टीचर्स डे स्पेशल - सुष्मिता सेन, पूनम पांडे, अनिल कपूर, फिल्मों में Sex Object की तरह दिखाए गए ये 8 टीचर्स
5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। टीचर्स डे के इस मौके पर हम बात करते हैं उन बॉलीवुड फिल्मों की जिन्होंने महिलाओं के stereotype को ना तोड़ते हुए टीचर्स को भी उसी तरह पेश किया है। महिलाओं को उपभोग की वस्तु की तरह दिखाना हिंदी फिल्मों के लिए नया नहीं है। फिर भले ही वो एक टीचर के किरदार में क्यों ना हो।
अगर हम पुरूष टीचर की बात करें तो हमें मोहब्बतें के नारायण शंकर जैसे कठोर या फिर स्टूडेंट ऑफ द ईयर के ऋषि कपूर जैसे नियम वाले टीचर याद आएंगे। कुछ को फालतू के रितेश देशमुख जैसे टीचर कम दोस्त ज़्यादा वाले टीचर भी याद आ सकते हैं। लेकिन महिलाओं की बात करते हुए आपको सबसे पहले याद आएंगी मैं हूं ना की सेक्सी मिस चांदनी।

हालांकि, हिंदी फिल्मों में पुरूष टीचर्स के साथ रोमांस के सपने देखने की शुरूआत डेविड धवन ने की थी फिल्म अंदाज़ के साथ। जहां करिश्मा कपूर अपने शादी शुदा टीचर अनिल कपूर पर फिदा हो जाती हैं और फिर उन्हें पाने के सपने देखना शुरू कर देती हैं। उन सपनों में अनिल कपूर, अपनी स्टूडेंट करिश्मा कपूर की नाभि पर चुंबनों की बारिश करने से भी नहीं कतराते।
अगर हिंदी फिल्मों की बात करें तो बहुत कम ऐसी फिल्में हैं जहां टीचर के प्रति स्टूडेंट के इस पहले प्यार वाली फीलिंग को परिपक्व तरीके से दिखाया गया है। यूं कहिए कि ऐसी फिल्में ना के बराबर हैं।

मैं हूं ना
फराह खान द्वारा निर्देशित मैं हूं ना में सुष्मिता सेन को बेहद सेक्सी टीचर के अवतार में दिखाया गया था। उनका ग्लैमर देखकर क्लास का स्टूडेंट राम उनके साथ पूरी तरह फ्लर्ट करता है। राम (शाहरूख खान) भले ही एक आर्मी ऑफिसर है लेकिन स्टूडेंट अवतार उसका कवर है, पर ये स्टूडेंट अपनी केमिस्ट्री टीचर के साथ पूरी क्लास के सामने छेड़छाड़ करने में ज़रा भी नहीं शरमान। वो टीचर भी थोड़ी देर रूठती है लेकिन फिर राम की छेड़छाड़ इंजॉय करती है। Wow!

चित्रांगदा सिंह - देसी बॉयज़
सुष्म्मिता सेन जैसा ही हाल होता है देसी बॉयज़ में चित्रांगदा सिंह का। चित्रांगदा फिल्म में इकॉनॉमिक्स की टीचर बनी हैं जिनके स्टूडेंट अक्षय कुमार उन पर पूरी तरह फिदा हैं और अपने प्यार का एलान क्लास के सामने करने में ना ही उन्हें कोई गुरेज है और ना ही कोई शर्म। दिक्कत ये है कि टीचर को भी इस बात से ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई। ना ही दर्शकों को।

अर्चना पूरन सिंह - कुछ कुछ होता है
कुछ कुछ होता है में प्रिंसिपल अनुपम खेर, अपनी कॉलेज की इंग्लिश टीचर को जब squeeze me कहते हैैं तो किसी को इस बात पर कोई आपत्ति नहीं होती है। मिस ब्रिगांज़ा एक हॉट टीचर, जिनकी शॉर्ट स्कर्ट को कॉलेज के प्रिंसिपल भी इंजॉय करते हैं। इतना कि जब मिस ब्रिगांज़ा चलती हैं तो कैमरा शॉट उनकी स्कर्ट पर ही पूरी तरह फोकस करता है। एक बार फिर से Wow!

पूनम पांडे - नशा
जब फराह खान से लेकर शाहरूख खान तक टीचर को sex object की तरह पेश कर सकते हैं तो पूनम पांडे क्यों पीछे रहती। उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर अपने स्टूडेंट के साथ एक इंटिमेट लव स्टोरी दिखाने का फैसला किया। नशा में पूनम पांडे एक ड्रामा टीचर बनी हैं जो अपने ही स्टूडेंट से प्यार कर बैठती हैं। याद रखिएगा, स्कूल के स्टूडेंट से!

शब्द - ऐश्वर्या राय
एक बार फिर से शब्द में ऐश्वर्या राय को एक सेक्सी टीचर के रूप में दिखाया गया लेकिन फिल्म में मर्यादाओं का ध्यान रखा गया और इस विषय को साईकोलॉजिक तरीके से देखा गया। फिल्म में ऐश्वर्या राय एक शादीशुदा टीचर की भूमिका में थीं जिनके प्यार में गिर जाते हैं एक और साथी टीचर (ज़ाएद खान)। फिल्म में ज़ाएद खान ने ऐश्वर्या राय से उम्र में छोटे लड़के का किरदार निभाया था।

भूमि पेडनेकर - पति, पत्नी और वो
फिल्म पति, पत्नी और वो में भूमि पेडनेकर को एक टीचर की भूमिका में दिखाया गया है जो आधुनिक है, खुले विचारों की है और साड़ी में भी पूरी ग्लैमरस दिख सकती हैं। उनके प्यार में क्लास का एक लड़का पड़ जाता है। हालांकि, इस विषय को फिल्म में समझदार तरीके से डील किया गया है।

रसभरी - स्वरा भास्कर
युवावस्था की ओर बढ़ रहे बच्चों में अपनी टीचर को लेकर कितनी कामुक भावनाएं हो सकती हैं ये दिखाया है हाल ही में आई वेब सीरीज़ रसभरी में। इस सीरीज़ में स्वरा भास्कर एक अंग्रेज़ी टीचर की भूमिका में हैं जिनका स्टूडेंट उनके बारे में सपने देखता है। उन सपनों को साक्षात परदे पर दिखाया गया है जिसे स्वरा भास्कर द्वारा बेहद फूहड़ तरीके से परदे पर पेश करवाया गया है।

राज कपूर ने की थी शुरुआत
टीचर के प्रति स्टूडेंट के आकर्षण को बेहद विस्तार से दिखाया गया था राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर में। यहां ऋषि कपूर अपनी टीचर सिमी ग्रेवाल से प्यार करने लगते हैं और उनके मन में इतनी जिज्ञासा जगती है अपनी टीचर को नहाते हुए देखने पर। राज कपूर ने इस सीन को परिपक्व दृष्टि से दिखाने की कोशिश ज़रूर की थी लेकिन फिर भी ये सीन, हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे कंट्रोवर्शियल सीन में से एक है। इसके बाद बॉलीवुड ने टीचर्स को objectify करना शुरू किया और धीरे धीरे एक अलग मॉडल बन चुका है जो अभी तक तो तोड़ना मुश्किल दिखता है।


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