जुबैदा हीरोइन बनीं तो पिता पिस्तौल लेकर पहुंचे स्टूडियो, महाराजा संग हुई मौत, बेटी की मिली सिर कटी लाश

Zubeida Begum And Maharaja Hanwant Singh Lovestory

एक्ट्रेस ज़ुबैदा बेगम और महाराजा हनवंत सिंह की कहानी हमेशा से ही इतिहास में एक बेहद ही भयानक कहानी के रूप में जानी जाती है. बता दें कि कहने को तो दोनों का निधन प्लेन क्रैश में हो गया था. लेकिन कुछ लोग बताते हैं कि उनकी मौत साजिश थी. दरअसल एक्ट्रेस के जीवन पर साल 2001 में एक फिल्म बनाई गई थी. जिसका नाम जुबैदा रखा गया था. इस फिल्म में उनकी मौत की वजह कुछ और ही बता दी गई थी. इस कहानी को उन्हीं के बेटे खालिद मोहम्मद ने लिखा. यहां तक कि उनकी मौत का रहस्य आज भी जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस की चारदीवारी में कैद हो चुका है. यहां तक कि बताया जाता है कि वहां पर उनकी मौजूदगी का आभास भी होता है.

पिता के कारण घर में बंद रहती थी जुबैदा

ज़ुबैदा बेगम के पिता को उनका फिल्मों में काम करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था. हालांकि वे खुद भी एक स्टूडियो के मालिक हुआ करते थे और उनकी एक एक्ट्रेस से बहुत ही अच्छी दोस्ती भी रहा करती थी. जिसे जुबैदा आंटी कहकर बुलाया करती थी. एक्ट्रेस में चोरी छुपे उषा किरण नामक एक फिल्म में काम किया. लेकिन एक्ट्रेस के पिता की दवाओं के चक्कर में कभी भी यह फिल्म रिलीज ना हो पाई. उनके पिता हमेशा ही अपनी बेटी के निर्णय खुद ही ले लिया करते थे. जुबैदा की जबरदस्ती शादी भी करवा दी गई और जब ससुराल में उनका रिश्ता बिगड़ गया तो जबरदस्ती तलाक भी करवा दिया.

महाराजा हनवंत हुए जुबैदा पर फ़िदा

जुबैदा अपने पिता की सख्ती की वजह से घर में कैद हो गई. लेकिन जब उनका बेटा साथ रहता था तो उन्हें इसी वजह से सुकून मिलता था. लेकिन उसकी आंटी उनकी उदासी को कम करने के लिए उन्हें पार्टी में ले जाया करती थी. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो जुबैदा एक बार अपनी आंटी के साथ में जोधपुर की शाही शादी में बाराती बनकर पहुंच गई. उन्होंने अपनी मर्जी से गाना गा दिया, जहां पर उनकी खूबसूरती और आवास का हर कोई दीवाना हो गया. इसी महफ़िल में मारवाड़ के रियासत के महाराजा हनवंत सिंह भी शामिल हुए थे.

जोधपुर से मुंबई पहुंचे महाराजा

जुबैदा की खूबसूरती और आवास पर हनवंत सिंह फिदा हो गए. दोनों के बीच में बातचीत शुरू हुई और बाद में एक्ट्रेस को बारात के साथ में लौटना था. लेकिन उनके रास्ते में ही तबीयत खराब हो गई. जिस वजह से वह महाराजा हनवंत सिंह की मेहमान बनकर जोधपुर में ही पहुंच गई. हालांकि बीमारी तो सिर्फ एक बहाना था. लेकिन दोनों को इश्क की राह पकड़नी थी. जुबैदा पर महाराजा अपने दिल हार गए थे और बाद में एक्ट्रेस मुंबई पहुंच गई. लेकिन जोधपुर में महाराजा उनकी याद में तड़पने लग गए. महाराजा ने अपनी करीबी की सहायता से मुंबई में एक्ट्रेस का पता लगवा लिया.

जुबैदा की मां से महाराजा ने मांगा एक्ट्रेस का हाथ

लेकिन इसके बाद में 1 दिन महाराजा हनवंत सिंह खुद जुबैदा के घर पहुंचे और उनकी मां से बेटी का हाथ मांग लिया. हालांकि एक मुस्लिम लड़की से महाराजा की शादी होना बहुत ही बड़ी बात और मुश्किल थी. इतना ही नहीं उनकी पहले भी एक राजकुमारी कृष्णा कुमारी से शादी हो गई थी. जुबैदा की मां को यह मंजूर नहीं था कि उनकी बेटी धर्म परिवर्तन करके दूसरी औरत की सौतन बन जाए. लेकिन महाराजा ने उनके घर वालों को खूब मनाया और बाद में एक्ट्रेस की मां मान गई. लेकिन उनके घर वालों ने इस शर्त पर शादी के लिए हां की कि उनका बेटा खालिद मोहम्मद भी उनके साथ में ही रहेगा.

धर्म परिवर्तन कर जुबैदा ने रचाई महाराजा से शादी

जुबैदा ने इसके बावजूद भी अपने 2 साल के बच्चे को अपनी मां के पास ही छोड़ दिया और महाराजा के साथ में जोधपुर पहुंच गई. कुछ खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने धर्म परिवर्तन किया और आर्य समाज के अनुसार ही 17 दिसंबर 1950 में महाराजा उसके साथ में शादी रचाई. लेकिन महाराजा का परिवार या फिर शाही घराना उन्हें बहू के तौर पर कभी भी स्वीकार नहीं कर पाया. उनके साथ में गैरों की तरह बर्ताव किया गया. जिसके बाद में वह महाराजा के बेटे राव राजा हुकुम सिंह की मां बन गई थी और दूसरी तरफ महाराजा आजादी के बाद में चुनाव मैदान में उतर चुके थे. वह चुनाव प्रचार में महारानी कृष्णा कुमारी के साथ में भी जाया करते थे.

प्लैनक्रैश में हुई दोनों की मौत

लेकिन 26 जनवरी 1952 में एक दिन ऐसा आया जब महाराजा को एक शहर में जरूरी काम से जाना था. जुबैदा भी महाराजा से जिद करने लगी कि उन्हें भी साथ में चलना है. लेकिन एयरक्राफ्ट में सिर्फ दो ही सीटें थी. जिस वजह से कृष्णा कुमारी पीछे हट जाती है और उनका प्लेन कुछ ही दूर पहुंचा और क्रैश हो गया था. इस हादसे में दोनों की मौत हो गई. प्लेन क्रैश होने के अलग-अलग वजहें भी बताई गई.बहुत से लोग कह रहे थे कि उनकी मौत साजिश के तौर पर हुई है. लेकिन साल 2001 में फिल्म जुबैदा को उनके बेटे खालिद मोहम्मद ने ही लिखा था और उसमें इस बात को दर्शाया गया था कि एक्ट्रेस कभी महाराजा से दूर नहीं जाना चाहती थी और इसी वजह से उन्होंने अपनी जान दे दी थी. कहा जाता है कि एक्ट्रेस की रूह आज भी जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में ही भटका करती है.

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