एक इंतज़ार और सही...

दरअसल हुआ यूं कि पिछले दिनों साहिल चड्ढा की फिल्म 'थोडी़ लाइफ थोडा़ मैजिक" के म्यूज़िक लाँच में अमिताभ बच्चन अपनी आदत के अनुसार समय पर पहुंच गए। वैसे कुछ उनकी इस आदत को उनकी सफलता का मंत्र समझते हैं तो कुछ पागलपन।
खैर मगर हम पहले वर्ग के लोगों में शामिल होते हुए समय के सम्मान को उनकी कामयाबी का मंत्र कहेंगे। साढे सात बजे शुरू होनेवाले इस समारोह में बतौर विशेष अतिथि पधारे अमिताभ के दिल को उस वक़्त थोडा सा धक्का लगा जब उन्होंने अपने स्वागत के लिए किसी को आते नहीं देखा।
खैर विनम्र स्वभाव वाले अमिताभ बच्चन, जिन्हें आज भी एंग्री यंग मैन समझा जाता है, एक कोना अपने लिए सुरक्षित करते हुए वहां खडे हो गए। उसके बाद कुछ लोगों को होश आया और वे आनन फानन में अमिताभ को अंदर ले गए (और इंतज़ार करवाने के लिए)।
आखिरकार फिल्म के निर्देशक साहिल चड्ढा हाज़िर हुए और औपचारिकता पूरी करते हुए अमिताभ से अपने लेट लतीफी के लिए माफी मांग ली। साढे़ सात बजे का समारोह साढे़ नौ बजे शुरू हुआ यानी कि पूरे दो घंटे बाद। दो घंटे बर्बाद करने के बाद अमिताभ ने फिल्म का ऑडियो रिलीज़ किया और वहां से नौ दो ग्यारह हो गए।
वैसे बरसों से बॉलीवुड का हिस्सा रह चुके अमिताभ बच्चन को इंतज़ार करने की आदत हो गई होगी क्योंकि सभी उनकी तरह समय के पाबंद नहीं होते। हां यह और बात है कि मीडिया ने इसे कुछ ज़्यादा ही तूल दे दिया। मगर क्या करें जिस तरह इंतज़ार करना अमिताभ बच्चन की आदत हो गई है, उसी तरह छोटी सी बात को तूल देना मीडिया की आदत हो गई है।


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