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    प्रतियोगिता तगडी होनी चाहिए:सोहैल सेन

    By Staff
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    Sohail Sen
    फिल्म 'सिर्फ" से संगीत निर्देशन में कदम रखने जा रहे सोहैल सेन अपने खानदान की चौथी पीढी के रूप में अपनी परंपरा को आगे बढाने जा रहे हैं. 'सिर्फ" के संगीत का ज़िक्र करते हुए सोहैल बताते हैं 'इस फिल्म का संगीत काफी मॉडर्न है. बावजूद इसके सभी गीतों में मेलोडी का ध्यान रखा गया है. 'सिर्फ" के गीतों मे के के का गाया 'पहला वो प्यार" सभी का पसंदीदा गीत है. साथ ही कुणाल गांजावाला का गाया 'मुम्बई नगरिया" तथा 'शहर" रोज़मर्रा की ज़िंदगी गुजारने वाले लोगों की दास्तां बयां कर रही है.

    के के, कुणाल गांजावाला, श्रेया घोषाल तथा शान जैसे प्रतिष्ठित गायकों के साथ काम करने का अनुभव सोहैल के लिए काफी अच्छा रहा. उन्होंने बतौर नए संगीतकारों में सोहैल को न सिर्फ इज़्ज़त दी बल्कि उनके काम को सराहा भी. मेहबूब के गीतों के साथ अपने संगीत का जादू चलाने वाले सोहैल सेन अपने ज़माने के बेहतरीन संगीत निर्देशक समीर सेन के सुपुत्र हैं. संगीत के क्षेत्र में उनकी प्रारंभिक शिक्षा पांच साल से शुरू हुई थी. उनके पहले गुरु उनके दादा जी शंभू सेन थे. रिदम इंस्ट्रुमेंट की शिक्षा उन्होंने अपने पापा समीर सेन से ग्रहण की है तथा प्यानो गुरु टोनी पिंटो से सीखा है.

    संगीत के माहौल में पले बढे सोहैल ने तेरह वर्ष की उम्र में फिल्म 'रोशनी" के लिए संगीत दिया था. उनके संगीत के लिए अपनी नायाब आवाज़ दी थी कविता कृष्णमूर्ति ने. सोहैल कहते हैं “मैं हमेशा अपने दादाजी के साथ रहता था, उनके साथ हर रिकॉर्डिंग में जाता था. यही नहीं मैंने अठारह वर्ष की आयु से अपने पापा को असिस्ट करना शुरू कर दिया था. मेहुल कुमार की 'कोहराम" में अपने पापा के साथ मिलकर बैकग्राउंड म्युज़िक दिया था और स्वतंत्र रूप से फिल्म 'शीशा" के लिए बैकग्राउंड म्युज़िक दे चुके हैं.

    “ क्या इस क्षेत्र में पापा की पहचान काम आ रही है ? “देखिए मेरे लिए पापा की पहचान से अधिक उनका अनुभव काम आ रहा है.“ क्या दूसरों की तरह दूसरों के संगीत से प्रेरित होंगे या अपने संगीत को प्राथमिकता देंगे ? इस सवाल के जवाब मं एक बार फिर सोहैल पूरे आत्मविश्वास से कहते हैं “मैं अपने काम से लोगों को ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना चाहता हूं. दूसरों के संगीत को कॉपी करने की बजाय मैं क्रिएट करना पसंद करूंगा.“ वैसे अपनी बात को साफ करते हुए सोहैल यह कहना नहीं भूलते हैं कि सात सूर हैं कहीं न कहीं तो मिलेंगे ही.

    इन दिनों संगीत के क्षेत्र में काफी प्रतियोगिता का आलम है. सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के संगीतकार भी बॉलीवुड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. उनसे किसी तरह का डर है ? “जी हां आपकी बातों से मैं सहमत हूं. आ तो काफी रहे है मगर देखना यह है कि न्याय कितने लोग करते हैं. वैसे मैं काफी खुश हूं तथा उत्साहित भी हूं क्योंकि किसी भी क्षेत्र में प्रतियोगिता तगडी होनी चाहिए.“

    अपने पापा के अलावा पूराने संगीतकारों में सोहैल, मदन मोहन तथा आर डी बर्मन के ज़बर्दस्त प्रशंसक हैं. सिर्फ पूराने ही नहीं आज के संगीतकारों में सोहैल प्रीतम और ए आर रहमान से काफी प्रभावित हैं. 'सिर्फ" के अलावा सोहैल सहारा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनने वाली सलीम आफताब की फिल्म 'द मर्डरर" के लिए संगीत दे रहे हैं. इस फिल्म में बतौर नायक मिमोह चक्रवर्ती है.

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