#TooMuch: पाकिस्तान पर गुस्सा निकालिए....किसी खान पर नहीं!

हाल ही में डिफेंस सूत्रों की मानें तो कश्मीर के उड़ी में जो हमला हुआ वो पाकिस्तान आर्मी ने करवाया। और इसमें हमारे 18 जवान शहीद हुए। इस बात का सबको खेद है। लेकिन इसके बाद एक अजीब सी डिमांड लोगों ने रखी - फवाद खान और माहिरा खान को पाकिस्तान वापस भेजने की।

दोनों पाकिस्तानी कलाकार हैं। जहां फवाद खान ऐ दिल है मुश्किल में नज़र आएंगे वहीं माहिरा खान शाहरूख खान स्टारर रईस में। और हमें ये जानकर बहुत दुख हुआ जब लोगों ने यह कहने में भी गुरेज नहीं किया कि दोनों कलाकार भारत के पैसे पर स्टारडम पा रहे हैं।

in-defense-of-fawad-khan

फवाद खान, सलमान खान की अगली होम प्रोडक्शन फिल्म और करण जौहर के साथ कैटरीना कैफ की फिल्म रात बाकी में दिखाई देने वाले हैं। इसके अलावा और कई बॉलीवुड प्रोजेक्ट से उनका नाम जुड़ रहा है लेकिन ये सब प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाने वाले हैं।

सलमान की फिल्म जनवरी में शुरू हो रही है और कैटरीना की नवंबर में। लेकिन इन सबके बीच उन्हें पाकिस्तान चुनने का रास्ता दिखा दिया गया है।
[बॉलीवुड में किसकी है 56 इंच की छाती!]

और ये सरासर गलत है। खासतौर से उन लोगों के लिए जो तब कुछ नहीं कहते जब इस देश का प्रधानमंत्री उस देश के प्रधानमंत्री को सरप्राइज़ देने गया उनके जन्मदिन पर।
[क्यों फवाद खान हैं सलमान खान का परफेक्ट रिप्लेसमेंट!]

मुद्दा ये नहीं है कि पाकिस्तानी कलाकार यहां काम क्यों कर रहे हैं अगर भारत वाकई अपने नियमों को इतना सख्त बनाए तो हर हिंदुस्तानी शायद उसका साथ दे कि पाकिस्तान से कोई ताल्लुक नहीं रखना है।

लेकिन एक तरफ उनके कलाकारों का दोहन करना और दूसरी तरफ उन पर ये तोहमत लगाना कि हमने उन्हें बनाया है, केवल हमारी दोहरी मानसिकता दिखाता है।

अब जिन्हें नहीं पता हो या जिन्होंने फवाद खान का अभिनय ना देखा हो तो उन्हें हम ये बताना चाहेंगे कि उनके जैसा कलाकार, वाकई नेमत है। इसलिए नहीं कि उन्हें खुदा ने खूबसूरती बख्शी है, लेकिन इसलिए कि उन्होंने अपनी कला को हर दम तराशा है और वो उनके काम में दिखता है।

कला कभी भी इंसान को राज्य की सीमा से नहीं बांध सकती और कुछ लोगों को ये बात समझने की बेहद ज़रूरत है कि कम से कम फवाद खान वो कलाकार नहीं है जिन्हें आपने बनाया है।

ससुराल सिमर का देखने वालों को ज़िंदगी गुलज़ार है जैसे बेहतरीन और कसे हुए नमूने देखने को मिलें ये भी अपने आप में बहुत बड़ी बात है। और कम से कम कलाकार की ज़मीनी इज़्जत तो आप कर ही सकते हैं।

चलते चलते एक और बात कला को कभी सभ्यता की ज़रूरत नहीं होती, सभ्यता तभी बनती है जब कला उसे संवार दे। इसलिए कला और कलाकार की कद्र करना सीखिए। ये बात बात पर वापस जाओ के नारे लगाने ही हैं, तो उनके लिए लगाइए जिनके लिए ये अहम हैं।

दबाव बनाना उस पर आसान होता है जो आप पर अपना दम नहीं दिखाए। दबाव उस पर बनाइए जिस पर वाकई बनाना चाहिए। और एक आखिरी बार गुज़ारिश है कि कला और कलाकार दोनों को ही ज़हर से दूर रखें!

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X