World Theater Day: बॉलीवुड के वो कलाकार जिन्होंने पर्दे पर आने से पहले मंच पर की जी तोड़ मेहनत
World Theater Day: हर साल विश्व रंगमंच दिवस पर पूरी दुनिया रंगमंच की उस जादुई दुनिया का जश्न मनाती है, जहां कहानियां अपने सबसे सच्चे रूप में जन्म लेती हैं और अभिनेता अभिनय की असली बारीकियां सीखते हैं। फिल्मों और डिजिटल मंच की चमक-दमक से पहले, कई बॉलीवुड कलाकारों ने मंच पर अपने करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने अनुशासन, संवेदनशीलता और कठिन मेहनत को अपनाया।

रंगमंच आज भी कलाकारों के लिए सबसे मज़बूत प्रशिक्षण का माध्यम है। यह उन्हें अनुशासन, सहजता और भावनाओं की सच्चाई सिखाता है। विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर ये सफर हमें याद दिलाते हैं कि पर्दे पर दिखने वाले हर प्रभावशाली अभिनय के पीछे वर्षों की मेहनत और समर्पण होता है, जिसकी जड़ें अक्सर मंच से जुड़ी होती हैं।
पर्दे के पीछे की चुनौतियों से लेकर तालियों की गूंज तक, ये कलाकार साबित करते हैं कि रंगमंच सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि जीवनभर की मजबूत नींव है।
आइए जानते हैं ऐसे कुछ कलाकारों के बारे में, जिन्होंने रंगमंच में प्रशिक्षण लिया और उसी आधार को अपने फिल्मी करियर में आगे बढ़ाया:
पंकज त्रिपाठी
अपने समय के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक पंकज त्रिपाठी ने 1996 में पटना से रंगमंच की शुरुआत की। वह दिन में अभ्यास करते और रात में होटल की रसोई में काम करते थे। उनकी लगन उन्हें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तक ले गई। इसके बाद वह 2004 में मुंबई आए। कई सालों की मेहनत और 40 से ज़्यादा छोटे किरदारों के बाद उन्हें "गैंग्स ऑफ वासेपुर" से पहचान मिली।
अली फज़ल
अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने से पहले अली फज़ल की शुरुआत स्कूल के दिनों में मंच से हुई। देहरादून के दून स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक बास्केटबॉल चोट के बाद उन्होंने अभिनय की ओर रुख किया और "द टेम्पेस्ट" में ट्रिनकुलो जैसे किरदार निभाए। बाद में उन्होंने मुंबई और थिएटर मंचों के ज़रिए अपनी कला को और निखारा।
ऋचा चड्ढा
ऋचा चड्ढा ने मॉडलिंग के बाद पेशेवर रंगमंच से अपने अभिनय की नींव रखी। उन्होंने मशहूर रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन के साथ प्रशिक्षण लिया और भारत के कई हिस्सों में नाटकों में काम किया। यही अनुभव उनके फिल्मी करियर की मज़बूत शुरुआत बना।
श्वेता त्रिपाठी
राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान से पढ़ाई के बाद श्वेता त्रिपाठी ने रंगमंच में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने मुंबई में एक थिएटर समूह के साथ काम किया और अपनी खुद की कंपनी "ऑल माई टी प्रोडक्शंस" भी शुरू की। "मसान" से पहचान मिलने से पहले उन्होंने पर्दे के पीछे भी काम किया और धीरे-धीरे अपनी कला को निखारा।
लिसा मिश्रा
अपनी गायकी के लिए जानी जाने वाली लिसा मिश्रा का जुड़ाव रंगमंच से भी रहा है। वेब सिरीज़ कॉल मी बे से एक्टिंग शुरूआत करने से पहले लिसा ने संगीत आधारित नाटकों में काम किया और हाल ही में 15 साल बाद फिर से मंच पर वापसी की। उनका सफर संगीत, अभिनय और कहानी कहने का सुंदर मेल है।
अक्षय ओबेरॉय
अक्षय ओबेरॉय की अभिनय यात्रा मुंबई के प्रसिद्ध पृथ्वी थिएटर से शुरू हुई। उन्होंने रंगमंच कलाकार मकरंद देशपांडे के साथ काम करते हुए शुरुआत में पर्दे के पीछे काम किया और बाद में नाटकों में अभिनय किया। उन्होंने विदेश में जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में भी अभिनय की पढ़ाई की, जिससे उनकी कला और मज़बूत हुई।
आदर्श गौरव
आदर्श गौरव का रंगमंच से गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने मुंबई के एक प्रतिष्ठित अभिनय विद्यालय से औपचारिक प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने रैल पदमसी के थिएटर समूह के साथ काम किया है और राष्ट्रीय प्रदर्शन कला केंद्र में "लुक्रेस" जैसे नाटकों में अभिनय किया है, जो मंच के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
गुलशन देवैया
फिल्मों में आने से पहले गुलशन देवैया बेंगलुरु के अंग्रेज़ी रंगमंच का हिस्सा थे। उन्होंने बेंगलुरु में थिएटर समूह फोरम थ्री के साथ काम किया और बाद में फिल्मों की ओर रुख किया, जहां उन्हें "शैतान" से पहचान मिली।
निर्मित कौर अहलूवालिया
निर्मित कौर अहलूवालिया ने अपने करियर की शुरुआत रंगमंच से की और 15 साल से अधिक समय तक इसमें प्रशिक्षण लिया। बाद में उन्होंने फेमिना मिस मणिपुर सौंदर्य प्रतियोगिता जीती और टीवी धारावाहिक "छोटी सरदारनी" से लोकप्रियता हासिल की।


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