For Quick Alerts
    ALLOW NOTIFICATIONS  
    For Daily Alerts

    सुरेखा सिकरी का यादगार सफर: थियेटर, टेलीविजन से लेकर फिल्मों तक, 4 दशक के करियर में जीते 3 नेशनल अवार्ड

    |

    थियेटर से लेकर टेलीविजन और फिल्मों में काम कर चुकीं दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी ने 16 जुलाई को आखिरी सांसे लीं। 75 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। सुरेखा कई महीनों से बीमार थीं। उन्होंने पिछले साल ब्रेन स्ट्रोक भी झेला था। सुरेखा सीकरी के मैनेजर ने उनके निधन की सूचना देते हुए कहा है कि दो ब्रेन स्ट्रोक के बाद से वो कई तरह की दिक़्क़तों से जूझ रही थीं।

    अभिनेत्री के जाने से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री शोकग्रस्त है। अपने 4 दशक से ज्यादा लंबे करियर में सुरेखा सीकरी ने कई यादगार किरदार निभाए। उनके किरदारों के लंबाई भले कभी लंबी, कभी छोटी होती रही, लेकिन वह हमेशा प्रभावी रहीं।

    'तूफान' फिल्म रिव्यू'तूफान' फिल्म रिव्यू

    सुरेखा सीकरी ने साल 1978 में फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई फिल्मों में काम किया। उन्हें सपोर्टिंग अभिनेत्री के लिए तीन बार राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सम्मानित

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सम्मानित

    सुरेखा सीकरी को तमस (1988), मम्मो (1995) और बधाई हो (2018) में सहायक अभिनेत्री के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।'बधाई हो' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार लेने वह व्हीलचेयर पर खुद पहुंची थीं।

    दादीसा के किरदार से लोकप्रियता

    दादीसा के किरदार से लोकप्रियता

    2008 से 2016 के दौरान अभिनेत्री ने धारावाहिक बालिका वधू में दादीसा के किरदार के साथ टेलीविजन पर अपनी छाप छोड़ी। उनका यह किरदार बहुत लोकप्रिय हुआ। इस धारावाहिक को तमिल, तेलुगू और मलयालम के अलावा कई अन्य भाषाओं में डब किया गया, जिसके चलते सीकरी की लोकप्रियता का दायरा उत्तर भारत के परे भी पहुंच गया था।

    थियेटर से फिल्मों तक

    थियेटर से फिल्मों तक

    राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सुरेखा सीकरी नाटकों के माध्यम से बड़े पर्दे तक पहुंचीं थीं। 70, 80 और 90 के दशक के समानांतर सिनेमा में वह लगातार नज़र आती रहीं।

    चर्चित फिल्में

    चर्चित फिल्में

    श्याम बेनेगल के साथ 'मम्मो' फ़िल्म के अलावा उन्होंने 'सरदारी बेगम' (1996), 'हरिभरी' (2000) और 'ज़ुबैदा' (2001) में भी काम किया। इसके अलावा सईद मिर्जा के साथ 'सलीम लंगड़े पे मत रो' (1989) और 'नसीम' (1995) और अपर्णा सेन के साथ 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' (2003) में वे नजर आईं।

    टेलीविजन का सफर

    टेलीविजन का सफर

    90 के दशक में उन्होंने टीवी सीरियलों में लीडिंग भूमिकाएं की थीं। 'बनेगी अपनी बात' में वह युवा बेटियों की मां की भूमिका में थीं जबकि 'जस्ट मोहब्बत' में उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल का किरदार निभाया था।

    बाद में वो 'एक था राजा एक थी राजी', 'बालिका वधु', 'परदेस में है मेरा दिल', 'महा कुंभ' जैसे टीवी शोज में भी नजर आई थीं।

    अंतिम फिल्में

    अंतिम फिल्में

    'बधाई हो' के अलावा उनकी आख़िरी फ़िल्मों में अमोल गुप्ते की 'स्निफ' और जोया अख़्तर की घोस्ट स्टोरीज रहीं।बीते साल की शुरुआत में महाबालेश्वर में एक शूट के दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ, इसके बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर ठुकराना पड़ा।

    English summary
    Veteran actress Surekha Sikri passes away after suffering a cardiac arrerst. In her film career of 4 decades, she has won three national awards.
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X