'महिला सम्मान आज भी है दिखावा'- बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिटीं ये फिल्में- कड़वा मगर सच!
महिला दिवस के मौके पर क्यों न महिलाओं के हक की बात कर ली जाए। वैसे तो 365 दिन इसके लिए हमारे पास फुर्सत नहीं होती है। फिर फिल्मों की बात हो तो हम सलमान खान, अक्षय कुमार और अजय देवगन से ही नहीं निकल पाते हैं। ऐसे में महिलाओं से जुड़ी फिल्में, इंडस्ट्री में उनका हक और उनपर बनने वाली फिल्मों का जिक्र करना हम भूल जाते हैं। लेकिन महिला सशक्तिकरण का जोर-शोर पर हिम्मत करके जब वुमन ओरिएंटिड फिल्में बनी तो इन्हें बॉक्स ऑफिस पर क्यों मुंह की खानी पड़ी।
'लव सोनिया', 'नाम शबाना', 'सांड की आंख', 'छपाक', 'पंगा' और 'थप्पड़' जैसी कई फिल्में लगातार रिलीज हुई हैं। महिला महिला करने वाले, सोशल मीडिया पर सशक्तिकरण का नारा बुलंद करने वाले क्यों ऐसी फिल्मों को देखने से कतराते हैं। जी हां, महिलाओं से जुड़ी फिल्में क्यों बॉक्स ऑफिस पर उतने बड़े पैमाने पर कमाल नहीं दिखा पाती जैसे सलमान खान की 'रेस 2' और 'किक' कमा लेती हैं। शाहरुख खान की 'दिलवाले' और 'हेप्पी न्यू ईयर' जैसी फिल्में कमा लेती है। 'हैप्पी न्यू ईयर', 'दिलवाले', 'रेस 3' और 'किक' जैसी फिल्मों की तमाम कमियों और फ्लॉप बताने के बाद भी इन्हें खूब देखा गया और इन फिल्मों ने 100-200 करोड़ का बिजनेस किया।

लेकिन एक्ट्रेस बेस्ड फिल्में उतना कमाल नहीं दिखा पाती जितना कि एक हीरो वाली फिल्में। खैर पिंक, मणिकर्णिका, क्वीन जैसी फिल्में भी हैं जिसने इस सोच को तोड़ा है। ऐसे में राधिका आप्टे की वो बात याद आ रही है जब उन्होंने कहा था कि भई सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान की इतनी फैन फॉलोइंग है तो फिल्म तो चलेगी न। फिल्म तो बिजनेस करेगी ही और उन्हें उसी हिसाब से फीस भी मिलेगी। लेकिन साफ कर दें कि सवाल उनसें हैं जो महिला सशक्तिकरण का राग अलापते हैं और ऐसी फिल्मों को देखने की जहनत नहीं उठाते हैं।


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