पहले घर में डिजाइनर सोफा के लिए नहीं थे SRK के पास पैसे, 'मन्नत' लेने के बाद हुई आर्थिक तंगी लेकिन गौरी...

Shahrukh Khan and Gauri Khan first home: शाहरुख खान और गौरी खान पिछले 3 दशकों से एक दूसरे का साथ निभा रहे हैं। दोनों बॉलीवुड के पावर कपल गिने जाते हैं और उनके प्यार की मिसाल दी जाती है। शाहरुख खान तो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं लेकिन उनकी पत्नी गौरी खान भी एक सफल इंटिरियर डिजाइनर हैं। 1991 में शादी के बाद हर अच्छे-बुरे वक्त में दोनों ने एक दूसरे का साथ दिया।
गौरी खान ने हाल ही में अपनी कॉफी टेबल बुक 'माई लाइफ इन डिजाइन' को लॉन्च किया है जिसमें उन्होंने अपने डिजाइनर बनने की कहानी को भी साझा किया है। एक सोशल मीडिया यूजर ने किताब के एक पेज की तस्वीर शेयर की है जिसमें शाहरुख खान ने गौरी के डिजाइनर बनने के सफर पर प्रकाश डाला है। उन्होंने किताब में शेयर किया है कि जब आर्यन का जन्म होने वाला था तब उन्होंने मुंबई में पहला घर खरीदा था।
शाहरुख खान ने किताब में शेयर किया है- 'यह तब शुरू हुआ, जब हमने मुंबई में अपना पहला घर खरीदा था। कहने गलत नहीं होगा कि, यह हमारे साधनों से ऊपर था, लेकिन हमें रहने के लिए घर की जरूरत थी, क्योंकि गौरी आर्यन को जन्म देने वाली थी। घर के लिए फिर भी हमारे पास पैसे थे, लेकिन हम एक इंटीरियर डिजाइनर का खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए यह काम गौरी ने ले लिया।
शाहरुख खान ने शेयर किया है कि पहले घर में डिजाइनर सोफा लगाने के उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने और गौरी ने एक-एक सामान खरीदकर घर सजाने का फैसला लिया था। गौरी ने नोटबुक में सोफा डिजाइन किया था और बढ़ई से उसे ठीक वैसे ही बनाने के लिए कहा था। कुछ सालों के बाद शाहरुख खान ने अपना बंगला 'मन्नत' खरीदा था।
शाहरुख खान ने यह भी शेयर किया कि गौरी खान ने जरूरत की वजह से इंटीरियर का काम शुरू किया था। शाहरुख खान ने याद किया कि कैसे उन्होंने अपने जीवन की सारी कमाई 'मन्नत' को खरीदने में लगा दी थी और इसके बाद वो और गौरी आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। तभी गौरी ने बड़े घर के अनुसार जगह को समझने के लिए खुद को प्रशिक्षित किया और घर बनाने के लिए बुनियादी सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स का पता लगाना सीखा।
उन्होंने लिखा है- 'कहानी फिर से वही थी, हमने अपना सारा पैसा प्रॉपर्टी पर खर्च कर दिया था और इंटीरियर के लिए कुछ भी नहीं बचा था। इसलिए, डिफ़ॉल्ट रूप से गौरी हमारी इंटीरियर डिजाइनर बन गईं। धीरे-धीरे, एक जरूरत के रूप में जो शुरू हुआ वह एक जुनून में बदल गया।'


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