वेश्या समाज से आई बिनोदिनी दासी जिसने हीरोइन बनकर किया बॉलीवुड पर राज, 3 लोगों की थी रखैल...

वैश्य समाज से आई हुई बिनोदिनी दासी उर्फ नटी बिनोदिनी की क्रांतिकारी जिंदगी और वह एक महान थिएटर आईकॉनिक थी. आज हम आपको बिनोदिनी दासी के बारे में बना बताने वाले हैं. उनको नटी बिनोदिनी क्यों कहा जाने लगा? एक वक्त पर मर्दों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली बिनोदिनी ने रंगमंच की दुनिया को अलविदा कहा.
बिनोदिनी ने खुद को बताया था वैश्य
बिनोदिनी दासी का जन्म 1863 में कोलकाता में ऐसी जगह हुआ जहां पर जिस्म का धंधा हुआ करता था. 12 साल की उम्र में उन्होंने एक्टिंग करना शुरू किया और 23 साल की उम्र में इसको छोड़ दिया. उनका परिवार काफी गरीब था और वह वैश्यवृति में शामिल थे. यहां तक कि उन्होंने अपनी बायोग्राफी में भी खुद को वेश्या बता दिया है. बिनोदिनी की 5 साल की उम्र में शादी करवा दी गई थी और उनके पति से कोई भी संबंध नहीं रहा. Banglapedia.org एक रिपोर्ट की माने तो आपको बता दें कि वह तीन मर्दों की रखैल भी रही. उनकी एक बेटी हुआ करती थी जिसकी 12 साल की उम्र में मौत हो गई.
बिनोदिनी थी ब्रिटिश राज की भारत की पहली फीमेल थिएटर एक्ट्रेस
नटी बिनोदिनी ब्रिटिश राज में भारत की पहली फीमेल थिएटर एक्ट्रेस हुआ करती थी. उन्होंने द्रौपदी की एक छोटी सी भूमिका में गेट नेशनल थियेटर में अपनी शुरुआत कर दी थी. यहां तक कि उन्होंने बंगाल थिएटर के लिए भी बेहतरीन काम किया. बिनोदिनी ने उस वक्त एक फेमस एक्टर और नाटककार गिरीश चंद्र घोष से एक्टिंग की बारीकियां सीख ली थी और बाद में दोनों ने 1883 में स्टार थिएटर की स्थापना कर दी.
बिनोदिनी ने अचानक से छोड़ दिया था थिएटर
बताया तो यह भी जाता है कि बिनोदिनी ने 19वीं सदी में रामकृष्ण परमहंस के सामने चैतन्य लीला में चैतन्य की भूमिका निभाई। इतना ही नहीं बताया तो यह भी जाता है कि साल 1884 में वह बिनोदिनी का प्ले देखने पहुंचे थे. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और स्वामी विवेकानंद जैसी महान हस्तियों ने भी उनकी खूब तारीफ की थी. बिनोदिनी ने अपनी एक्टिंग से हर किसी का दिल जीत लिया था और समाज में उनको एक अलग नजरिए से देखा जाने लगा था. लेकिन अचानक से उन्होंने थिएटर छोड़ दिया और अपनी ऑटोबायोग्राफी में धोखे का भी जिक्र किया.
बिनोदिनी ने एक्टिंग से बनाई थी ख़ास पहचान
बिनोदिनी एक मशहूर एक्ट्रेस और सिंगर रहा करती थी और उनको लिखने का भी काफी ज्यादा शौक था. उन्होंने साल 1912 में अपनी ऑटोबायोग्राफी 'अमार कथा' पब्लिश कर दी थी। एक्ट्रेस कविताएं भी लिखा करती थी और सरल और स्पष्ट शैली में कई सारी उन्होंने कहानी भी लिख दी थी. उस दौर में महिलाओं का मर्दों से कंधे से कंधा मिलाकर चलना एक बड़ी बात हुआ करती थी. उस वक्त थिएटर में मर्द ही महिलाओं का किरदार निभा दिया करते थे और बिनोदिनी में इतनी हिम्मत थी कि वह उस वक्त मंच पर जाकर एक्टिंग करती थी.
बिनोदिनी पर बन चुके हैं कई सीरियल और फ़िल्में
नटी बिनोदिनी पर पहले भी फ़िल्में और डॉक्यूमेंट्री बनाई जा चुकी है. दरअसल साल 1994 में दिनेश गुप्ता की बंगाली फिल्म 'नटी बिनोदिनी' में देबाश्री रॉय ने उनका काफी बेहतरीन किरदार निभाया. बता दें कि बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के फेमस फिल्म मेकर रितुपर्णाे घोष ने भी उन पर फिल्म बनाई और इसका नाम 'अबोहोमान' रखा. इसमें अनन्या चटर्जी ने बिनोदिनी की भूमिका अदा की. बिनोदिनी पर टीवी सीरियल भी बनाई जा चुके हैं.


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