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मैं एक्टर हूं..आपके बॉक्स ऑफिस नंबर मुझपर निर्भर नहीं है -दिव्या दत्ता

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बॉलीवुड में जहां एक ओर सेलिब्रीटी सोच समझकर बोलते हैं और अपनी बात रखते हैं। दिव्या दत्ता एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जो निर्भिक और बेबाक होकर बोलती हैं। वो कभी बातों को कभी घुमा फिर की मिश्री की लपेटकर नहीं बोलती हैं और यही उनकी खासियत है। 

दिव्या दत्ता से अगर आप बात करेंगे तो आपको उनकी बातों से एहसास होगा कि वो कितनी बोल्ड है। जिस कॉन्फिडेंस के साथ वो अपनी बात रखती हैं। वो देखने लायक हैोती है। वो अपनी मां को इसका सारा क्रेडिट देती हैं जिन्हें वो सबसे ज्यादा पावरफुल मानती हैं। 

[मेरे और अक्षय कुमार के बीच कोई अनबन नहीं- अरशद वारसी]

दिव्या दत्ता से हमारी एक्सक्लूशिव बातचीत हुई जिसमें उन्हें कई पुरानी यादें ताजा की, बॉक्स ऑफिस नंबर पर भी खुलकर बातचीत की और भी बहुत कुछ।

मेरी मां ने मुझे क़न्फिडेंट बनाया

मेरी मां ने मुझे क़न्फिडेंट बनाया

Q. सबसे पहले आपको अपने बुक 'मी एंड मां' पर बधाई जो आपने अपनी मां को समर्पित किया है और इसमें एक मां और बेटी के रिलेशनशिप पर आपने ये बुक लिखा है। क्या कोई किस्सा या एक्सपिरियें शेयर करना चाहेंगी?

सभी बच्चों का जो सबसे प्यारा रिश्ता होता है वो मां के साथ होता है। इसलिए हर मां स्पेशल होती है। मेरा रिलेशनशिप मां के साथ थोड़ा और भी ज्यादा स्ट्रॉन्ग था मैं उनके साथ बेटी, बेस्ट फ्रेंड और उनकी मां भी थी। मैंने अपनी लाइफ में अच्छा, बुरा, गलत सही जो भी किया मेरी मां हमेशा मेरे साथ खड़ी रहीं।काफी कुछ था जो मैं बोलना चाहती थी। वो शारीरिक रुप से मेरे साथ तो नहीं लेकिन फिर भी लोवो हमेशा मेरे आसपास हैं।मैंने

Q. आप अपनी मां को अपनी सफलता का क्रेडिट देती हैं। उनका क्या प्रभाव पड़ा

Q. आप अपनी मां को अपनी सफलता का क्रेडिट देती हैं। उनका क्या प्रभाव पड़ा

किसी भी पैरेंट्स से जो सबसे अच्छा गिफ्ट बच्चों को मिल सकता है वो है बिना जज किए पूरा सर्मथन देना । मेरे पास दोनों था। जब मैंने एक्टर बनने का फैसला लिया था खासकर उस परिवार में जहां हर कोई मुझे डॉक्टर बनाना चाहता था मेरी मां मेरे साथ खड़ी रही और कहा कि 'ये तु्म्हारा सपना है और मैं तु्म्हारे साथ हूं' एक टीनएजर के तौर पर ये मेरे लिए खास था कि मेरी मां के लिए मेरे सपने मायने रखते हैं। मैं इसके लिए उनका जितना भी शुक्रिया करुं कम ही होगा। मुझे पता था कि उनका सर्पोट मेरे साथ है। अगर मुझसे गलती भी हुई तो मैंने कभी नहीं छिपाया मैं उनके पास जाती थी और मुझे सही मार्गदर्शन देती थी। उन्होंने मुझे कॉन्फिडेंट और बेहतर इंसान बनाया।

Q. आजकल कई बॉलीवुड सेलिब्रीटी अपनी बुक लिख रहे हैं। ये सही है कि फैन्स भी स्टार्स को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से जान पाते हैं लेकिन क्या आपको लगता है कि जज किए जाने का डर भी होता है कि कहीं इसका असर इमेज पर ना पड़े?

Q. आजकल कई बॉलीवुड सेलिब्रीटी अपनी बुक लिख रहे हैं। ये सही है कि फैन्स भी स्टार्स को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से जान पाते हैं लेकिन क्या आपको लगता है कि जज किए जाने का डर भी होता है कि कहीं इसका असर इमेज पर ना पड़े?

आप क्या कहते हैं ये मायने नहीं रखता आप कैसे कहते हैं ये मायने रखता है। मैं अपने बारे में कुछ भी बोल सकती हूं लेकिन जैसे मुझे रिलेट कर सकते हैं मैंने वैसे लिखा है। जहां तक लिखने की बात है ये किताब बाकियों से अलग इसलिए है क्योंकि मैंने बस वहीं लिखा है जो सीधे मेरे अंदर से आती गई। एडिटर ने एडिट जरुर किया लेकिन मेरे कहने का तरीका है।मैं ईमानदार रहना चाहती थी क्योंकि ये मेरा परफॉर्मेंस था। अगर आप अपने पाठकों के साथ ईमानदार नहीं है तो कोई प्वाइंट नहीं रह जाता।

 Q. फिल्मों की बात करें तो आपकी अगली फिल्म इरादा सस्पेंस थ्रिलर फिल्म है जिसे लोगों ने सराहा है। फिल्म में एक सामाजिक औक पर्यावरण का मुद्दा उठाया गया है जो बॉलीवुड में कम दिखता है। आपका फिल्म को लेकर क्या मानना है?

Q. फिल्मों की बात करें तो आपकी अगली फिल्म इरादा सस्पेंस थ्रिलर फिल्म है जिसे लोगों ने सराहा है। फिल्म में एक सामाजिक औक पर्यावरण का मुद्दा उठाया गया है जो बॉलीवुड में कम दिखता है। आपका फिल्म को लेकर क्या मानना है?

मैं फिल्में अपनी Insticnt के आधार पर चुनती हूं। मैं ज्यादा कुछ पर ध्यान नहीं देती। फिल्म को एक अच्छी टीम ने मिलकर बनाई है। फिल्म को लिखा भी बेहद अच्छे से गया है।नसीरुउद्दीन साब और अरशद का कॉम्बिनेश ऐसा है कि मैं हमेशा इनके साथ काम करना चाहती थी। मुझे एक कारण फिल्म करने का मिल गया और स्क्रिप्ट भी काफी पसंद आयी तो मैंने फिल्म के लिए हां कर दिया।

 आप बॉलीवुड की कई शानदार और सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं।कुछ फिल्में ऐसी भी रही जो बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर सकीं। आप इंडस्ट्री में इतने सालों है क्या आपको लगता है कि फिल्म अगर कमाती है तो फिल्म का Essence भी नहीं रह जाता है?

आप बॉलीवुड की कई शानदार और सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं।कुछ फिल्में ऐसी भी रही जो बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर सकीं। आप इंडस्ट्री में इतने सालों है क्या आपको लगता है कि फिल्म अगर कमाती है तो फिल्म का Essence भी नहीं रह जाता है?

सबसे पहले मुझे लगता है कि मेरे खाते में कई हिट फिल्में है जो कई बड़े एक्टर्स के खाते में नहीं है। वीर जारा, बदलापुर, स्टेनली का डब्बा, भाग मिल्खा भाग सभी काफी हिट फिल्में थी। दूसरी बात कि मैं एक्टर हूं। आपके बॉक्स ऑफिस नंबर मुझपर निर्भर नहीं करते हैं। इसलिए ये मेरा गेम नहीं है। मेरा मंत्र है कि आप मुझे फिल्म में देखें,प्यार दें। बॉक्स ऑफिस नंबर हमेशा हीरो और टॉप के 4-5 लोगों पर निर्भर करती है और बाकियों के लिए फिल्म अच्छी थी, परफॉर्मेंस अच्छा था यही माय़ने रखता है।

 Q. आजकल 'women-oriented' शब्द बॉलीवुड में कुछ ज्यादा ही चल रहा है जिसमें हम महिला केंद्रित फिल्में भी कहते हैं। क्या आपको लगता है कि सिनेमा को लिंग के आधार पर बांटना सही है?

Q. आजकल 'women-oriented' शब्द बॉलीवुड में कुछ ज्यादा ही चल रहा है जिसमें हम महिला केंद्रित फिल्में भी कहते हैं। क्या आपको लगता है कि सिनेमा को लिंग के आधार पर बांटना सही है?

हम हमेशा भले सामान अधिकार की बातें करें लेकिन ये एक दुख भरी सच्चाई है कि हमारी इंडस्ट्री हीरो ऑरियंटेड इंडस्ट्री है। इसके पहले कि कोई फिल्म देखने आए पूछता है हीरो कौन है इसमें उसके बाद हिरोईन की बात करते हैं। शायद मैं भी ये करती हूं क्योंकि हम इस तरह से ही चीजों को देखते हुए बड़े हुए हैं। सबकुछ हीरो पर निर्भर रहता है इसलिए अगर फिल्म में कोई हीरो नहीं हो तो हम उसे महिला केंद्रित फिल्में कहते हैं। मुझे लगता है कि दीपिका , प्रियंका चोपड़ास कंगना रनौत ये सभी इस बदल रही है। ये वही फिल्में करती हैं जिसमें इनका भी बराबर का रोल हो
और अगर कॉम्बिनेशन सही है तो फिल्म भी बैलेंस हो जाती है।

आजकल सेलिब्रीटी काफी सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी राय देने लगे हैं। कभी कभी स्टेटमेंट को गलत तरीके से भी लिया जाता है और इसपर काफी बवाल मच जाता है। आपको क्या लगता है सेलिब्रीटी के लिए क्या ज्यादा जरूरी है ऑपिनयन होना और एक्सप्रेस करना?

आजकल सेलिब्रीटी काफी सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी राय देने लगे हैं। कभी कभी स्टेटमेंट को गलत तरीके से भी लिया जाता है और इसपर काफी बवाल मच जाता है। आपको क्या लगता है सेलिब्रीटी के लिए क्या ज्यादा जरूरी है ऑपिनयन होना और एक्सप्रेस करना?

अगर आपके पास ऑपिनियन है तो आपको उसे जाहिर जरुर करना चाहिए लेकिन हां सोच समझकर कि इसका क्या असर हो सकता है। एक स्टार के तौर पर आप मुंह कुछ भी नहीं कह सकते जिसका गलत परिणाम भी हो सकता है। हम एक लोकतंत्र में रहते है और हमें अपनी बातें जाहिर करने का हक है। अगर आपको कोई पसंद नहीं है तो आप ब्लॉक कर सकते हैं। मैं इस मामले में लकी रही हूं कि अभी तक ट्रोल नहीं किया गया।

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    English summary
    Bollywood one of the talented actress Divya Dutta exclusive interview.

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