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OUCH..फिल्म को नहीं मिला सर्टिफिकेट..लिया बदला..मिडिल फिंगर दिखा के !

By: shivani verma
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काफी समय चल रहे विवादों के बाद फिल्म लिप्स्टिक अंडर माई बुर्का का पोस्टर जारी किया गया है जो काफी चर्चाओं में है। चर्चा का कारण है कि पोस्टर में दिखी मिडिल फिंगर। सोचा जा रहा है कि आखिर ये इशारा है तो किसकी तरफ है।

चलिए थोड़ा पीछे चलते हैं। दरअसल, पहले सेंसर बोर्ड के चीफ पहलाज निहलानी ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि फिल्म में हद से ज्यादा सेक्सुअल कंटेंट है और भाषा भी अमर्यादित है।

इस बात से हमारे संस्कारी सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी और उसने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। लेकिन फिल्म के डायरेक्टर भी हार मानने वाले थोड़ी थे। वो चले गए The Film Certification Appellate Tribunal (FCAT) की शरण में।

जिसके बाद सेंसर बोर्ड की बात को काटते हुए FCAT ने फिल्म को कुछ कट्स के साथ 'ए' सर्टिफिकेट दे दिया। लेकिन फिल्ममेकर्स को कुछ सेक्स सीन कम करने की बात कही।

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अब सोचने वाली बात ये है कि क्या पोस्टर में दिखाई गई मिडिल फिंगर सेंसर बोर्ड की तरफ इशारा है। खैर, कहा तो ये जा रहा है कि मिडिल फिंगर पुरुष प्रधान समाज की ओर एक इशारा है।

जो भी हो..समझने वाले तो समझ ही जाएंगे। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब सेंसर बोर्ड ने ऐसे कंटेंट को सर्टिफिकेट देने से मना किया है। इससे पहले भी वो कई फिल्मों के साथ ऐसा कर चुके हैं। डालिए एक नज़र..

फिल्लौरी - हनुमान चालीसा सीन

फिल्लौरी - हनुमान चालीसा सीन

फिल्म में एक सीन है जहां फिल्म के हीरो सूरज शर्मा, अनुष्का शर्मा के भूत को देखकर डर जाते हैं। और डर के मारे वो बाथटब में हनुमान चालीसा पढ़ने लगते हैं। लेकिन सेंसर बोर्ड का मानना है कि आप नहाते वक्त हनुमान चालीसा नहीं पढ़ सकते, इसलिए पूरे हनुमान चालीसा वाले सीन को कट करने की मांग की गई।

जॉली एलएलबी 2

जॉली एलएलबी 2

पूरी की पूरी फिल्म लखनऊ में बनी है लेकिन फिल्म में लखनऊ के ज़िक्र से सेंसर बोर्ड को दिक्कत थी। इसलिए फिल्म में ऐसे कई शब्द बदले गए हैं। होली के गाने में लखनऊ शब्द हटाने की मांग की गई है। वहीं लखनऊ कचहरी में कोई चीज़ टाइम पर हुई है - इस डायलॉग में लखनऊ को लोकल से बदला गया है। ये दिल्ली नहीं लखनऊ है - इस डायलॉग में लखनऊ को अवध से बदला गया है।

उड़ता पंजाब

उड़ता पंजाब

उड़ता पंजाब ड्रग्स पर बनी एक फिल्म है कि कैसे पंजाब में इस कारोबार ने युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है। लेकिन सेंसर बोर्ड चाहता था कि फिल्म दिखाई जाए...बिना ड्रग्स के...किसी को कुछ समझ आया?

40 कट

40 कट

फिल्म में शाहिद कपूर ने एक ड्रग एडिक्ट रॉकस्टार का किरदार निभाया। और ड्रग डोज़ के बाद नशे में उनकी गालियों से लेकर ड्रग्स के कश खींचने तक की मदहोशी...कुछ भी सेंसर बोर्ड को रास नहीं आई। और इसीलिए फिल्म में 40 कट मांगे गए।

रमन राघव 2.0

रमन राघव 2.0

इस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड ने 6 कट की डिमांड की। इसमें काफी हिंसा है। जबकि फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का किरदार ही एक बेरहम हत्यारे का है।

गैंग्स ऑफ वसेपुर

गैंग्स ऑफ वसेपुर

अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ वसेपुर तो काफी समय तक सेंसर बोर्ड पर अटकी रही। फिल्म की भाषा से लेकर कंटेंट तक सब कुछ बोर्ड को नापसंद था। खासतौर से तेरी कह के लूंगा!

ब्लैक फ्राइडे

ब्लैक फ्राइडे

फिल्म इतनी ज़्यादा साफ और मुंहफट थी कि सबके होश ही उड़ गए। 1993 बंबई बम ब्लास्ट पर बनी इस फिल्म ने सब कुछ खोलकर रख दिया था। आज तक फिल्म बैन है और आधिकारिक रूप से रिलीज़ नहीं हुई हालांकि देखी सबने है।

गुलाल

गुलाल

स्टूडेंट पॉलिटिक्स पर बनी इस फिल्म से भी सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी। हालांकि थोड़ी मान मनौव्वल के बाद सब ठीक हो गया था।

 पांच

पांच

अनुराग कश्यप की इस फिल्म को आज तक रिलीज़ नहीं मिली है। हालांकि ये फिल्म भी देखी काफी लोगों ने है।

अगली

अगली

इस फिल्म के लिए भी सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी कि सिगरेट पीने के सी पर चेतावनी लिख कर आए। अनुराग ने साफ कहा कि लोग सिगरेट ना पिएं इसकी ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्रालय की है फिल्म इंडस्ट्री की नहीं।

English summary
Lipstick Under My Burkha: New poster is a gesture to Censor Board?
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