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फॉर्मूला एक्शन फिल्में करना चाहता हूं- अभय देओल

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(सोनिका मिश्रा) सोचा ना था, रांझना, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, शंघाई जैसी बेहतरीन और लीक से हटकर फिल्में करके अपना खुद का एक जोनर क्रिएट करने वाले एक्टर अभय देओल पहली बार बतौर निर्माता वन बाय टू फिल्म से जुड़े हैं। अभय देओल के नाम के साथ भले ही देओल सरनेम जुड़ा हो लेकिन अभय कभी भी खुद को देओल परिवार के साथ जोड़ना पसंद नहीं करते। हालांकि वनइंडिया के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान अभय ने कहा कि वो भी देओल की तरह कुछ एक्शन फिल्में भी करना चाहते हैं। वन बाय टू में अभय और उनकी रियल लाइफ पार्टनर प्रीती देसाई भी मुख्य भूमिका निभा रही हैं।

आइये जानते हैं प्रीती के साथ पहली बार स्क्रीन पर रोमांस करके अभय को कैसा लगा।

वन बाय टू में पहले आप एक्टिंग नहीं करना चाहते थे। फिर बाद में आपने हां कर दी। इसके पीछे क्या वजह थी?

पहले तो मुझे ऐसा लगा कि अगर मैं फिल्म प्रोड्यूस कर रहा हूं तो फिल्म में एक्टिंग कैसे करुं। चूंकि ये मेरी बतौर निर्माता पहली फिल्म थी तो मैं चाहता था कि सिर्फ फिल्म को प्रोड्यूस ही करुं ना कि एक्टिंग भी। इसके अलावा कहीं ना कहीं मुझे ये भी महसूस हो रहा था कि अगर मैंने अपनी ही प्रोड्यूस की गयी फिल्म में लीड रोल किया तो कहीं लोगों को ये ना लगे कि अरे ये तो खुद ही फिल्म का निर्माण करके उनमें काम कर रहा है। क्योंकि यहां पर लोगों की सोच बहुत ही छोटी होती है। लेकिन जब वन बाय टू की कहानी पूरी हुई और फिल्म पर काम शुरु हुआ तो मुझे कहीं ना कहीं लगा कि मैं अगर फिल्म में काम करुं तो कहीं ना कहीं मुझे फिल्म के लिए बजट भी मिल जाएगा और मैं इस किरदार के साथ बेहतर तरीके से जस्टीफाय भी कर सकूंगा।

वन बाय टू के आप निर्माता भी थे और एक्टर भी। कैसा रहा ये एक्सपीरिंयस?

सबसे पहली और मजेदार बात ये हुई कि फिल्म की शूटिंग करते हुए जब भी मुझे गुस्सा आता था तो मैं सबसे पहले चिल्लाता था कि कहां है फिल्म का प्रोड्यूसर उसे बुलाओ। और तब मुझसे कहा जाता था कि आप ही तो प्रोड्यूसर हैं तो आइने के सामने खड़े होकर खुद से ही बात कर लीजिये। तो मैं किसी तरह के टैंट्रम नहीं शो कर पाया। मेरी कंपनी मे मेरा एक पार्टनर है संजय कपूर। तो फिल्म की शूटिंग शुरु होते समय उसने मुझसे कहा कि फिल्म की शूटिंग के समय सेट पर तुम प्रोड्यूसर नहीं होगे। सिर्फ फिल्म के एक्टर होगे। तो मैं बहुत ही रिलैक्स हो गया और फिर पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान कभी भी मुझे ये एहसास नहीं हुआ कि फिल्म को मैं प्रोड्यूस कर रहा हूं। बल्कि मैं सिर्फ फिल्म के लीड एक्टर की ही तरह पेश आ रहा था।

फिल्म की शूट के दौरान किसी तरह की मुश्किल आने पर बतौर निर्माता आप रिएक्ट नहीं करते थे?

मेरे पार्टनर ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि मुझे शूट के दौरान होने वाली किसी भी मुश्किल का पता ना चले। हमने शूट बहुत ही अच्छी तरह से किया और मुझे इस बात की खुशी है कि हमने अपने शेड्यूल से दो दिन पहले ही अपना शूट खत्म कर लिया था। किसी भी तरह की कोई मुश्किल ही नहीं आई।

बतौर निर्माता फिल्म की सक्सेस आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है?

हर एक्टर और प्रोड्यूसर की तरह मैं भी चाहता हूं कि मेरी सारी फिल्में सफल हों। अगर आप फिल्म में सिर्फ एक्टर हों या फिर सिर्फ प्रोड्यूसर आप चाहते हीं कि आपकी फिल्म अच्छी कमाई करे। बतौर एक्टर आप इसलिए चाहते हैं कि आपकी फिल्म कमाई करे ताकि आपको आगे फिल्में मिलें। और बतौर प्रोड्यूसर अगर आपकी फिल्में कमाई नहीं करती हैं तो आपको आगे मुश्किल होती है क्योंकि फिर अच्छे एक्टर्स आपके प्रोडक्शन हाउस में काम नहीं करना चाहते हैं क्योंकि वो भी पहले ये देखते हैं कि इस प्रोडक्शन हाउस ने कितनी हिट फिल्में दी हैं।

प्रोडक्शन के बाद फिल्मों के निर्दे्शन का क्या प्लान है?

मैं चाहता हूं कि मैं भविष्य में फिल्में डायरेक्ट करुं। लेकिन अगर आप ये कहें कि मैंने प्रोडक्शन हाउस इस सोच के साथ शुरु किया है कि मैं अपनी ही प्रोड्यूस की गयी फिल्मों को डायरेक्ट कर सकूं तो ये गलत होगा। मैं अभी डायरेक्शन के बारे में कुछ नहीं सोच रहा हूं और ना ही डायरेक्टर बनना चाहता हूं। अभी मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है। अभी मैं एक्टिंग से प्रोडक्शन में आया हूं और बहुत कुछ नया सीख रहा हूं। तो मैं अभी निर्देशन में नहीं जाने की सोच रहा हूं। जो नया मेरे सामने है उसे ही सीख रहा हूं। पर मैं चाहता हूं ये भी हो।

निर्मता बनने के बाद आपने सबसे पहली चीज क्या सीखी?

निर्माता बनने के बाद मेरी सबसे पहली लर्निंग थी कि मैं अब बहुत ही धैर्यवान हो गया हूं और ज्यादा डिप्लोमैटिक हो गया हूं। जो कि इस फील्ड के लिए बहुत जरूरी है। ये एक बहुत ही बेहतरीन एक्सपीरियंस रहा। मेरी पूरी टीम बहुत ही बेहतरीन थी और हमने साथ में बहुत मजा किया। हमारा स्टूडियो तो बहुत पहले ही आ गया था जब हमने शूटिंग शुरु की थी। मैने पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान खुद को बहुत ही ब्लैस्ड महसूस किया कि मुझे इतने अच्छे पार्टनर मिले साथ काम करने को।

आगे की इंटरव्यू के कुछ अंश स्लाइडों में -

बतौर एक्टर आपने अलग अलग तरह की फिल्मों में काम किया है और डिफरेंट किरदार निभाए हैं। क्या वजह रही इन किरदारों को निभाने के पीछे। अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरु करने का भी फैसला क्यों किया आपने?

बतौर एक्टर आपने अलग अलग तरह की फिल्मों में काम किया है और डिफरेंट किरदार निभाए हैं। क्या वजह रही इन किरदारों को निभाने के पीछे। अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरु करने का भी फैसला क्यों किया आपने?

मैंने कुछ ऐसी फिल्में की है जो कि मेन स्ट्रीम की फिल्मों में नहीं गिनी जाती हैं। आज भी इन अलग अलग क्षेत्रों में कुछ ज्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं हो रहा है। लेकिन मैंने जो भी फिल्में की हैं मुझे उन फिल्मों को चुनने के अपने सेलेक्शन पर आज भी गर्व है। मेरा अभी तक का इन अलग अलग तरह की फिल्में करने का एक्सपीरिसंय बहुत ही अच्छा रहा है। लेकिन ये भी सच है कि मैंने जैसी फिल्में की है उन्हें बनाना बहुत मुश्किल है। तो मैं सिर्फ नये और टैलेंटेड लोगों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहता हूं जहां पर उन्हें कुछ अलग और डिफरेंट तरह की फिल्में बनाने के लिए बजट मिले और वो उन फिल्मों को साकार रुप दे सकें। इसीलिए मैंने ये प्रोडक्शन हाउस बनाया।

बतौर निर्माता क्या आप अलग तरह की फिल्में बनाने का रिस्क लेने को तैयार हैं?

बतौर निर्माता क्या आप अलग तरह की फिल्में बनाने का रिस्क लेने को तैयार हैं?

प्रोड्यूसर तो कभी भी रिस्क नहीं लेते, वो तो जितना फिल्म में लगाते हैं उसे वो वापस पाना चाहते हैं। मुझे लगता है कि फिल्म में जो लोग पैसे लगाते हैं वो फिल्मों के विषयों को लेकर पैशिनेट नहीं होते। वो सिर्फ अपने एक्सेल शीट को भरना चाहते हैं। लेकिन ये जरुर है कुछ निर्माता ऐसे हैं जो कि फिल्मों में एक्सपेरिमेंट को लेकर काफी पैशिनेट हैं। उन्हीं में से एक मैं भी हूं। बतौर निर्माता मैं भी हर तरह की फिल्में बनाना चाहता हूं चाहे वो चेन्नई एक्सप्रेस हो या फिर देव डी।

आजकल एक ही फिल्म से एक से अधिक निर्माता जुड़े होते हैं। ये नया ट्रेंड क्यों शुरु हुआ है?

आजकल एक ही फिल्म से एक से अधिक निर्माता जुड़े होते हैं। ये नया ट्रेंड क्यों शुरु हुआ है?

मुझे लगता है कि ऐसा तब होता है जब निर्माता को या निर्देशक को अपनी फिल्म पर यकीन नहीं होता या फिर फिल्म के विषय पर किसी तरह का प्रश्नचिह्न होता है। जब कोई भी प्रोड्यूर या डायरेक्ट कोई ऐसी फिल्म बनाता है जो कि बॉलीवुड के फॉर्मूले से हटकर होती है तो वो ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट चाहते हैं। जितना सपोर्ट फिल्म को मिलेगा उतना ही फिल्म काम करेगी। अलग अलग प्रोड्यूसर्स के अलग अलग टैलेंट होते हैं तो वो साथ में आकर फिल्म को हिट बना सकते हैं। जैसे कि अगर अनुराग किसी नये टैलेंट को ला रहे हैं तो करन मार्टिंग और फिल्म के प्रमोशन का भार अच्छे से संभाल सकते हैं।

देव डी के आइडिये के लिए अनुराग आपको ही पूरा श्रेय देते हैं। कैसे आया ये आइडिया आपके दिमाग में?

देव डी के आइडिये के लिए अनुराग आपको ही पूरा श्रेय देते हैं। कैसे आया ये आइडिया आपके दिमाग में?

मेरी कोशिश हमेशा से ही यही रही है कि मैं जब भी कुछ बनाता हूं तो उसमें लोगों को सच्चाई भी दिखनी चाहिए और लोगों का एंटरटेनमेंट भी होना चाहिए। जब मैं देव डी का आइडिया लोगों को को बताता था कि एक बंदा है जो कि दारू पीता है और ड्रग्स लेता है उसकी एक महबूबा है जिसे वो पूरा नहीं कर पा रहा है और फिर वो एक वैश्या के पास जाता है और वैश्या उस बंदे को अपना लेती है प्यार करने लगती है लेकिन फिर भी वो अपनी महबूबा को नहीं भूल पा रहा है। और अंत में वो मर जाता है तो लोग मुझे यही कहते थे कि ये युरोप नहीं है इंडिया है और यहां पर ऐसी फिल्में नहीं बनती हैं। तो मैं उनसे कहता था कि ऐसी फिल्में तो बन चुकी हैं और हिट भी रही हैं वो है देवदास। उसके बाद जब अनुराग तक मेरा ये आइडिया पहुंचा तो मेरी ये नॉन कमर्शियल फिल्म कमर्शियल बन गयी। तो आपको सिर्फ एक आइडिया लाना है आउट ऑफ दि बॉक्स सोचना है और आपका आइडिया हिट हो सकता है। वन बाय टू भी आउट ऑफ दि बॉक्स है। लेकिन ये बॉक्स के अंदर रह रहे लोगों से भी रिलेटेड है उन्हें ये फिल्म दिखाएगी कि बॉक्स के बाहर कैसी जिदंगी है।

आपकी फिल्मों से दर्शकों को बहुत एक्सपेक्टेशन रहती है। वन बाय टू में आपके किरदार में क्या नया है और क्या आप खुद को इस किरदार से रिलेट करते हैं?

आपकी फिल्मों से दर्शकों को बहुत एक्सपेक्टेशन रहती है। वन बाय टू में आपके किरदार में क्या नया है और क्या आप खुद को इस किरदार से रिलेट करते हैं?

अमित एक ऑफिस में काम करता है एक मिडिल क्लास मैन है। वो शहर में रहने वाला का कॉमन मैन है। अक्सर मैं फिल्मों में अपने किरदार से बिल्कुल ही मैच नहीं करता था लेकिन अमित किरदार से मैं काफी रिलेट कर सकता हूं। अगर मैं खुद को रिलेट कर सकता हूं और खुद को यकीन दिला सकता है कि मैं अमित हूं तभी मैं आपको भी यकीन दिला सकता हूं कि मैं अमित ही हूं। अमित के अपने कुछ सपने हैं लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में उलझकर वो अपने सपनों को साइड में रख देता है। और यही सपने उसकी जिदंगी में कभी कभी कुछ मुश्किलें पैदा कर देते हैं। कभी कभी अमित को लगता है कि वो जो कुछ कर रहा है वो सिर्फ जीने के लिए कर रहा है लेकिन वो असल मायने में जी नहीं रहा है।

वन बाय टू में अपनी रियल लाइफ पार्टनर के साथ काम करने के लिए कैसे हां कहा आपने? एक साथ परदे पर आने के लिए वन बाय टू ही क्यों चुनी?

वन बाय टू में अपनी रियल लाइफ पार्टनर के साथ काम करने के लिए कैसे हां कहा आपने? एक साथ परदे पर आने के लिए वन बाय टू ही क्यों चुनी?

मैंने देविका को एक दिन बोला कि बहुत वक्त हो गया है तुम्हें फिल्म डायरेक्ट किये हुए। मेरे पास एक आइडिया था और उसके पास भी। जब हम दोनों ने एक दूसरे के साथ आइडिया शेयर किया तो मुझे लगा कि उसका आइडिया परफेक्ट है। तब देविका ने कहा कि मुझे लगता है कि आप और प्रीती ही इस फिल्म के लीड रोल के लिए परफेक्ट रहेंगे। तब मुझे भी ये ख्याल तक नहीं आया था कि मैं फिल्म में लीड करुंगा। लेकन जब फिल्म की कहानी पूरी हुई तो मुझे फिल्म बहुत पसंद आई और मैंने हां कर दी।

वन बाय टू की शूंटिग खत्म करने के बाद प्रीती को बतौर एक्ट्रेस कैसा पाते हैं आप?

वन बाय टू की शूंटिग खत्म करने के बाद प्रीती को बतौर एक्ट्रेस कैसा पाते हैं आप?

प्रीती बहुत बेहतर हो गयीं पहले से। बतौर ऐक्ट्रेस प्रीती बहुत ही भोली हैं। वो बहुत खूबसूरत हैं और स्क्रीन पर भी उनकी खूबसूरती काफी निखर कर आती है। खूबसूरती के अलावा वो बहुत ही डाउन टू अर्थ पर्सन हैं।

प्रीती का सेट पर होना कितना सपोर्टिव था आपके लिए?

प्रीती का सेट पर होना कितना सपोर्टिव था आपके लिए?

ये तो सच है कि जब आप अपने पार्टनर के साथ काम करते हैं आपको फिजिकली, मेंटली काफी सपोर्ट मिलता है। जब आपका पार्टनर सेट पर होता है तो आप अपने आप ही खुद को और स्ट्रॉंग महसूस करने लगते हैं।

देओल फैमिली एक्शन फिल्मों के लिए काफी फेमस रही है। लेकिन आपने अपनी तरफ से अलग अलग फिल्में करके खुद का एक अलग जोनर ही बना लिया है। क्या आने वाले समय में एक्शन में भी अपनी किस्मत आजमान चाहेंगे?

देओल फैमिली एक्शन फिल्मों के लिए काफी फेमस रही है। लेकिन आपने अपनी तरफ से अलग अलग फिल्में करके खुद का एक अलग जोनर ही बना लिया है। क्या आने वाले समय में एक्शन में भी अपनी किस्मत आजमान चाहेंगे?

अगर सही फिल्म आएगी तो मैं जरुर करुंगा। लेकिन सच तो ये है कि एक्शन फिल्में बनाने के लिए बहुत बजट की जरुरत होती है। मैं फॉर्मूला एक्शन फिल्में करना पसंद करुंगा और करना भी चाहता हूं।

साल 2014 की शुरुआत हुई जॉन अब्राहम की शादी से। तो आप और प्रीती ने इस साल अपने रिलेशनशिप को अगले लेवल पर ले जाने के बारे में कुछ सोचा है?

साल 2014 की शुरुआत हुई जॉन अब्राहम की शादी से। तो आप और प्रीती ने इस साल अपने रिलेशनशिप को अगले लेवल पर ले जाने के बारे में कुछ सोचा है?

शादी का तो अभी ऐसा कुछ प्लान नहीं है। (हंसते हुए) आपको नहीं पता कि हमने और प्रीती ने तो कबसे शादी कर ली है। जनमों पहले। सात जनमों से ही हमारी शादी हो चुकी है अगले जनम में शायद तलाक भी कर लूं।

English summary
Abhay Deol says in his exclusive interview with Oneindia that after becoming Producer he first learn to become more diplomatic. Talking about his girlfriend and One By Two actress Preeti Abhay said He and Preeti are already married. Abhay said Preeti is very fine actress and also had grown up from one movie only.
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