#WARNING: प्रिय टाइगर, एक साथ सिंह इज़ किंग और कृष नहीं बनाई जाती
टाइगर श्रॉफ की अ फ्लाइंग जट रिलीज़ हो चुकी है। हां, हम जानते हैं कि आपको भी लग रहा होगा कि ये कब हुआ लेकिन जन्माष्टमी की छुट्टी पर फिल्म रिलीज़ हो चुकी है।
बहरहाल, फिल्म लोगों को ज़्यादा पसंद नहीं आई और हम आपको बता ही चुके हैं क्यों। दरअसल, टाइगर श्रॉफ को लेकर रेमो डीसूज़ा थोड़ा सा....नहीं नहीं ज़्यादा सा ओवरकॉन्फिडेंट हो गए। रिव्यू हम आपको दे ही चुके हैं। [#FilmReview: अ फ्लाइंग जट...बच्चों ने थोड़ा भाव क्या दिया...उड़ ही गए टाइगर]
तो कुल मिलाकर हुआ ये कि बड़ों को तो फिल्म कैसे भी नहीं अच्छी लगनी थी लेकिन बच्चों को भी फिल्म ज़्यादा पसंद नहीं आई।

जबकि फिल्म में सुपरहीरो वाले सारे मसाले थे। एक लड़का जिसको कोई भाव नहीं देता। फिर अचानक से उसके पास सुपरपावर आ जाती है और वो दुनिया बचाने निकल पड़ता है।
यहां तक तो फिल्म में सब कुछ ठीक था। जो ठीक नहीं था वो इसके बाद शुरू हुआ। जानिए क्यों नहीं देखें अ फ्लाइंग जट-
सिंह इज़ किंग MEETS कृष
फिल्म में दरअसल दो फिल्मों को आराम से जोड़कर एक फिल्म बनाने की कोशिश की गई है। पहली है अक्षय कुमार की सिंह इज़ किंग और दूसरी है ऋतिक रोशन की कृष और यही कारण है कि फिल्म में टाइगर श्रॉफ कहीं बीच में ही लटक गए। वैसे किसी ने ध्यान ना दिया हो तो, अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन को ही टाइगर श्रॉफ सबसे ज़्यादा फॉलो करते हैं।
इतना सारा ज्ञान
फिल्म में इतना सारा ज्ञान है कि आपको लगेगा कि आप स्कूल में MORAL SCIENCE और Environmental Studies वापस पढ़ रहे हैं। पेड़ बचाओ, प्रदूषण घटाओ...एक मिनट...स्वच्छ भारत सुंदर भारत जैसी चीज़ें बस किसी ने बोली नहीं है। कर सब लिया है।
फुस्स है हीरो
फैंटेसी मतलब क्या होता है? कि आदमी इमैजिन कर सके। जब कुछ सोचना होगा तो अच्छा सोचो। इतना फुस्स और नॉर्मल क्यों? एक नॉर्मल लड़के में बच्चों को क्या दिलचस्पी होगी भला बताइए। जब सुपरहीरो होकर भी ऊंचाई से डरना ही पड़े तो फायदा क्या ऐसे फुस्स सुपरहीरो का।
ढीले से फाइट सीन
फैंटेसी फिल्मों का बेस्ट पार्ट होता है उनका फाइट सीन जो बच्चों को बहुत पसंद आता है। लेकिन इस फिल्म के फाइट सीन इतने ढीले थे कि किसी को मज़ा नहीं आएगा।
पेड़ लगा लो फिर बचा लेना
पूरी फिल्म एक ही टॉपिक के इर्द गिर्द घूमती है - एक पेड़ जिसे बचाना है। हां, यकीन करिए, बस एक ही पेड़ को बचाना इस पूरी फिल्म का मुद्दा था। अरे भई जब पेड़ एक ही था तो पहले और पेड़ लगा तो लेते फिर वो पेड़ बचाते!
बोरिंग सी जैकलीन
जब से बच्चों ने जैकलीन फर्नांडीज़ का वो चिट्टियां कलाइयां वाला डांस देखा है, तभी से बच्चे उनके फैन हैं। लेकिन इस फिल्म में जैकलीन इतनी बोरिंग लगी हैं कि फिल्म में जितनी ऊब होती है उसका आधा कारण जैकलीन हैं।
धूल मिट्टी खाने वाला विलेन
अब देखिए, फिल्म की टार्गेट ऑडियंस थी बच्चे। और आजकल के बच्चे पहले ही मशीन खाने वाले विलेन देख चुके हैं। ऐसे में केवल कूड़ा कचरा खाने वाला विलेन...Nah उनका टेस्ट ही नहीं था।
बोरिंग से गाने
फिल्म के गाने फिल्म का मुख्य आकर्षण होने चाहिए थे। एक तो रेमो जैसे कोरियोग्राफर की फिल्म। ऊपर से टाइगर जैसे डांसर और जैकलीन जैसी डांसर फिर भी अच्छे गाने नहीं! बहुत नाइंसाफी है।
चंदा मामा दूर के
फिल्म में हीरो विलेन को चांद पर लेकर जाता है मारने के लिए। लेकिन ये केवल टेक्नीक थी क्योंकि वहां विलेन को प्रदूषण नहीं मिलेगा। और हीरो उसको आसानी से मार लेगा। मतलब फिर से ढीली फाइट। किस बच्चे को पसंद आएगा ये सब।
लौकी वाला सुपरमैन
सुपरमैन देखिए केवल सुपरमैन होता है सब कुछ कर लेने वाला। आपने एक बार वो कॉस्ट्यूम पहने नहीं कि बच्चे आपके फैन हो जाते हैं। फिर आप लौकी खाइए या खीरा वो आपको फॉलो करेंगे लेकिन दिमाग से। जब आप लोगों से डरेंगे, ऊंचाई से डरेंगे तो लौकी से भी कुछ नहीं होगा!
मेरे पास कृष है
बच्चों के पास पहले से ही उनका सुपरमैन था - कृष। कृष छोड़िए उन्हें तो विवेक ओबेरॉय का काल वाला कैरेक्टर भी बेहद पसंद था। तो जब बच्चों के पास कृष है तो नए सुपरमैन में कुछ तो अलग होना चाहिए था ना। भले ही उस फिल्म में गॉड अल्लाह और भगवान, ने है बनाया एक इंसान जैसे अजीब से गाने थे!
तो जिन भी लोगों को लगा कि टाईगर श्रॉफ सबसे नए और सबसे तेज़ सुपरहीरो बनकर उभरेंगे। और बाकी पुराने सारे सुपरहीरो रिप्लेस हो जाएंगे, एक साथ, दिल से ज़ोर से बोलिए - सॉरी शक्तिमान!!!


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