..................... गरीबों और औरतों पर फिल्म क्यों नहीं बनाते हैं करण जौहर? दी थी ये बड़ी वजह | Why does not Karan Johar Making film on poor and woman? Gave the big reason - Hindi Filmibeat

गरीबों और औरतों पर फिल्म क्यों नहीं बनाते हैं करण जौहर? दी थी ये बड़ी वजह

करण जौहर और उनका धर्मा प्रोडक्शन पिछले कई दशक से हिंदी सिनेमा में काम कर रहे हैं। करण जौहर ने ढेर सारी फिल्में बॉलीवुड में बनाई जिनकी धूम आज भी देखने को मिलती है। लेकिन करण जौहर वह शख्स हैं जिन पर तमाम तरह के आरोप भी लगते आए हैं। बीते कुछ सालों से वह नेपोटिज्म का आरोप झेल रहे हैं तो उनपर ये भी तंज कसा जाता रहा है कि वह गरीबों, महिलाओं व सामाजिक विषयों पर फिल्में नहीं बनाते हैं।

खुद करण जौहर ने इस बारे में स्वीकार किया था कि वह क्यों अमीर व उच्चे तबके से जुड़े विषयों पर बनाते हैं या क्यों लोग उनकी फिल्मों के विषय को मूर्खतापूर्ण बताते हैं। करण जौहर ने अपनी किताब एन सूटेबल बॉय में करण जौहर इस बारे में जिक्र करते हैं। साल 2017 में आई अपनी ऑटोबायग्राफी में करण जौहर लिखते हैं, जोया अख्तर ने मुझे एक दिन कहा, लोग मुझे कहने लगे हैं कि मैं नई करण जौहर हूं।

Karan Johar

"मैंने तुरंत उन्हें कहा कि तुम इसे तारीफ के तौर पर मत लो। लोगों के कहना का मतलब इससे प्रशंसा से नहीं बल्कि उनका मानना है कि तुम भी करण जौहर की तरह अमीरों पर और बेवकूफ विषयों पर फिल्में बनाने लगी हो जिसका कोई औचित्य नहीं हैं।"

करण जौहर का कहना है कि, "मैं खुद ऐसा महसूस करता हूं कि मैं कैसी भी फिल्में करूं मुझे क्रेडिट नहीं मिलता बल्कि तुरंत भूला दिया जाता हूं। आ भी मैं पॉपकॉर्न, बबलगम, एनआरआई और अमीर लोगों से जुड़ा माना जाता हूं।"

फिल्म इंडस्ट्री में अगर आप सामाजिक टिप्पणी नहीं करते, अगर आप मिडिल क्लास व उनके विषयों पर बात नहीं करते तो आप बेवकूफ कहलाते हो। लोगों को लगता है कि देखों ये आदमी अमीरों की बात कर रहा है। क्या अमीरों की कोई समस्या नहीं हो सकती क्या? क्या मैं लोगों की भावनाओं पर उनके जीवन पर फिल्में नहीं बना रहा हूं क्या?

नहीं बनाता गरीबों पर फिल्म

नहीं बनाता गरीबों पर फिल्म

"माफी चाहता हूं कि मैं झुग्गियों में क्या हो रहा है, इस पर फिल्म नहीं बना सकता। ऐसा इसीलिए नहीं कि मुझे उनके लिए बुरा नहीं लगता, मैं भी उनकी समस्याओं को महसूस कर सकता हूं और मुझे भी गरीबी और लोगों की दिक्कतों को देखकर बुरा लगता है। मैं बहुत दुखी महसूस करता हूं कि देश में किस तरह महिलाओं के साथ व्यवहार किया जाता है और इसे लेकर मेरे विचार भी हैं।"

तुम तो मंहगे डिजाइनर कपड़े में बैठे हो तुम क्या जानों इनकी भावनाएं

तुम तो मंहगे डिजाइनर कपड़े में बैठे हो तुम क्या जानों इनकी भावनाएं

"लेकिन कल को मैं इन विचारों को व्यक्त करूंगा तो लोग कहेंगे कि तुम चुप हो जाओ, तुम बेवकूफ हो। तुम तो अपने मंहगे डिजाइनर कपड़ों में बैठे हो, तुम कौन होते हो, तुम्हारा ओपिनियन कैसे हो सकता है?"

मैं बहुत मेहनत करता हूं, 20-20 घंटे काम करता हूं

मैं बहुत मेहनत करता हूं, 20-20 घंटे काम करता हूं


मैं इन सबको एकदम गलत मानता हूं। तुम मुझे ऐसा कह भी कैसे सकते हो। अगर मैं अमीर हूं डिजाइनर कपड़े पहनता हूं, कार आदि में घूमता हूं तो इसका मतलब ये कतई नहीं है कि मेरे पास दिल नहीं है। मुझे बेकार फिल्ममेकर मानने वाले बुद्धिजीविओं को मैं कहना चाहता हूं कि मैं बहुत मेहनत करता हूं, अपनी कंपनी को चलाने के लिए 20-20 घंटे काम करता हूं। ऐसे लोग मेरे बारे में कुछ जानते ही नहीं है, इसीलिए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह मेरी तुलना किससे कर रहे हैं और उन्हें मेरी फिल्में क्यों पसंद नहीं आती है।

मुझे यूं जज कर सकते हो?

मुझे यूं जज कर सकते हो?

मैं सबकुछ सुनता हूं। कुछ लोग मुझे सपोर्ट भी करते हैं और कुछ लोग मुझे अति आत्मविश्वास से भरा भी बताते हैं। मैं जानता हूं ऐसे लोग मेरी फिल्मों को सिनेमाघरों में जाकर देखते भी हैं और मेरे गानों पर नाचते भी हैं। पार्टी से लेकर तुम्हारे बेडरूम में मेरे गाने खूब बजते हैं तो कैसे आप मुझे यूं जज कर सकते हो?

10 साल की उम्र में देख डाली थी सामाजिक विषय वाली फिल्म

10 साल की उम्र में देख डाली थी सामाजिक विषय वाली फिल्म

करण जौहर अपने फिल्मों के बारे में बताते हुए लिखते हैं, "मैं बचपन से ही बिमल रॉय, गुरु दत्त, राज कपूर और यश चोपड़ा जैसे फिल्म निर्माताओं की फिल्में देखकर बड़ा हुआ हूं। मैंने दो 'बीघा जमीन', 'प्यासा' जैसे फिल्में दस साल की उम्र में ही देख डाली थी। जिसे कई बार देखने के बाद मैं इसके भाव को समझ पाया। मैंने 'कागज के फूल' से लेकर 'मदर इंडिया' और 'मुगल-ए-आजम' भी देखी।"

'कभी कभी' 100 बार देखी है

'कभी कभी' 100 बार देखी है

गुरु दत्त और बिमल रॉय के अलावा मैं राज कपूर और यश चोपड़ा द्वारा बनाई फिल्मों से काफी प्रभावित हुआ। मैंने राज कपूर की 'प्रेम रोग' कई बार देखी है। राज कपूर ने युवाओं को अपनी फिल्मों में दर्शाया तो यश चोपड़ा ने समाजिक विषयों को अपनी फिल्मों में उकेरा। मैंने 'कभी कभी' 100 बार देखी है।

टर्निंग प्वाइंट

टर्निंग प्वाइंट

करण जौहर का मानना है कि हिंदी सिनेमा में सबकुछ बहुत इमोशनल है। एंग्री मैन से लेकर ऋषि कपूर की फिल्में देखकर उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने 'बसेरा', 'ये वादा रहा' और 'कसमें वादे' जैसे ढेर सारे सामाजिक विषयों वाली फिल्में देखी हैं और उनसे प्रभावित हुए हैं। लेकिन 'हम आपके हैं कौन' फिल्म उनके जीवन की टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।

हम आपके हैं कौन फिल्म ने बदल दिया सबकुछ

हम आपके हैं कौन फिल्म ने बदल दिया सबकुछ

करण जौहर लिखते हैं कि "उनकी जिंदगी में ये फिल्म टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। शानदार लोगों के जीवन को दिखाती ये फिल्म फैमिली वेल्यू को तो सीखाती ही है साथ ही प्यार, म्यूजिक, रोमांस से लेकर इमोशन को भी झलकाती है।"

मैं बहुत रोया फिल्म देखकर

मैं बहुत रोया फिल्म देखकर

'हम आपके हैं कौन' फिल्म में जब भाभी किरदार की डेथ होती है तो उस पल को देखकर मैं रो पड़ा। पहली बार जब मैंने ये फिल्म देखी तो मैंने थिएटर में सूरज बड़जात्या का हाथकर कहा कि सर आपने ये आजतक कि बेस्ट फिल्म बनाई है।

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