें अपने सधे हुए अभिनय के लिए बहुत सराहना मिली, अवार्ड्स मिले। इसके बाद वो फ्रेंडशिप अनलिमिटेड (मराठी), लस्ट स्टोरीज (हिंदी) जैसी फिल्मों में नजर आए।

    अब जबकि '1962 वॉर इन द हिल्स' रिलीज हो चुकी है, फिल्मीबीट ने आकाश ठोसर से खास बातचीत की है, जहां उन्होंने अपने किरदार से लेकर अपने करियर, महेश मांजरेकर के साथ काम करने के अनुभव को भी साझा किया है।

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    '1962 द वॉर इन द हिल्स' की किस बात ने आपको आकर्षित किया?

    '1962 द वॉर इन द हिल्स' की किस बात ने आपको आकर्षित किया?

    दरअसल, मुझे बचपन से आर्मी में जाना था। मैंने कभी डॉक्टर या इंजीनियर बनने का नहीं सोचा, आर्मी में जाना ही मेरा सपना था। यहां तक की मैंने अपनी पढ़ाई भी उसी हिसाब से की थी। दो बार मैंने आर्मी के लिए ट्राई किया था। लेकिन सिलेक्ट नहीं हो पाया। फिर 6 महीने के लिए पुणे के पास एक आर्मी एकेडमी ज्वाइन की थी। लेकिन फिर एक्सीडेंटली फिल्मों में आ गया। एक्सीडेंटली इसीलिए क्योंकि मुझे रेलवे स्टेशन पर स्पॉट करके अचानक से ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। जब मैंने सैराट की, उसके बाद मैंने सोच लिया कि मैं एक्टिंग ही करूंगा। फिर सपना सपना ही रह गया। मैं एक्टर बन गया। लेकिन जब महेश (मांजरेकर) सर ने मुझे किशन (1962- वॉर इन द हिल्स) का रोल ऑफर किया, तो मैंने तुरंत ही हां कर दी थी। इसमें मैं आर्मी के एक जवान का किरदार निभा रहा हूं।

    महेश मांजरेकर के साथ आपने पहले भी एक फिल्म की है। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा है?

    महेश मांजरेकर के साथ आपने पहले भी एक फिल्म की है। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा है?

    हमारी बॉण्डिंग बहुत अच्छी है। कह सकते हैं परिवार की तरह है। और जैसा कि मैंने पहले भी महेश सर के साथ काम किया हुआ है, तो सर को पता है कि मेरा काम कैसा है। उन्हें मेरे काम करने का अंदाज़ पता है। और मुझे भी पता है कि सर को क्या चाहिए। इस सीरिज से पहले मैं बहुत दुबला था, जैसा आपने सैराट में देखा था। फिर महेश सर ने मुझे कहा कि तुम्हें आर्मी का जवान दिखने के लिए थोड़ी बॉडी बनानी पड़ेगी। मैंने खुद पर मेहनत की, 10-12 वजन बढ़ाया। फिर मैंने भाषा पर थोड़ा काम किया। हालांकि, मैं वैनिटी में बैठकर पूरा स्क्रिप्ट याद करता था और जब सेट पर पहुंचता था तो पूरी स्क्रिप्ट बदल चुकी होती थी(हंसते हुए).. यह चैलेजिंग भी था, लेकिन मजा भी आया। मुझे बहुत कुछ नया सीखने को मिला।

    बतौर अभिनेता एक मल्टीस्टारर सीरिज में काम करना आपके लिए कितना आसाना या मुश्किल रहा?

    बतौर अभिनेता एक मल्टीस्टारर सीरिज में काम करना आपके लिए कितना आसाना या मुश्किल रहा?

    मुझे लगता है आप क्या काम करते हो, ये जरूरी है। आप दूसरों के काम से खुद की तुलना मत करो। यदि आपका छोटा सा भी रोल है, तो उसे इतनी अच्छी तरह से निभाओ की लोग याद रखें। तो इस सीरिज के दौरान भी मैंने यही सोच रखी। हालांकि महेश सर ने जब स्क्रिप्ट बताया था, तो मुझे अंदाजा था कि मेरा रोल इसमें काफी महत्वपूर्ण है, स्क्रीन टाइम भी काफी बड़ा था। लेकिन फिर वही है.. कि यदि आपको खुद पर विश्वास है, अपने काम पर विश्वास है.. तो फिर क्यों नहीं।

    '1962 वॉर इन द हिल्स' की शूटिंग लद्दाख में हुई है। वह काफी चैलेंजिग रही होगी?

    '1962 वॉर इन द हिल्स' की शूटिंग लद्दाख में हुई है। वह काफी चैलेंजिग रही होगी?

    हां, पहले से ही हमें बताया गया कि वहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है, रास्ते आसान नहीं होते हैं। वहां जाने से पहले हमें कुछ दवाइयां दी गई थीं। लेकिन वहां शूट करना मुश्किल तो था क्योंकि पहाड़ी इलाकों में थोड़ा भी चलने पर सांस फूलने लगती है। हमें आर्मी के पूरे सामान के साथ चलना था। दूसरी बात की ठंड बहुंत थी। मैंने इससे पहले इतनी ठंड कभी नहीं झेली थी। लेकिन सामने कैमरा था, तो हम चेहरे पर यह दिखा भी नहीं सकते थे। उसके बाद हमने पंचगनी, महाबलेश्वर में शूटिंग की थी। तो वहां मैंने काफी एन्जॉय किया। मैंने पहली बार इस सीरिज में एक्शन सीन्स किये, तो वो मेरे लिए अलग अनुभव था।

    1962 एक वॉर ड्रामा है.. देशभक्ति की आपकी परिभाषा क्या है?

    1962 एक वॉर ड्रामा है.. देशभक्ति की आपकी परिभाषा क्या है?

    मेरा हमेशा से सपना था कि मैं आर्मी में जाऊं। वर्दी पहनने का मेरा सपना तो सपना ही रह गया। लेकिन अब सोचता हूं कि आपको देशभक्ति जताने के लिए सरहद पर जाकर लड़ने की जरूरत नहीं है। आपके हाथ में बंदूकें होनी ही चाहिए, ये जरूरी नहीं है। आप वर्दी पहनो, ये जरूरी नहीं है। देश की सेवा करने के कई मौके आपके सामने आते हैं। आप अपने शहर, घर से भी वो कर सकते हो।

    आपने डेब्यू मराठी सिनेमा से की और अब हिंदी फिल्मों की ओर भी बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में किस तरह सामंजस्य बनाकर चलना चाहेंगे?

    आपने डेब्यू मराठी सिनेमा से की और अब हिंदी फिल्मों की ओर भी बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में किस तरह सामंजस्य बनाकर चलना चाहेंगे?

    मुझे दोनों तरफ काम करना है.. क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी ऑडियंस मराठी ऑडियंस है। उन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया है, तो उनके लिए मैं जरूर काम करूंगा। और जहां तक हिंदी फिल्मों की बात है, तो वो तो करना ही है। सभी एक्टर बॉलीवुड में काम करना चाहते हैं, मुझे भी करना है। लेकिन मराठी सिनेमा मैं करता रहूंगा।

    बॉलीवुड में किस निर्देशक के साथ काम करने का सपना देखते हैं?

    बॉलीवुड में किस निर्देशक के साथ काम करने का सपना देखते हैं?

    अनुराग कश्यप सर के साथ मैं फिर से काम करना चाहूंगा। Lust Story मैंने किया था, लेकिन मुझे एक पूरी फीचर फिल्म उनके साथ करनी है। मुझे उनकी फिल्में बहुत पसंद है। उनका काम करने का तरीका मुझे बहुत अच्छा लगता है।

    इस साल और किन फिल्मों में आपको देख सकेंगे?

    दरअसल, कुछ ही दिनों में एक फिल्म की अनाउंसमेंट होने वाली है, इसीलिए उस बारे में मैं ज्यादा कुछ बोल नहीं सकता। उसके बाद भी एक फिल्म पर और बात चल रही है, शायद फाइनल हो जाए। मराठी- हिंदी दोनों फिल्में साथ साथ चल रही है। लेकिन फिल्मों का नाम नहीं ले सकता फिलहाल।

    1962: द वॉर इन द हिल्स रिव्यू- 125 भारतीय सैनिकों की जांबाजी और बलिदान को सलाम करती है ये सीरिज

    English summary
    In an exclusive interview with Filmibeat, Sairat fame actor Akash Thosar opens up on his role in 1962 War In The Hills, his struggle and success in films.
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