"झूम इंडिया" में घूमता विवादों का कारवां
विवाद इन दिनों हर रिएलिटी शो की पहचान बन चुके हैं. कभी दो जजेस के बीच झडप विवाद का मुद्दा बन जाती हैं तो कभी जजेस की प्रतियोगियों को फटकार को रेखांकित किया जाता है. पिछले दिनों कुछ इसी तरह की एक विवादास्पद घटना सहारा वन चैनल पर प्रसारित होने वाले रिएलिटी शो “झूम इंडिया" के सेट पर घटित हुई जब जज शबाना आज़मी की तरफ प्रतियोगी संजीवनी द्वारा फेंके गए कुछ शब्दों ने दूसरे जज महेश भट्ट को न सिर्फ आहत किया बल्कि सेट छोडने पर भी मजबूर कर दिया.
उनका मानना था कि एक प्रतियोगी को जज की तौहीन करने का कोई अधिकार नहीं है. इस सिलसिले में वहां पर मौजूद एक और जज आनंद जी से जब इस मुद्दे पर बात की तो उन्होंने कहा “यह सब एक दूसरे की नासमझी के कारण हुआ. आज की पीढी में बडों के प्रति सम्मान नहीं रह गया है. यदि उन्होंने कुछ कह दिया तो दुबारा वे अपनी बात समझा सकती थी मगर अफसोस इगो के कारण बातें साफ नहीं हो पाईं. संजीवनी टीचर नहीं हैं उसे यदि कुछ कहते हैं तो उसे सुनना चाहिए. हमें अपना मुकाम पाने में वर्षों लग गए, पांच दिन में कोई गायक नहीं बनता है.
साथ ही दूसरों को देखकर फ्रस्ट्रेशन में उन्होंने काफी कुछ कह दिया जो उन्हें नहीं कहना चाहिए था. मैं संजीवनी का पक्ष भी यदि लूं तब भी न चाह्ते हुए मुझे उसकी गलती ही मान्य करनी पडेगी. अगर गलती हो गई थी तो उन्हें बच्चों की तरह उनसे उलझना नहीं चाहिए था. यदि बडे कुछ कह रहे हैं तो उसे सुनना चाहिए. दरअसल मैं इन सबका ज़िम्मेदार आज की अंग्रेज़ी शिक्षा को मानता हूं क्योंकि अंग्रेज़ी में सिर्फ मैं और तुम है, हम नहीं है.“
जहां एक तरफ आनंद जी संजीवनी को ज़िम्मेदार मान रहे हैं वहीं संजीवनी अपने को पाक दामन साबित करते हुए इन सबकी वजह कैमरे पर दिए अपने कमेंट को मानती हैं. उनका कहना है “मेरे कमेंट को गलत तरीके से दिखाकर मुझे ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. मेरे अनुसार महेश जी इस प्रतियोगिता की आत्मा हैं और शबाना जी इंटेलिजेंट कमेंट है. उनके बिना यह शो अधूरा है.
दरअसल मेरी बात को हमेशा तोड मरोडकर प्रस्तुत करने के कारण यह सब हुआ है. मैं सारे जजेस की बहुत इज्जत करती हूं साथ ही इस बात से भी सहमत हूं कि वे अपने क्षेत्र में काफी काबिल हैं इसलिए यहां हैं.“ गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित इस शो के कॉसेप्ट से संजीवनी काफी प्रभावित हैं. मगर जतिन जी के कटाक्ष के बारे में संजीवनी कहती हैं “मैंने भी संगीत सीखा है और जानती हूं कि गुरु शिष्य परंपरा क्या होती है. उन्हें यह बात मुझे बताने की ज़रूरत नहीं है. जहां तक शबाना जी के प्रति सम्मान की बात है मेरे लिए वह पूज्यनीय हैं. मगर फिर भी उन्हें लगता है तो मैं उन्हें एक बार फिर अपनी बात समझाने की कोशिश करूंगी.“


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