जब यारी है ईमान गाने वाले अमिताभ नहीं निभा पाए दोस्ती
मुंबई। शोले में जय - वीरू का प्यार देखकर अगर आपको दोस्ती पर बहुत ऐतबार है तो ज़रा रूकिए। ज़रूरी नहीं है कि परदे पर जो दिखे, वो ही सच हो। अब जैसे यूं तो बच्चन साहब यारी है ईमान गाकर परदे पर दोस्ती के मसीहा हो गए थे, पर असल ज़िंदगी में वो दोस्ती निभाने में ज़रा चूक गए। हम बात कर रहे हैं अमिताभ बच्चन और क़ादर खान की दोस्ती की।

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि अमिताभ बच्चन की फिल्मों के डायलाग्स कादर खान लिखा करते थे। सत्ते पे सत्ता, नसीब और मुकद्दर का सिकंदर जैसी फिल्मों के लिए डायलाग्स लिखने वाले कादर खान और अमिताभ बच्चन बहुत गहरे दोस्त थे। पर इनकी दोस्ती में दरार डाली सियासत ने। अपने एक इंटरव्यू में कादर खान ने कहा कि अमिताभ के साथ मेरा जो रिश्ता था...जब वो एमपी बन गया तो मैं खुश नहीं था...क्योंकि ये सियासत ऐसी है कि इंसान को बदलकर रख देती है। वो वापस जब आया तो मेरा अमिताभ नहीं था।
कादर खान इस बात से बहुत नाराज़ थे कि अमिताभ ने उन्हें सियासत न करने के लिए उकसाया जबकि खुद जाकर राजनीति की बाढ़ में बह गए।
अमिताभ बच्चन भी कादर खान को कहा करते थे कि तू एमपी बना तो मैं तेरे खिलाफ वोट मागूंगा, हरा दूंगा तुझे। इसके बाद कादर खान और अमिताभ बच्चन के रिश्तों में खटास आ गई। हालांकि बाद में ज़रूर स्थिति सामान्य हो गई पर कहते हैं न रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय...


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