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सलमान ईद BOOKING करते रह गए... इधर अक्षय कुमार ने उनकी धज्जियां उड़ा दी!

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हाल ही में अनाउंस किया गया कि करण जौहर और अक्षय कुमार केसरी नाम की एक फिल्म लेकर आ रहे हैं जो होली 2019 पर रिलीज़ होगी। इस न्यूज़ के अगले ही दिन एक और अनाउंसमेंट किया गया।

वो था रणबीर कपूर - आलिया भट्ट स्टारर तीन पार्ट की फिल्म का। इस फिल्म की रिलीज़ डेट बताई गई - 15 अगस्त 2019। अब ज़ाहिर सी बात है कि 15 अगस्त मतलब अक्षय कुमार।

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2018 में भी उनकी फिल्म गोल्ड रिलीज़ हो रही है। तो क्या, करण जौहर के कहने पर अक्षय कुमार ने अपनी तारीख रणबीर कपूर को दे दी? अगर ऐसा है तो अक्षय का ये कदम काबिले तारीफ है।

अगर आपको याद हो तो इस साल दिसंबर में सलमान खान की टाईगर ज़िंदा है के साथ, रणबीर कपूर की दत्त बायोपिक क्लैश हो रही थी। लाख कोशिश के बावजूद, सलमान अपनी तारीख से नहीं हटे।

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थक - हारकर, राजकुमार हिरानी ने अपनी फिल्म उठाई और आगे चले गए। लेकिन बॉलीवुड के कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर, जैसे मुकेश भट्ट, संजय गुप्ता और राकेश रोशन इस बात का काफी विरोध कर चुके हैं।

करण जौहर भी दबी ज़ुबान में कह चुके हैं कि जब तक बड़े एक्टर्स त्योहारों की तारीखें नहीं छोड़ेंगे, नए टैलेंट को बॉक्स ऑफिस पर चमकने का मौका नहीं मिलेगा।

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और अब अक्षय कुमार ने खुशी खुशी ये मौका रणबीर कपूर की फिल्म को दे दिया है। अब देखना है कि बॉक्स ऑफिस पर ये कदम अक्षय कुमार को किधर लेकर जाता है।

नया हॉलीडे किंग

नया हॉलीडे किंग

दरअसल, इस साल मौका मिलते ही हॉलीडे किंग बन चुके हैं वरूण धवन। जहां एक तरफ सलमान खान की ट्यूबलाइट ईद पर रिलीज़ होने के बावजूद कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है वहीं वरूण धवन ने होली और दशहरा दोनों पर तंबू गाड़ लिया। इसलिए ये तय है कि यंग सितारों को केवल मौका चाहिए।

बॉलीवुड की बड़ी दिक्कत है रिलीज़ डेट

बॉलीवुड की बड़ी दिक्कत है रिलीज़ डेट

कई बार कई ब़ड़े प्रोड्यूसर कह चुके हैं कि बॉलीवुड के खान, कपूर, देवगन और कुमार को अब ये बड़ी तारीखें नए एक्टर्स के लिए छोड़ देनी चाहिए जिससे कि उनकी अच्छी फिल्में अच्छा बिज़नेस कर सकें।

क्यों नहीं चुनते अपना फ्राइडे

क्यों नहीं चुनते अपना फ्राइडे

काबिल डायरेक्टर संजय गुप्ता ने बॉलीवुड में 5 स्टार्स और उनके स्टारडम पर सीधा सीधा बोलते हुए कहा कि बॉलीवुड में केवल 5 ही सुपरस्टार हैं तो क्या वो अपने लिए एक खाली शुक्रवार भी नहीं चुन सकते?

एक नहीं एक दर्जन स्टार

एक नहीं एक दर्जन स्टार

स्टार्स के नाम पर हमारे पास तीन खान हैं, कुछ दो चार अच्छी हीरोइनें और डायरेक्टर जिनके नाम पर फिल्म चलती है। लेकिन उन्हें ये समझना होगा कि हमें एक नहीं, 12 सलमान खान चाहिए, 1 नहीं, 12 दीपिका पादुकोण चाहिए और 1 नहीं 12 राजकुमार हिरानी चाहिए। इसके बिना, बॉलीवुड हमेशा घाटे में रहेगा।

बड़े स्टार हैं तो बड़प्पन दिखाइए

बड़े स्टार हैं तो बड़प्पन दिखाइए

स्टार्स की फेस्टिवल डेट बुक करने पर मुकेश भट्ट ने साफ कहा कि जो भी बड़ा स्टार है उसे बड़प्पन तो दिखाना पड़ेगा। जब आपको पता है कि आपकी फिल्म कभी भी पैसे कमा सकती है, तो आप उस डेट को क्यों बर्बाद करेंगे जिस पर कोई और स्टार और छोटे बजट की अच्छी फिल्म कमा सकती है।

कैसे आएंगे नए स्टार

कैसे आएंगे नए स्टार

मुकेश भट्ट ने सवाल किया कि अगर ये सुपरस्टार्स ही अपना स्टारडम लेकर बैठे रहेंगे तो फिर नए टैलेंट को पनपने का मौका कैसे मिलेगा ? एक सीनियर के तौर पर हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि नए टैलेंट को पूरा मौका दें कि वो खुद को साबित कर सके।

खान के आगे किसकी मजाल है

खान के आगे किसकी मजाल है

अगर ये खान किसी को मना कर दें कि मेरी फिल्म किसी भी त्योहार पर रिलीज़ नहीं होगी तो किस प्रोड्यूसर की मजाल है कि उनकी बात ना सुने। उनकी हालत तो इंडस्ट्री में वैसे ही है जैसा बैठ जा, बैठ गई और खड़ी हो जा तो खड़ी हो गई।

करप्ट हो गया है बॉलीवुड

करप्ट हो गया है बॉलीवुड

स्टूडियो कल्चर आने के बाद बॉलीवुड करप्ट हो गया। एक प्रोड्यूर जिसे 10 करोड़ मिलते थे उसे तीन गुना पैसा मिलने लगा, बाकी सबका दाम भी बढ़ गया। इससे जिसकी जितनी कीमत है वो उससे ज़्यादा बड़ा बन गया और हर किसी को लगने लगा कि वो वाकई उतना बड़ा और काबिल आदमी है।

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ज़्यादा कमाई

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ज़्यादा कमाई

एक्टर्स की फीस पर बात करते हुए इंटरव्यू में मुकेश भट्ट ने बताया कि हीरो ने ज़्यादा पैसे लिए तो उसके स्टाफ ने भी ज़्यादा पैसे लेने शुरू कर दिए। एक मामूली सा ऑफिस बॉय भी एक सीए से ज़्यादा कमाता है और ये गलत है। एक मेकअप मैन भी एक शिफ्ट का 25 हज़ार लेता है। जबकि हीरो कोई ऐसा मेकअप भी नहीं करता है। जो कैमरामैन 15 - 20 लाख लेता था वो अब एक करोड़ लेता है।

इतना तो कर सकते हैं स्टार

इतना तो कर सकते हैं स्टार

स्टार्स को करोड़ो रूपये दिए जाते हैं मेहनताने के तौर पर। कम से कम वो इतना तो कर ही सकते हैं कि अपने स्टाफ का बिल खुद भर दें। या फिर अपने स्टाफ को खुद फीस दें। एक प्रोड्यूसर पर ज़बर्दस्ती का बोझ डालकर, फिल्म का बजट बढ़ाना कितना सही है।

कहानी नहीं स्टार चला रहे हैं फिल्में

कहानी नहीं स्टार चला रहे हैं फिल्में

पहले कहानी दिल जीतती थी। अब कहानी से कोई मतलब नहीं है, एक स्टार ले लो और फिल्म चल जाती है। इसका कारण है कि हर स्टूडियो में एक एमबीए वाला बैठा है जिसको पैसे से मतलब है कला से नहीं। और उसके बाद वो इतनी हवा में बातें करेगा कि हम तो ताजमहल बना रहे हैं फिल्म नहीं।

अगले 2 साल

अगले 2 साल

प्रोड्यूसर्स की ये बातें वाकई कुछ बहुत ही अहम चीज़ों की ओर ध्यान खींचती है। उनकी मानें तो आने वाले 2 साल बॉलीवड के लिए बहुत ही अहम हैं क्योंकि चीज़ें बदल रही हैं।

English summary
Did Akshay Kumar sacrifice his independence weekend for Ranbir Kapoor?
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