इस फिल्म ने गोविंदा का करियर कर दिया खत्म, मेकर्स को भी भुगतना पड़ा था करोड़ों का नुकसान

गोविंदा को 1980-1990 के दशक के शीर्ष सितारों में से एक माना जाता है। अभिनेता ने अपनी गुदगुदाने वाली कॉमेडी ब्लॉकबस्टर से 90 के दशक में राज किया। हालांकि, 2000 में, अभिनेता का सुपरस्टारडम प्रभावित हुआ और हर साल उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई।
2003 में, उन्होंने एक फिल्म में एक्ट किया जिसके बाद उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का फैसला किया और राजनीति में शामिल हो गए। इस रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा के मेकर्स को भारी नुकसान हुआ। इस फिल्म की असफलता का गोविंदा पर इतना बुरा असर पड़ा कि उन्होंने बॉलीवुड छोड़कर राजनीति में उतरने का फैसला कर लिया।
राजा भैया में गोविंदा के साथ आरती छाबड़िया ने मुख्य भूमिका निभाई थी। राजा भैया 24 नवंबर 2003 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में गोविंदा और आरती के अलावा राकेश बेदी, सदाशिव अमरापुरकर और उमेश शुक्ला (ओएमजी निर्देशक) ने भी अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म का गोविंदा ने जमकर प्रमोशन किया था और उम्मीद थी कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल करेगी। हालांकि, राजा भैया की शुरुआत निगेटिव रिव्यूज के साथ हुई, जिसके कारण यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म में से एक बन गई।
4.75 करोड़ रुपये के कथित बजट में बनी राजा भैया बॉक्स ऑफिस पर केवल 2.85 करोड़ रुपये ही कमा सकीं। राजनीति में आने और 3 साल का ब्रेक लेने से पहले यह गोविंदा की आखिरी फिल्म थी। हालांकि, उनकी अन्य फ़िल्में, 'खुल्लम खुल्ला प्यार करें', 'सुख' और 'सैंडविच' उनके रिटायरमेंट से पहले पूरी हो गईं और बाद में रिलीज़ हुईं। राजा भैया की वजह से मेकर्स को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा। इस फिल्म के बाद गोविंदा तीन साल तक सिल्वर स्क्रीन से गायब रहे और उन्होंने भागम भाग (2006) से वापसी की।
गोविंदा की आखिरी फिल्म
कभी सुपरस्टार माने जाने वाले गोविंदा ने फिल्मों से छुट्टी ले ली है। अभिनेता की आखिरी बड़ी स्क्रीन पहलाज निहलानी की 'रंगीला राजा' (2019) थी। राजा बाबू स्टार अब रियलिटी शो में गेस्ट रोल निभाते नजर आते हैं।


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