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    इस सुपरस्टार ने REJECT की ब्लॉकबस्टर रीमेक....बेवकूफी नहीं करना चाहते!

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    करण जौहर की सैरात रीमेक को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। जिन्हें नहीं पता, उनकी जानकारी के लिए बता दें कि सैरात पहली मराठी फिल्म है जिसने 100 करोड़ कमाए थे और करण जौहर इस फिल्म से इशान खट्टर और जान्हवी कपूर को लॉन्च करने वाले थे।

    लेकिन अब सैरात डायरेक्टर ने करण जौहर को फिल्म बनाने में मदद करने से मना कर दिया है। करण चाहते थे कि वो हिंदी रीमेक के डायरेक्टर शशांक खेतान को टिप्स दें।

    वहीं मराठी फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले की मानें तो फिल्म में करण जौहर हीरोइन को गांव की लड़की नहीं दिखाना चाहते थे और ना ही हीरो गरीब हीरो को गरीब दिखाना चाहते थे।

    हीरोइन अच्छे खासे कपड़े पहनेगी। वहीं हीरो की भी शानदार बॉडी और बाइसेप्स होंगे। नागराज का मानना था कि ऐसे फिल्म का सार ही खत्म हो गया और वो ऐसी फिल्म का साथ नहीं देंगे।

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    वहीं कऱण जौहर से जुड़े एक सूत्र की मानें तो वो इस फिल्म से श्रीदेवी की बेटी को लॉन्च कर रहे हैं। वो उसे गरीब कैसे दिखा सकते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि वो श्रीदेवी की बेटी है, वो बेस्ट कपड़ों में दिखेगी। (Nepotism का झंडा गाड़ने वाले कहां गए!)

    बहरहाल, करण जौहर का गरीबी से कितना नाता है ये तो आप गरीब सिद्धार्थ मल्होत्रा (स्टूडेंट ऑफ द ईयर), गरीब काजोल (कभी खुशी कभी गम), गरीब प्रीती ज़िंटा (कल हो ना हो) देखकर समझ ही गए होंगे।

    लेकिन हां, इस बार किसी ने उनके मुंह पर तमाचा ज़रूर मारा है। वैसे तो यहां सब बॉलीवुड फैन्स हैं लेकिन फिर भी हम आपको बता रहे हैं कुछ मराठी फिल्में जो इतनी शानदार हैं कि ज़रूर देखनी चाहिए -

    सैरात

    सैरात

    'सैरात' एक लव स्टोरी है। यह समाज के रीति रिवाजों के खिलाफ लड़ते दो प्रेमियों की अनोखी कहानी है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 100 करो़ड़ कमाने वाली पहली फिल्म है।

    श्वास

    श्वास

    2004 की ये फिल्म ऑस्कर में छठें स्थान पर थीं। फिल्म की कहानी गाँव के एक बच्चे और उसके दादा के इर्द-गिर्द घूमती है। बच्चे को कैंसर हो जाता है। जब उसके दादा उसे इलाज के लिए शहर ले जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि बच्चे का तुरंत ऑपरेशन जरुरी है और ऑपरेशन में बच्चे के आंखों की रोशनी चली जाएगी। फिर उसके दादाजी जितना कुछ दिखा सकते हैं उसे दिखाते हैं।

    पुणे 52

    पुणे 52

    पुणे 52 एक डिटेक्टिव और उसकी बीवी की कहानी है। ये डिटेक्टिव एक केस पर काम करते करते एक हसीना के कुछ ज़्यादा ही करीब आने लगता है। फिल्म शानदार थ्रिलर है।

    नटसम्राट

    नटसम्राट

    महेश मांजरेकर द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'नटसम्राट' महाराष्ट्र के बेहद लोकप्रिय नाटक 'नटसम्राट' पर आधारित है। मराठी में बनी इस फ़िल्म ने पहले हफ़्ते में 16 करोड़ की कमाई की जो अपने आपमें बहुत बड़ी बात है क्योंकि रीजनल सिनेमा होते हुए भी इस फ़िल्म का बहुत बड़ा कलेक्शन है।

    नटरंग

    नटरंग

    फिल्म आनंद यादव के उपन्यास पर बनी है। फिल्म एक थियेटर आर्टिस्ट की कहानी है जो समाज और परिवार के लिए अपनी कला के साथ कंप्रोमाइज़ किया।

    मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय

    मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय

    फ़िल्म की शुरुआत दिनकर मारुतराव भोसले की दिनचर्या से शुरू होती है जो मुंबई का एक आम मध्यम वर्गीय बैंक में कार्य करने वाला आदमी है। कहानी में बताया जाता है की किस तरह भोसले कभी गर्वशाली मराष्ट्रीय व्यक्ति के के गिरते व्यक्तिमत्व का प्रतिनिधत्व करता है। भोसले बिना विरोध किए अपनी बेईज्ज़ती सहन करते रहता है।

    किल्ला

    किल्ला

    किल्ला एक शानदार फिल्म है। शहर से गांव में आकर रहने वाले एक लड़के की कहानी। उसकी दुनिया, उसकी दिक्कतें और उसके सपने।

    हरीषचंद्राची फैक्ट्री

    हरीषचंद्राची फैक्ट्री

    भारत में सिनेमा का जन्म कैसे हुआ ये फिल्म उसकी कहानी। और जितना शानदार ये विषय है उतने ही बेहतरीन तरीके से बनाई गई ये फिल्म है।

    फंड्री

    फंड्री

    फिल्म एक पिछड़ी जात के लड़के और अमीर जात की लड़की की बहुत ही प्यारी सी प्रेम कहानी है।

    डोंबीवली फास्ट

    डोंबीवली फास्ट

    फिल्म एक आम और ईमानदार नागिरक की कहानी है जो रोज़ के भ्रष्टाचार और बुराइयों से बुरी तरह से उकता चुका है।

    देऊल

    देऊल

    देऊल 2011 में बनी भारतीय मराठी फ़िल्म है जिसका निर्देशन उमेश विनायक कुलकर्णी व निर्माण अभिजीत घोलप ने किया है। फ़िल्म में नाना पाटेकर, दिलीप प्रभावलकर, गिरीश कुलकर्णी, सोनाली कुलकर्णी व किशोर कदम प्रमुख भूमिकाओं में है। देऊल को सर्वश्रेष्ठ फीचर फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (गिरीश कुलकर्णी) व सर्वश्रेष्ठ डायलोग (गिरीश कुलकर्णी) का 59वां राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    कोर्ट

    कोर्ट

    अगर आप हिन्दी फिल्मों के शौकीन हैं और उनमें दिखाए जाने वाले कोर्टरूम की छवि अपने दिमाग में बनाए हुए हैं, तो आपको 'कोर्ट' देखनी चाहिए क्योंकि ये आपके दिमाग में जमी उन गलत परतों को हटा देगी। इस फिल्म में असल जिंदगी की न्यायिक प्रणाली को वास्तविकता के साथ पेश किया गया है।

    English summary
    Did Sairat's director turn down Karan Johar's request to help in Hindi remake?
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