47 की उम्र में मां बनने पर एक्ट्रेस को हुआ पछतावा! 2 साल पहले ही बेटी को दिया था जन्म, बोली-तभी बच्चा चुनें जब

टीवी की मशहूर अभिनेत्री संगीता घोष ने दिसंबर 2021 को बेटी देवी को जन्म दिया। लेकिन प्रीमेच्योर डिलीवरी की वजह से अभिनेत्री की बेटी को 15 दिनों तक NICU में रखा गया। इसी के बाद में संगीता अपनी बेटी को घर लेकर गई थी। लेकिन बेटी को घर ले जाने के बावजूद भी संगीता 10 दिनों तक अपनी बेटी के साथ में वक्त नहीं गुर्जर पाई और उनका काम पर वापस लौटना पड़ा। लेकिन अब47 साल की एक्ट्रेस ने मां बनने और अपनी बेटी के पालन पोषण को लेकर एक बड़ा खुलासा कर दिया है। यहां तक की इस पर खुलकर अपनी राय दी है। एक्ट्रेस ने अपनी बेटी का ढंग से ख्याल ना रख पाने पर पछतावा जताया है।
45 साल की उम्र में बनी मां
दरअसल आपको बता दें कि संगीता ने 45 साल की उम्र में 25 दिसंबर 2021 को अपनी बेटी देवी को जन्म दिया। बेटी के पैदा होने की तकरीबन 25 दिन के बाद में ही उनका काम पर वापस लौटना पड़ा। संगीता की बेटी प्रेमी कर हुई थी और इसे 15 दिनों तक NICU में रखा गया। इसके बाद में वह अपनी बेटी को घर लेकर गई थी। लेकिन अब हाल ही में संगीता ने ईटाइम्स के साथ में अपना एक इंटरव्यू साझा किया है।
बच्चे संभालने को लेकर संगीता घोष की राय
दरअसल आपको बता दें कि संगीता घोष ने बताया कि "मुझे ऐसा लगता है कि किसी को तभी माता-पिता बनना चाहिए जब वह बच्चे को संभाल सके। इसके लिए वह पूरी तरीके से तैयार हो। आज के वक्त में हमारे पास में बहुत तरीके की टेक्नोलॉजी आ चुकी है और इतनी एडवांस भी है। हमारे पास काफी सारे विकल्प हैं और आप एक बच्चा भी गोद ले सकते हैं।"
संगीता घोष ने मां बनने को लेकर रखी राय
इंटरव्यू के दौरान संगीता घोष ने यह भी कहा कि "आप किसी भी उम्र में मां बन सकती हैं। लेकिन आपको यह फैसला तभी लेना चाहिए जब इसके लिए आप पूरी तरीके से तैयार हो जाएं। जब आप अपने बच्चे और उसकी जरूरत का ख्याल रख पाए। उनको अपने में सक्षम हो। बच्चा संभालना मुश्किल तो है लेकिन इसी के अलावा यह काफी फुलफिलिंग भी होता है।"
संगीता घोष के पति ने किया सपोर्ट
संगीता घोष आगे यह भी बताती है कि "बच्चा होने के बाद में कई सारी महिलाएं तो खुद पर ध्यान देना ही बंद कर देती हैं। लेकिन मैं खुद पर पहले ज्यादा फोकस करती हूं और अपनी सेहत का अब और भी ज्यादा ध्यान रखती हूं। मुझे बहुत अच्छे से याद है जब मैंने अपनी 25 दिन की बेटी को छोड़कर कम पर जाने का फैसला लिया। हालांकि यह समय मेरे लिए काफी ज्यादा मुश्किल था। शुरुआती वक्त में मैं उसके पास नहीं रह पाई। लेकिन मेरे पति ने मुझे काफी सपोर्ट किया। तूने बेटी का काफी ध्यान रखा और मैं रोज काम पर जाने के बाद उससे वीडियो कॉल पर बात भी किया करती थी। मैं उसको यही सीखना चाहती थी कि महिलाओं को कभी भी अपने सपनों को मारना नहीं चाहिए।"


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