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    कब्रिस्तान में जाकर घंटों चिल्लाते थे, बना गए 300 फिल्मों का जबरदस्त Record, ऐसा कोई और नहीं

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    जहां एक तरफ नए साल की शुरूआत हुई वहीं पहले ही दिन बॉलीवुड को हिलाकर रख देने वाली खबर आ गई। ये खबर थी अभिनेता कादर खान के निधन की। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कादर खान आज दुनिया को अलविदा कह गए। वे लंबे समय तक गंभीर बीमारी से जंग करते रहे लेकिन बढ़ती उम्र के कारण वे जंग हार गए और सभी को सदमा देकर चले गए। कादर खान प्रोगेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर नाम की बीमारी से जूझ रहे थे।

    [साल की पहली बुरी खबर, कादर खान के निधन पर हिल गया बॉलीवुड, ऐसे मनाया शोक]

    बताया जाता है कि कनाडा के अस्पताल में भर्ती कादर खान को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था, धीरे-धीरे उनकी स्थिति और गंभीर होती गई और उनके दिमाग ने काम करने बंद कर दिया। कादर खान के बेटे सरफराज ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की।

    कादर बॉलीवुड के वो अभिनेता थे जिन्होंने न सिर्फ अपनी बेहतरीन कॉमेडी से हमें हंसाया बल्कि गंभीर किरदारों में खूब रुलाया भी.. वहीं उनकी मृत्यु की खबर भी रुला गई। जब ये खबर आई तो कुछ वक्त तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ। नए साल पर इस दुखद खबर ने वाकई सबको हिला कर रख दिया। कादर खान तो चले गए लेकिन ऐसी यादें देकर गए हैं जो कभी फीकी नहीं पड़ेंगी। तो चलिए आज उन्हें याद करते हुए जानते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जो आपकों चौंका देंगी।

    घंटों चिल्लाते थे

    घंटों चिल्लाते थे

    एक इंटरव्यू के दौरान कादर खान ने एक बेहद मजाकिया खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उनकी मां उन्हें पढ़ने के लिए मस्जिद भेजा करती थी लेकिन वे मस्जिद से भागकर कब्रिस्तान चले जाते थे। वहां पर वह घंटों चिल्लाते थे।

    पहली फिल्म की फिल्मी कहानी

    पहली फिल्म की फिल्मी कहानी

    कादर खान को चिल्लाते सुपरस्टार अभिनेता अशरफ खान ने देख लिया। उन्हें अपने एक नाटक के लिए ऐसे ही अजीब लड़के की तलाश थी। वहीं फिर कादर नाटकों में सक्रीय हो गए.. इसी दौरान कादर पर दिलीप कुमार साहब की नजर पड़ी.. बस फिर क्या था दिलीप कुमार ने उन्हें अपनी फिल्म सगीना के लिए साइन कर लिया।

    पहली फिल्म

    पहली फिल्म

    कादर खान ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1974 में रिलीज हुई फिल्म सगीना से की थी।

    300 से ज्यादा फिल्में

    300 से ज्यादा फिल्में

    कादर खान ने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय और संवाद लेखन का काम किया। अपनी बुलंद आवाज़ और ग़ज़ब की कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाने वाले कादर खान ने कई सुपरहिट फिल्में दी।

    नहीं बनना विलेन

    नहीं बनना विलेन

    उन्होंने कॉमेडी के साथ-साथ विलेन के किरदार भी बड़े गजब अंदाज में निभाए.. हालांकि एक घटना के बाद उन्होंने विलेन के किरदार छोड़ दिए। दरअसल, एक दिन उनके बेटे सरफराज स्कूल से लड़ाई कर लौटे, जब कादर ने उनसे पूछा तो जवाब मिला कि स्कूल में सब उसे विलेन और बुरे आदमी का बेटा कहकर चिढ़ाते हैं। तब से कादर ने तय कर लिया कि वे विलेन नहीं बनेंगे।

    एक और फिल्मी कहानी

    एक और फिल्मी कहानी

    कादर खान बेहद गरीब परिवार से थे। उनकी मां उन्हें हमेशा पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनने की सीख देती थीं। कादर ने अपनी मां की सीख को दिल से लगाया और वे फिल्मों में आने से पहले एमएच सैबू सिद्दिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। वहीं इसके बाद भी उन्होंने लेखन पर कभी पकड़ नहीं छोड़ी।

    शानदार फिल्में

    शानदार फिल्में

    आपको बता दें कि कादर ने धर्म वीर, गंगा जमुना सरस्वती, कुली, देश प्रेमी, सुहाग, अमर अकबर एंथनी, ज्वालामुखी, शराबी, लावारिस और मुकद्दर का सिकंदर जैसी फिल्में लिखी। खान ने कुली नंबर 1, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कर्मा, सल्तनत जैसी फिल्मों के संवाद लिखे।

    बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड

    बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड

    कैदर खान को फिल्म बाप नंबरी बेटा दस नंबरी के लिए बेस्ट बेस्ट कॉमेडियन का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है।

    English summary
    Veteran actor Kader Khan filmy journey was no less than a film here is how.
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