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    अतुल के साथ स्कूल चलें हम

    By Staff
    |
    Atul Kulkarni
    बचपन में स्कूल और पढाई से दूर भागने वाले अतुल कुलकर्णी एक बार फिर अपने बचपन में लौटने के इरादे से बाल शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं। प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए कार्यरत अपनी संस्था 'क्वेस्ट" के बारे में ज़िक्र करते हुए उन्होंने हमें बताया, “'क्वेस्ट" अर्थात 'क्वालिटी एज्यूकेशन सपोर्ट ट्रस्ट"। यह संस्था मुख्य रूप से बच्चों की प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए कार्यरत है। महाराष्ट्र के वाडा स्थित कस्बे में कुछ आदिवासी गांव हैं, जहां के सात गांवों में हमनें यह शुरूआत की है। यहां पर तकरीबन साढे तीन सौ चार सौ बच्चों के साथ हम काम कर रहे हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली का प्रयोग करके हमनें कुछ किताबे लिखी हैं जिनके माध्यम से बच्चें आसानी से लिख पढ सके। अभी हाल ही में हमनें ऐसी आठ किताबों की एक सीरिज़ निकाली है जिसका नाम है 'माझे पुस्तक"।

    इनकी ज़रुरत क्यों महसूस हुई ?
    इस सवाल के मद्देनज़र अतुल का कहना है, “सरकारी और गैर सरकारी आंकडों के अनुसार समय समय पर यह बात उठती रहती है कि सातवी कक्षा में पहुंचने के बावजूद बच्चों को पढना लिखना नहीं आता है। यह मूलभूत समस्या विशेष रूप से छोटे छोटे गांवों के बच्चों के साथ आती है। अत: हमनें अलग अलग शोधों के आधार पर पहली और दुसरी के बच्चों के लिए इस तरह की आठ किताबें ईजाद की हैं जिससे बच्चों को पढने और लिखने में आसानी हो। आम तौर पर हमारी शिक्षा प्रणाली, पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली से प्रेरित है। यही वजह है कि गांव के बच्चे इस शिक्षा प्रणाली से खुद को रिलेट नहीं कर पाते हैं।“

    इन किताबों के बारे में आगे बताते हुए अतुल ने हमें बताया, “इन आठ किताबों को हमारी संस्था के निदेशक निलेश निमकर ने लिखी हैं। इन किताबों के ज़रिए हम एक नया प्रयोग कर रहे हैं यदि यह प्रयोग सफल होता है तो हम अगले साल इसे बाज़ार में अन्य बच्चों के लिए भी जारी करेंगे।“ फिल्म, थियेटर और टेलीविज़न से जुडे अतुल उन लोगो में से हैं जो अपने बचपन में कभी लौटना नहीं चाहते क्योंकि उनके अनुसार उनका बचपन अधिकतर स्कूल और पढाई से जुडा रहा, जिसमें उन्हें ज़रा भी दिलचस्पी नहीं थी।

    तो आखिरकार क्या वह चीज़ है जो उन्हें ऐसी संस्था से जुडने के लिए प्रेरित करती है ?
    इस सवाल के जवाब में अतुल अपनी यादों में खोते हुए कहते हैं, “हम हमेशा यह कहते हैं या सुनते हैं कि हमारे आजू बाजू जो हो रहा है वह गलत हो रहा है। उसे हमें बदलना चाहिए। मुझे लगता है अगर कुछ बदलना है तो पहले राजनीति को बदलो। राजनीति एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से हम सारी चीज़ों में बदलाव ला सकते हैं। दुसरी अहम चीज़ है प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक शिक्षा में बदलाव। हमारी सारी समस्याओं की जड है शिक्षा। दुर्भाग्यवश आज़ादी के बाद हमारी शिक्षा पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया।“

    वह कौन सा मोड था जब आपको लगा कि आपको शिक्षा के प्रति अधिक जागरुक होना है ?
    “मैं हमेशा से यही सोचता था कि मैं मुंबई में अधिक नहीं रहूंगा। अपने काम से रिटायर होकर मैं हमेशा से एक छोटे से गांव में जाकर रहना चाहता हूं। वहां जाकर मैं क्या करूंगा यह जब मैंने सोचा तब मुझे प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक शिक्षा का ध्यान आया। इससे जुडने के लिए मैंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बातचीत की और उसके बाद हमनें 'क्वेस्ट" नाम की इस संस्था का शुभारंभ किया।“ अतुल ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा।

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