सब धर्मो से नाता है पूजा का

पूजा का मानना है वह एक ऐसे परिवार से हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वह बताती है, “मेरी दादी ब्रिटीश थीं, मेरे दादा जी से उनकी मुलाकात ऑक्सफोर्ड में हुई थी और शादी के बाद दोनों भारत आ गए।
मज़े की बात यह है कि भारत आने के बाद दादा जी के साथ मिलकर दादी ने अपनी कौम अर्थात ब्रिटीश सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और सिक्किम के कर्मापा मोनेस्ट्री में रहने लगी।
मेरी दादी वहां की पहली नन थी जो सबसे ऊंचे ओहदे पर थी। काफी सालों तक मेरे पिता भी वहीं रहे इसलिए उनके साथ हम भाई बहनों पर बौद्ध धर्म का अधिक प्रभाव रहा है। आज भी मेरी ज़िन्दगी तथा मेरे घर में बौद्ध धर्म का प्रभाव अधिक है।
'कर्मापा" की तरफ से मुझे एक नाम भी मिला है 'कर्मा सरस्वती"। बौद्ध धर्म के अलावा मैं हिन्दु धर्म को भी बहुत मानती हूं और इसके लिए मैं अपनी मां को धन्यवाद देती हूं जो बंगाली थी।
अपने नृत्य के ज़रिए उन्होंने हमें रामायण, महाभारत, भगवदगीता, काली तांडव और दूर्गा पूजा से परिचय करवाया था। पिता सिख थे सो मैंने गुरुनानक से अपनी शिक्षा ग्रहण की।“
अपनी बात को आगे बढाते हुए पूजा बताती हैं, “बौद्ध धर्म के प्रभाव के साथ मेरा हिन्दु नाम 'पूजा" है जो सिख उपनाम 'बेदी" के साथ है। मज़े की बात यह है कि मैंने मुस्लिम से शादी की और वहां से भी मुझे एक नाम मिला 'नूरजहां"।
मेरे पति के माता पिता मुस्लिम और पारसी हैं सो मेरे बच्चों में हिन्दु, बौद्ध, सिख, मुस्लिम और पारसी परिवार का खून है। वैसे पूजा ने ईसाईं धर्म का तो ज़िक्र ही नहीं किया जो शायद उनकी दादी रही हों।
भले ही उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था मगर ब्रिटीश होने के नाते पहले वह ईसाईं थी। खैर पूजा हमें इस बात की खुशी है कि हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाईं की एकता के सपनों को सही मायने में आप साकार कर रही हैं।


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