अंतोनियोनीः मानव मन के चितेरे
इंग्मार बर्गमैन के साथ ही पिछले दिनों जाने-माने फिल्मकार माइकेलएंजेलो अंतोनियोनी की भी 94 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई. उनके निधन के साथ विश्व सिनेमा की एक और महत्वपूर्ण शख्सियत हमसे छिन गई. उनका नाम सत्यजीत रे, ज्यां लुक गोदार, फ्रांसुआ त्रूफो जैसे महान निर्देशकों के साथ लिया जाता था.
दुनिया के कुछ दूसरे महान फिल्मकारों के मुकाबले अंतोनियोनी को देर से अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला. शेखर कपूर की तरह उनकी पहली फीचर 38 साल की उम्र में दर्शकों के सामने आई. यह फिल्म थी,'क्रोनाका दि उन अमोरे". दस साल बाद सन् 1960 में कान में आयोजित फिल्म महोत्सव में उनकी फिल्म'लावेंतुरा"चर्चा का विषय बनी.
हालांकि अंतोनियोनी की फिल्में अक्सर मानव मन की गहराइयों को टटोलती थीं, मगर उनकी वैश्विक अपील थी, जो मनुष्य की त्रासदी की बयान करती थी. करीब दो दशकों तक अंतोनियोनी ने अपनी फिल्मों के जरिए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की संवेदना को अभिव्यक्त करने का काम किया.


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