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.....इसलिए BESTEST प्रेम सलमान खान थे, हैं और रहेंगे!

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प्रेम रतन धन पायो में सलमान खान 16 साल बाद अपने उसी अवतार में वापस आ रहे हैं। राजश्री प्रोडक्शन्स का नाम लो और प्रेम याद न आए ये तो नामुमकिन है। सूरज बड़जात्या और सलमान खान के लिए उनका प्रेम मैंने प्यार किया के ज़माने से है।

1999 को एक बार फिर उन्होंने प्रेम को परदे पर उतारा, उतनी ही मासूमियत, उतने ही भोलेपन के साथ। फिल्म ब्लॉकबस्टर तो नहीं थी लेकिन दर्शकों का एक वर्ग आज भी फिल्म का दीवाना है।


प्यार और परिवार को इतने सलीके से शायद ही किसी ने उतारा हो जैसा कि सूरज बड़जात्या ने। हाल ही में फिल्म ने 16 साल पूरे कर लिए और सलमान खान भी इस फिल्म में आखिरी बार प्रेम अवतार में नज़र आए थे।


तो जानिए वो कारण जो कुछ भी खास न होते हुए भी हम साथ साथ हैं और सलमान खान बन गए BESTEST प्रेम के हकदार! -

 Family कनेक्शन
  

Family कनेक्शन

हम साथ साथ हैं की थीम थी रामायण जिसमें प्यार का पुट डालकहर और संगीत का तड़का मारकर राजश्री प्रोडक्शन्स ने बड़े प्यार से पेश किया। A family that eats together, prays together and stays together. सूरज के इस परिवार से हर मध्यम वर्गीय परिवार ने खुद को जोड़ने की कोशिश की।


प्यारा सा प्रेम
  

प्यारा सा प्रेम

सलमान खान के फैन्स को उनका प्रेम वाला अंदाज़ हमेशा से पसंद रहा है। चाहे वो मैंने प्यार किया है हो या हम आपके हैं कौन, सलमान ने मासूम, शांत इमेज से हमेशा दर्शकों पर राज किया है। उनका ये अंदाज़ लुभाता भी है और उन्हें परदे पर देखते रहने को मजबूर करती है।


भाई - बहन की बॉन्डिंग
  

भाई - बहन की बॉन्डिंग

कुछ रिश्ते इतने प्यारे होते हैं कि इंसान को तुरंत क्लिक कर जाते हैं। भाई, बहन, दोस्त इनमें से ही एक है। ऐसे रिश्तों का हल्का फुल्का प्यार, छेड़छाड़, तकरार देखकर फिल्मी दर्शक हमेशा इमोशनल हो जाते हैं। अब क्या करें हमारा देश फिल्मी है और बॉलीवुड यहां के खून में बहता है।


प्यारा सा संगीत
  

प्यारा सा संगीत

फिल्म का संगीत भी बिल्कुल वैसा ही था कि हर परिवार इंजॉय कर सके।ऐसे दर्शकों की फेहरिस्त लंबी है जिनकी प्लेलिस्ट के किसी छुपे फोल्डर में आज भी फिल्म के कुछ गाने होंगे जिन्हें कभी कदार आप सुनते भी होंगे। और अगर आप अभी हंसे हैं तो आप जाल में फंस गए हैं!


रोमांस का ओवरडोज़
  

रोमांस का ओवरडोज़

फिल्म में एक नहीं, दो नहीं तीन रोमांटिक कहानियां थीं। अगर नीलम को जोड़ लिया जाए तो चार। अब रोमांस के पागल प्रेमियों को इससे ज़्यादा क्या चाहिए था। पर तीनों ही जोड़ियां बेहद खूबसूरत थीं इसमें कोई दो राय नहीं है।


खूबसूरती का धमाका
  

खूबसूरती का धमाका

सूरज बड़जात्या खूबसूरती को बिल्कुल भारतीय अंदाज़ में परदे पर उतारते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन फिल्म में तीनों हीरोइनों ने खूबसूरती को फेल कर दिया था। जहां करिश्मा का चुलबुलापन देखने लायक था वहीं तब्बू की सादगी ने भी खींचा। सोनाली बेंद्रे खूबसूरत हैं इसमें कोई दो राय नहीं हैं पर वो शर्माती भी इतना खूबसूरत हैं ये दर्शकों को तब पता चला।


 सिंपल स्टोरी, नो ट्विस्ट
  

सिंपल स्टोरी, नो ट्विस्ट

कभी कभी सादी खिचड़ी भी बहुत स्वादिष्ट होती है, ये सूरज बड़जात्या ने बताया। फिल्म में कोई तामझाम नहीं था फिर भी आज भी जब ये टीवी पर आती है तो लोग चैनल सील कर ही देते हैं


कॉस्ट्यूम और गहने
  

कॉस्ट्यूम और गहने

औरतों की कमज़ोरी है कपड़े और गहने। बस ये दो चीज़ें इस फिल्म में भर कर दिखाई गई है। बेहद प्यारे कॉस्ट्यूम और गहनें। वो भी तीन दुल्हन जैसी सजी लड़कियों पर। इग्नोर करने का ऑप्शन भी तो होना चाहिए।


 शादी, धमाके, गाने, इंटरटेनमेंट
  

शादी, धमाके, गाने, इंटरटेनमेंट

फिल्म में वो सब था जो अमूमन घरों में मिस किया जाता है। इस फिल्म से इंस्पायर होकर कई परिवारों ने फैमिली गेट टुगेदर और आउटिंग प्लैन करना शुरू कर दी। जिन चीज़ों के लिए लोगों के पास वक्त ही नहीं बचा उन्हें परदे पर दिखाकर बड़जात्या ने समझदारी तो की थी।


अपना गांव
  

अपना गांव

ज़मीन से कैसे जुड़ा जाए वो भी इस फिल्म ने दिखा दिया। बड़े शहरों में कितने लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी कोई गांव देखा ही नहीं। लोगों ने फिल्म देखकर गांव का एक ट्रिप तो ज़रूर मारा होगा।


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